facebookmetapixel
Advertisement
झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर नहीं बनी बात, 15वें दिन भी जारी छात्रों का आंदोलनडीपफेक और AI कंटेंट पर Meta की बढ़ी मुश्किलें, सरकार ने ‘इंटरमीडियरी’ स्टेटस पर उठाए सवालRetirement Planning: पहली सैलरी आए तभी से शुरू कर दें बुढ़ापे की तैयारी, बाद में भारी पड़ सकती है अनदेखीDividend Stocks: शेयर बाजार में 10 से 14 अगस्त तक डिविडेंड की बारिश, 90 से अधिक कंपनियां बाटेंगी मुनाफाE20 विवाद के बीच सरकारी तेल कंपनियों का दावा: ईंधन पूरी तरह सुरक्षित, ना घट रही माइलेज ना हो रहा नुकसानरूसी तेल खरीदने पर 100% टैरिफ, अमेरिकी सीनेट में पास हुआ विधेयक; भारत-चीन को खतराविधानसभा उपचुनावों में 17 सालों से सत्ता पक्ष का रहा है दबदबा, 53% सीटों पर हासिल की जीतबिहार में शराबबंदी से नहीं थमा महिलाओं के खिलाफ अपराध, पर राज्य में बढ़ा अवैध शराब का कारोबारभारतीय मीडिया उद्योग में तीन गुना बढ़ने की क्षमता, नियमों के शिकंजे से मिले आजादी: सुभाष चंद्राफाइनेंशियल सेक्टर में AI को अपनाने के साथ सुरक्षा भी बढ़ानी होगी, नुकसान का न करें इंतजार: CEA नागेश्वरन

यूपी : धान खरीद तय लक्ष्य से अधिक, भंडारण की दिक्‍कत

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 9:47 AM IST

किसान आंदोलन, न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देने को लेकर छिड़ी रार के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस साल धान की सरकारी खरीद का नया रिकॉर्ड बना रही है। धान की सरकारी खरीद तय लक्ष्य से कहीं ज्यादा हो जाने के चलते अब इसके भंडारण का संकट भी खड़ा होने लगा है। सरकारी खरीद की समय सीमा समाप्त होने से काफी पहले ही लक्ष्य से कहीं ज्यादा खरीद हो चुकी है।
इस बीच धान की सरकारी खरीद को लेकर किसान आरोप भी लगा रहे हैं कि उनकी उपज की खरीद नहीं हो रही है। प्रदेश के कई इलाकों में किसानों के बवाल की खबरें भी आ रही हैं। प्रदेश सरकार ने धान के सरकारी खरीद केंद्रों का जायजा लेने के लिए अपने मंत्रियों की ड्यूटी लगाई है। इससे पहले बीते महीने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को भी मौके का जायजा लेने भेजा गया था।
खाद्य एवं रसद विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सरकार भंडारण क्षमता से ज्यादा धान की खरीद कर चुकी है, जबकि अभी फरवरी यानी एक महीने से ज्यादा समय तक खरीद और होनी है।
खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक प्रदेश में 11 लाख किसानों से 10,274 करोड़ रुपये में 57 लाख टन से ज्यादा धान की खरीद हो चुकी है, जबकि उत्तर प्रदेश में इस सीजन में 55 लाख टन धान खरीद का ही लक्ष्य रखा गया था। अधिकारियों का मानना है कि सीजन के अंत तक लगभग 70 लाख टन खरीद हो सकती है। पिछले वर्ष इस समय तक लगभग 45 लाख टन खरीद हुई थी।
उम्मीद से कहीं ज्यादा खरीद हो जाने के बाद अब सरकार के सामने भंडारण का संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश में कुल भंडारण क्षमता 50 लाख टन है जिसमें से इस सीजन में धान या चावल रखने के लिए 40 लाख टन की जगह उपलब्ध रहती है। भंडारण के संकट को देखते हुए प्रदेश सरकार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से पहले से जमा चावल दूसरे राज्यों में ले जाने के लिए कहने और सरकारी राशन की दुकानों से एक ही महीने में दो महीनों का चावल बांटने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है। खाद्य आयुक्त के मुताबिक प्रदेश में हर महीने राशन कार्ड के लाभार्थियों को 8 लाख  टन चावल का वितरण होता है।
अधिकारियों का कहना है कि इस बार धान के एमएसपी और बाजार दर में खासा अंतर है जिसके चलते ज्यादा से ज्यादा किसान अपनी उपज सरकारी खरीद केंद्रों पर ही ला रहे हैं।
इसके साथ ही किसानों के आंदोलन के कारण भी सरकार तेजी से खरीद कर रही है। लक्ष्य के पूरा हो जाने के बाद भी सरकारी खरीद जारी रखने के निर्देश योगी सरकार की ओर से पहले ही दिए जा चुके हैं। खाद्य अधिकारियों का कहना है कि भंडारण के संकट से न निपटा गया तो अप्रैल में गेंहूं की सरकारी खरीद शुरु होने पर दिक्कतें और बढ़ जाएंगी।

Advertisement
First Published - January 14, 2021 | 12:34 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement