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पेट्रोल, डीजल वाहनों का आकर्षण कायम

Last Updated- December 12, 2022 | 9:32 AM IST

वैश्विक स्तर पर कार खरीदारों के बीच डीजल अथवा पेट्रोल मॉडलों को खरीदने का रुझान एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है क्योंकि मौजूदा अनिश्चितता के दौरान में ग्राहक सस्ती और जांची-परखी तकनीक को तलाश रहे हैं। डेलॉयट के ग्लोबल कंज्यूमर स्टडी 2021 से यह खुलासा हुआ है।
इस अध्ययन में छह देशों के प्रतिभागियों को शामिल किया गया है। इनमें अमेरिका के बाद भारत ऐसा दूसरा देश है जहां गैर-पेट्रोल/ डीजल वाहनों के लिए ग्राहकों की प्राथमिकता में भारी गिरावट दिख रही है। अध्ययन से पता चलता है कि वैकल्पिक र्ईंधन वाले वाहनों को पसंद करने वाले खरीदारों का प्रतिशत घटकर 32 फीसदी रह गया जो एक साल पहले 49 फीसदी रहा था।
दिलचस्प है कि भारत में 32 फीसदी जिन लोगों ने पारंपरिक इंजन के विकल्प वाली कारों को पसंद करने की बात की है उनमें 24 फीसदी लोगों ने विकल्प के रूप में हाइब्रिड को चुना न कि शुद्ध इलेक्ट्रिक को। यह ऐसे समय में दिख रहा है जब हाइब्रिड के मुकाबले इलेक्ट्रिक को कहीं अधिक नीतिगत बढ़ावा दिया जा रहा है।
हाइब्रिड के रूप में मध्य मार्ग को अपनाने वाले अधिकतर देशों के विपरीत भारत ने पेट्रोल/ डीजल वाहनों से सीधे शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए छलांग लगाने की कोशिश की है। डेलॉयट के पार्टनर एवं ऑटोमोटिव सेक्टर के लीडर राजीव सिंह ने कहा कि यह उन खरीदारों के लिए बहुत अच्छा नहीं है जो पहले हाइब्रिड और उसके बाद शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहन को अपनाने में कहीं अधिक सहज महसूस करते हैं।
सिंह ने कहा, ‘ई-कार कोई दोपहिया वाहन नहीं है जिसे कहीं भी चार्ज किया जा सकता है। इसके लिए उचित बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है।’ उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों के दौरान भारतीय ग्राहक विकसित हुए हैं और रेंज, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे कारकों के अलावा ड्राइविंग संबंधी प्रदर्शन भी उनके लिए एक मानदंड बन गया है।
इस वैश्विक वाहन सर्वेक्षण का आयोजन सितंबर 2020 से अक्टूबर 2020 के दौरान किया गया था। इसमें प्रतिभागियों से सवाल पूछा गया था कि आप अपने अगले वाहन में किस प्रकार के इंजन को पसंद करेंगे? सर्वेक्षण में अमेरिका, भारत, जर्मनी, चीन, जापान और उत्तर कोरिया जैसे देशों को शामिल किया गया।
सर्वेक्षण से पता चला कि पेट्रोल/डीजल इंजन वाले वाहनों के मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहनों को पसंद करने वाले लोगों की तादाद काफी कम थी। इससे स्पष्ट है कि तमाम चिंताओं के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का रुझान काफी सीमित है। लोगों ने जिन मुद्दों को लेकर चिंता जताई उनमें रेंज, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभाव, लागत मूल्य, सुरक्षा आदि शामिल हैं।
इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष से लोगों के खरीद संबंधी व्यवहार और उनकी पसंद पर वैश्विक महामारी के प्रभाव का भी पता चलता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मांग में नरमी के जोखिम के मद्देनजर भारत और चीन में ग्राहक अगली वाहन खरीद के लिए अपनी पसंद पर नए सिरे से विचार कर रहे हैं।

First Published - January 19, 2021 | 11:28 PM IST

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