facebookmetapixel
Advertisement
ज्यादा खर्च हो गया? घबराने की जरूरत नहीं, इन आसान तरीकों से फिर पटरी पर लाएं अपनी आर्थिक स्थितिदेश में डॉलर की बंपर आवक! RBI की स्वैप स्कीम से आए $7.28 करोड़, जानें बैंकों पर क्या होगा असरनौकरी छोड़ने के बाद भी EPF खाते पर मिलेगा ब्याज? समझें उम्र व रिटायरमेंट से जुड़ा EPFO का पूरा नियमबिना कमाई वाले छात्रों को भी मिलेगा ₹25 लाख का लाइफ कवर, स्टूडेंट्स के लिए लॉन्च हुआ खास टर्म प्लानशेयरधारकों की बल्ले-बल्ले! 1 शेयर पर 1 फ्री बोनस शेयर दे रही यह कंपनी; 24 अगस्त तय हुई रिकॉर्ड डेटअगले हफ्ते 50 से अधिक कंपनियां निवेशकों को बांटेंगी मुनाफा, एक शेयर पर ₹60 तक कमाने का मौकामानसून में बाढ़ और भूस्खलन से मकान को हुआ नुकसान? समझें होम इंश्योरेंस कैसे बचाएगा आपका पैसाक्या UPI पर नहीं लगेगा कोई भी एक्स्ट्रा चार्ज? 2017 के कड़े नियम को ढाल बनाने की तैयारी में जुटा RBIदिल्ली में बदला मौसम, बारिश ने दी गर्मी से राहत; कई राज्यों में भारी बौछार का अलर्टविकसित भारत के लिए युवाओं को कौशल और डिजिटल ट्रेनिंग देने पर जोर

चौतरफा मंदी ने हौसले किए पस्त तो लोहा पड़ा ठंडा

Advertisement
Last Updated- December 08, 2022 | 4:40 AM IST

मंडी में लोहा ठंडा हो चला है। रियल एस्टेट की भट्ठी पर पानी पड़ने के कारण पहले से ही त्रस्त सरिया कारोबारी अब कीमत कम होने का दंश झेल रहे हैं।


जिन कारोबारियों ने तेजी के दौरान सरिया का स्टॉक कर लिया था उनकी तो कमर ही टूट चुकी है। उन्हें न तो उसे बेचते बन रहा है और न ही रखते। फिलहाल सरिया की कीमत में किसी प्रकार की तेजी की भी संभावना नजर नहीं आ रही है। लोहे के व्यापारियों के कारोबार में 60 फीसदी तक की गिरावट हो चुकी है।

सरिया कारोबारियों के मुताबिक गत जुलाई माह के दौरान निर्माण क्षेत्र की लागत में बढ़ोतरी के कारण लोहे कारोबारियों का काम आधा हो चला था। तब अधिकतर ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए थे।

एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली में हर महीने 2.5-3 लाख टन लोहे की खपत होती है। अगस्त महीने तक इसकी खपत आधी हो चुकी थी और अब इसकी खपत मात्र 30 फीसदी तक रह गयी है।

लोहा व्यापार एसोसिएशन के पदाधिकारी सतीश गर्ग कहते हैं, ‘लोहे का इस्तेमाल मुख्य रूप से निर्माण क्षेत्र में है। शटरिंग प्लेट से लेकर पिलिंथ की पाइप तक, सब कुछ लोहे का होता है।’ जुलाई के दौरान लोहा 45 रुपये प्रति किलोग्राम था और कारोबारियों को उम्मीद थी कि दाम कम होने पर इसकी मांग निकलेगी।

अब सरिया की कीमत 32-35 रुपये प्रति किलोग्राम हो गयी है लेकिन मंदी के कारण दूर-दूर तक मांग नजर नहीं आ रही है। नारायणा इंडस्ट्रीयल एरिया एसोसिएशन के पदाधिकारी एसके नरुला कहते हैं, ‘मांग में कमी के साथ कारोबारी भी इन दिनों बेचना नहीं चाह रहा है। क्योंकि उन्होंने बढ़ी हुई कीमत पर खरीदारी कर स्टॉक किया था।’

नारायणा लोहा मंडी में कारोबार करने वाले पीयूष कोचर कहते हैं, ‘मुख्य समस्या नगदी की है। ठेकेदार या बिल्डर जिन्होंने तीन महीने पहले माल लिया था अब तक भुगतान नहीं कर रहे हैं। हालांकि वे उधार के तौर पर अब भी माल लेने को तैयार है।’ उनके मुताबिक घाटे से उबरने के लिए कोई भी कारोबारी उधार देने को तैयार नहीं है।

दाम में लगातार हो रही गिरावट के कारण लोहे से जुड़े उत्पाद के निर्माताओं की हालत और भी खराब हो चुकी है। उनका उत्पादन 60-70 फीसदी तक कम हो चला है। उद्यमी जेपी बिंदल ने बताया कि गत जुलाई माह में जिस इंगट की कीमत 1250 डॉलर प्रति टन थी वह 350 डॉलर प्रति टन के स्तर पर आ गयी है।

1300 डॉलर प्रति टन वाले एचआर कायॉल के दाम 450 डॉलर प्रति टन के आसपास हो गए हैं। उनका कहना है कि दाम में और गिरावट की आशंका के कारण वे कोई भी नया ऑर्डर नहीं ले रहे हैं।

कारोबारियों ने बताया कि लोहे से बनने वाली अलमारी एवं अन्य फुटकर चीज बेचने वाले दुकानदार भी घाटे में आ चुके हैं। अधिक कीमत में खरीदी गयी चीजें उन्हें कम कीमत में बेचनी पड़ रही है।

Advertisement
First Published - November 20, 2008 | 9:03 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement