यहां एक बैठक के बाद नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने कहा, हमने मामले पर चर्चा की और प्रस्तावों का नया सेट, कानूनी प्रारूप देने के लिए अब पेश किया जाएगा।
इस बैठक से एक सप्ताह पहले कोलकाता एवं चेन्नई सहित पांच हवाईअड्डों के निजीकरण के लिए बोलीकर्ताओं को छांटने की समय सीमा करीब दो महीने के लिए आगे बढ़ा दी गई। केवल लखनउ हवाईअड्डे के लिए तिथि थोड़ा पहले कर दी गई है। इन सभी हवाईअड्डों का आधुनिकीकरण पहले ही एएआई द्वारा किया जा चुका है।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय राजस्व बंटवारा जैसे मुद्दों पर योजना आयोग के आदर्श रियायत समझौते के कुछ प्रावधानों पर असहमति जताई है। जहां योजना आयोग चाहता है कि चयनित निजी पक्ष एएआई के साथ केवल विमानन राजस्व साझा करें, वहीं मंत्रालय चाहता है कि हर तरह की आय एएआई के साथ साझा की जानी चाहिए।
मंत्रालय ने यह भी कहा है कि हवाईअड्डों को 30 साल की अवधि के लिये पट्टे पर दिया जाना चाहिये और उसके बाद चयनित पार्टी द्वारा किये गये काम की समीक्षा होनी चाहिये उसके बाद ही और 30 साल के लिये हवाईअड्डा उसे दिया जाना चाहिये।
लखनउ, चेन्नई, कोलकाता के अलावा जयपुर, गुवाहटी और अहमदाबाद हवाईअड्डों के संचालन और प्रबंधन का काम भी निजी हाथों में देने का प्रस्ताव है।