facebookmetapixel
Advertisement
ग्रेड-ए मॉल स्पेस की किल्लत, सप्लाई से 4.5 गुना ज्यादा लीजिंग; क्या डेवलपर्स के लिए है मौका?Propshop Events & Exhibitions IPO: आज से खुला ₹29 करोड़ का SME IPO, जानें प्राइस बैंड, GMP और आवेदन से जुड़ी सभी जरूरी बातेंशांतिपूर्ण प्रदर्शन संरक्षित अधिकार, लेकिन आंदोलन के नाम पर पुलिस लाठीचार्ज सही नहीं: SCईरान-अमेरिका तनाव कम होने का असर! BPCL, HPCL और IOC के शेयरों में आई तेजी35% तक रिटर्न के लिए इन 7 स्टॉक्स पर BUY रेटिंग, ब्रोकरेज की सलाह- लॉन्ग टर्म रखें नजरियाEV बढ़ेंगे तो किन Power Stocks की चमकेगी किस्मत? NTPC और CG Power पर ब्रोकरेज की रायकेनरा बैंक का Q1 मुनाफा ₹4,856 करोड़, NPA में आया सुधार; शेयर में 3% की जोरदार तेजीForeign Assets वाले सावधान! ITR में गलत एक्सचेंज रेट डालने पर फंस सकते हैं, टैक्स एक्सपर्ट ने दी चेतावनीITR Deadline 2026: क्या 31 जुलाई के बाद बढ़ेगी आखिरी तारीख? सरकार ने दे दिए संकेतअब सिर्फ चाय नहीं बेच रही Tata Consumer! ये 4 कारोबार बन रहे कमाई का नया इंजन

बांध पर एनजीओ के बीच खींचतान बढ़ी

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 11:02 AM IST

उत्तराखंड में पर्यावरण कार्यकर्ता जी डी अग्रवाल के बाद अब स्वयं सेवी संगठनों (एनजीओ) ने जल विद्युत परियोजना के पक्ष और विपक्ष में कानूनी लड़ाई के लिए कमर कस ली है।


इंडियन काउंसिल ऑफ एनवायरो-लीगल एक्शन ने नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय उत्तरकाशी और गंगोत्री के बीच बन रहे बांध का निर्माण रोकने के लिए एक याचिका दायर की है। अग्रवाल भी इस बांध नहीं बनाने की मांग कर रहे हैं।

काउंसिल ने अदालत से भागीरथी के नैसर्गिक प्रवाह को बहाल करने और क्षेत्र को राष्ट्रीय विरासत का दर्जा देने की इच्छा भी जताई है। याचिका में कहा गया है कि इन बांधों के निर्माण से क्षेत्र की बहुमूल्य जैव विविधिता खत्म हो जाएगी। इसके विपरीत देहरादून स्थित एनजीओ आरएलईके ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अदालत से पाला मनेरी और भैरो घाटी परियोजना का काम फिर से शुरू करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया है। पाला मनेरी परियोजना की क्षमता 480 मेगावाट है जबकि भैरो घाटी की उत्पादन क्षमता 400 मेगावाट है।

आरएलईके ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने विभिन्न धार्मिक समूहों के दबाव में आकर इन परियोजनाओं को रोकने का फैसला किया है। ऐसा करके राज्य सरकार ने अपनी ही जल विद्युत उत्पादन नीति का उल्लंघन किया है। आरएलईके ने यह भी कहा है कि राज्य में बिजली की कमी का उद्योगों के विकास पर विपरीत असर पड़ेगा। इससे लोगों को रोजगार के अवसरों से वंचित होना पड़ेगा।

पिछले महीने सरकार ने भागीरथी पर बन रही जल विद्युत परियोजनाओं पर तगड़े विरोध प्रदर्शन के बाद इन दोनों बांधों के निर्माण काम को रोकने का फैसला किया था। अग्रवाल के अभियान को संघ परिवार के संगठनों का पूरा समर्थन मिला था। पाला मनेरी और भैरो घाटी परियोजना राज्य सरकार के स्वामित्व वाली उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड को सौंपी गई थीं। दोनों परियोजनाओं के लिए 5200 करोड़ रुपये का निवेश किया जाना था। राज्य की प्रमुख जल विद्युत परियोजनाओं में पाला मनेरी, भैरो घाटी, लोहारी नागपाला और जद गंगा शामिल हैं।

Advertisement
First Published - July 14, 2008 | 10:34 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement