राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ें बताते हैं कि विभिन्न राज्यों से वर्ष 2012 में दहेज हत्या के 8233 मामले सामने आए । आंकड़ों का औसत बताता है कि प्रत्येक घंटे में एक महिला दहेज की बलि चढ़ रही है ।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों की इस श्रेणी के तहत वर्ष 2011 में हुई मौतों की संख्या 8618 थी लेकिन कुल दोष सिद्धि दर 35 ़ 8 फीसदी थी जो वर्ष 2012 में दर्ज मामलों में 32 फीसदी दोष सिद्धि दर से थोड़ा ही अधिक थी।
रिकार्ड कहता है कि वर्ष 2007 से 2011 के बीच देश में दहेज हत्याओं के मामलों में तेजी आयी है । वर्ष 2007 में ऐसे 8093 मामले दर्ज हुए लेकिन वर्ष 2008 और 2009 में यह आंकड़ा क्रमश: 8172 और 8383 था।
एनसीआरबी के अनुसार, वर्ष 2010 में इस प्रकार की 8391 मौतें दर्ज की गयीं ।
एनसीआरबी राष्ट्रीय स्तर पर आपराधिक आंकड़ों का संग्रहण करने वाली केंद्रीय एजेंसी है ।
इस प्रकार के अपराधों से निपटने वाले पुलिस अधिकारी मामलों में वृद्धि के लिए विभिन्न कारण गिनाते हैं ।
दिल्ली पुलिस की अतिरिक्त पुलिस आयुक्त : विशेष महिला एवं बाल शाखा : सुमन नलवा कहती हैं कि यह समस्या केवल निचले या मध्यम तबके तक ही सीमित नहीं है ।
वह कहती हैं, उच्च सामाजिर्क ़ आर्थिक ढांचे में भी इस प्रकार के अपराध हो रहे हैं । हमारे समाज में उच्च वर्ग तक दहेज को ना नहीं कहता। यह हमारी सामाजिक व्यवस्था में गहरे तक फैला हुआ है ।