Advertisement
सरकार का नया मास्टरस्ट्रोक! राज्यों को मिलेगा परफॉर्मेंस बेस्ड फंड, मनरेगा होगा रिप्लेसGold, Silver Price Today: सोने में लौटी तेजी, चांदी के भाव ₹2.76 लाख के पारनिजी कंपनियां बनाएंगी बैलिस्टिक मिसाइलें, भारत की डिफेंस स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलावCDS अनिल चौहान का बड़ा बयान! थिएटर कमांड से बदलेगी भारत की सैन्य रणनीति, चीन-पाकिस्तान पर सख्त संदेशदिल्ली में पेट्रोल 102 रुपये पार, लेकिन इन देशों में 3 रुपये लीटर से भी कम में मिल रहा तेलटाटा ग्रुप में हलचल तेज! बोर्ड बैठक से पहले नोएल टाटा-चंद्रशेखरन की अहम मुलाकात, बड़े फैसलों के संकेतAI और Biotech की वजह से भारत में बढ़ रही Pharma Jobs! अगले 3 साल में बड़ा उछाल‘Yellow Kurti’ टाइप करते ही मिलेगा परफेक्ट प्रोडक्ट! Flipkart Shopsy का AI गेम शुरूभारत में 4 साल में 0 से 12 सेमीकंडक्टर प्लांट, अश्विनी वैष्णव ने बताई पूरी रणनीति5 रुपये महंगा हुआ ईंधन और बदल गई कार खरीदने की सोच! EV की तरफ भाग रहे ग्राहक
अन्य समाचार पी नवीन : भिखारियों को सम्मानजनक जिंदगी और मौत देने को संकल्पबद्ध
'

पी नवीन : भिखारियों को सम्मानजनक जिंदगी और मौत देने को संकल्पबद्ध

PTI

- February,10 2020 6:35 AM IST

दो फरवरी

तमिलनाडु के तिरूचिरापल्ली जिले में मुसिरी के रहने वाले पी नवीन ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और अपने संस्थान के श्रेष्ठ छात्र रहे हैं, लेकिन वह पिछले छह बरस से सिर्फ भिखारियों के कल्याण में लगे हैं।

नवीन ने 2014 में तीन लोगों के साथ एक गैर सरकारी संगठन ‘अत्चयम ट्रस्ट’ की स्थापना की थी। आज उनका यह ट्रस्ट तमिलनाडु के 18 जिलों तक फैल चुका है और 4300 से अधिक भिखारियों की काउंसलिंग करने के साथ ही 424 भिखारियों को एक नयी जिंदगी देकर उनका पुनर्वास कर चुका है। नवीन के सफर में आज 400 से ज्यादा स्वयं सेवकों का कारवां जुड़ चुका है।

2015 -16 के लिए राष्ट्रीय युवा पुरस्कार जीतने वाले नवीन को 2019 में मुख्यमंत्री के राज्य युवा पुरस्कार के लिए चुना गया। अपने काम के लिए कुल 40 से ज्यादा पुरस्कार हासिल करने वाले नवीन बताते हैं कि कई बार एक बेहतर जीवन ही नहीं बल्कि एक सम्मानित मृत्यु की चाह में भी लोग भिक्षावृत्ति छोड़ने का उनका परामर्श मान लेते हैं।

ऐसी ही एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने एक भिखारी का पुनर्वास करके उसे आश्रम में पहुंचाया। वह कुछ दिन तो आश्रम में रहा, लेकिन फिर कई कारणों से भिक्षावृत्ति के रास्ते पर वापस लौट गया। तकरीबन एक वर्ष बाद नवीन जब दोबारा उस व्यक्ति से मिले तो वह वृद्धाश्रम जाने के लिए तत्काल राजी हो गया। पूछने पर उसने बताया कि पिछले दिनों उसका एक साथी भिखारी बीमारी के कारण सड़क किनारे लावारिस मर गया और उसके शव को भी कोई उठाने वाला नहीं था। वह खुद इस तरह की मौत नहीं मरना चाहता था इसलिए वृद्धाश्रम जाने को तैयार हुआ।

केवल 20 वर्ष की आयु में इस रास्ते पर निकले नवीन बताते हैं कि 2013 में वह सलेम के एस एस एम कालेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। शहर में ढेरों भिखारियों को देखकर उन्हें बहुत दुख होता था। बहुत बार वह अपने रात के खाने का पैसा भिखारियों को देकर खुद भूखे सो जाते थे। उन्हें यह संतोष होता था कि उनकी वजह से किसी एक ने पेट भर भोजन किया होगा।

इस बीच एक दिन की घटना ने उन्हें बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर दिया। उन्हें सड़क पर भीख मांगता हुआ एक युवक दिखाई दिया। उसका कहना था कि वह मदुरै वापस लौट जाना चाहता है इसलिए भीख मांग रहा है। उस दिन नवीन के पास सिर्फ 10 रूपए थे, जो उन्होंने उस युवक को दे दिए और यह सोचकर खुशी खुशी भूखे सो गए कि वह युवक अपने घर चला गया होगा, लेकिन चंद रोज बाद उन्हें वही युवक फिर मिला और वही बात दोहराई। नवीन ने फिर उसे 10 रूपए दिए और जब उसका पीछा किया तो उसे शराब की दुकान पर जाते देखा।

इसके बाद नवीन ने भिक्षावृत्ति की वजह तलाश करने की कोशिश की और इस दौरान महान विभूतियों एपीजे अब्दुल कलाम और स्वामी विवेकानंद की किताबों का गहन अध्ययन किया। अपने परिवार, दोस्तों और शिक्षकों से इस समस्या पर बात की, लेकिन किसी ने उनका साथ नहीं दिया और नवीन ने मजबूरन अपना इरादा छोड़कर पढ़ाई की ओर रूख किया।

नवीन बताते हैं कि 2014 में उनकी मुलाकात सलेम में भीख मांग रहे 60 बरस के एक बूढ़े भिखारी राजशेखर से हुई। शुरू में राजशेखर उनसे बात करने के लिए तैयार नहीं हुए, लेकिन 20-22 दिन की मेहनत के बाद राजशेखर ने उनसे बात की और अपनी दुखभरी कहानी सुनाई। वह घंटों राजशेखर की कहानी सुनते रहे और राजशेखर ने भीख मांगकर कमाई चंद सिक्कों की अपनी पूंजी से उन्हें चाय पिलाई। उन लम्हों ने भिखारियों के प्रति नवीन का नजरिया बदल दिया और उन्होंने हर कीमत पर उनकी मदद करने की ठान ली।

2014 में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें बेस्ट स्टूडेंट का अवार्ड मिला और उन्होंने कॉलेज प्रबंधन से अनुरोध करके कॉलेज की एक एक कक्षा में जाकर अपनी योजना के बारे में बताया। यहां से उन्हें तीन लोगों की टीम मिली और कुछ अन्य लोगों के सहयोग से उन्होंने धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए ट्रस्ट का गठन किया। वह पुलिस संबंधी सामान्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अलग अलग तरह के भिखारियों की अलग अलग तरीके से मदद करते हैं। जिन्हें काम की तलाश होती है उन्हें काम दिलवाते हैं। मानसिक रूप से कमजोर लोगों को संबद्ध संस्थानों में भेजा जाता है और इस सबसे पहले उन्हें नहाने धोने की सुविधा और अच्छे कपड़े देकर समाज का हिस्सा बनाया जाता है।

नवीन कहते हैं कि सड़कों पर भीख मांगना किसी को पसंद नहीं होता। ये लोग भी एक बेहतर जिंदगी के हकदार हैं और बेहतर विकल्प मिलने पर उसे खुशी खुशी स्वीकार करते हैं।

भाषा एकता

एकता नरेश

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement