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रसूखदारों के लिए कानून ताक पर, लॉटरी की परवाह नहीं

Last Updated- December 09, 2022 | 8:51 PM IST

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सबसे महंगे आवासीय इलाके गोमतीनगर में 2006-07 में इसी तरह 26 आवासीय भूखंडों का सीधे-सीधे आवंटन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने अपनी इच्छानुसार कर दिया।


इस घोटाले ने राजनेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच के गडजोड़ को खोल कर रख दिया। लाभ पानेवालों में तत्कालीन सरकार केमुखिया के परिवार केलोग, सत्ता पक्ष के पदाधिकारी और सरकार के करीबी अधिकारी व उनके परिवार-जन शामिल थे।

आवंटन की धांधली इस कदर की गई कि कई लाभ पाने वाले आवंटियो ने आधे-अधूरे आवेदन पत्र भरे और बहुतों के तो पते ही गलत निकले।

दि ल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए)में हुए लॉटरी घोटाले से घायलों के लिए यह नमक छिड़कने जैसा ही होगा। उत्तर प्रदेश में किसी भी भूखंड या भवन या आवंटन लॉटरी के तहत पारदर्शिता हो, इसे मानने वाले चंद लोग भी नहीं निकलेंगे। यहां तो विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों को सीधे आवंटन का अधिकार हासिल है।

लॉटरी के जरिए किसी को भूखंड या मकान मिले ये बड़े किस्मत की बात है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सबसे महंगे आवासीय इलाके गोमतीनगर में 2006-07 में इसी तरह 26 आवासीय भूखंडों का सीधे-सीधे आवंटन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने अपनी इच्छानुसार कर दिया।

लाभ पानेवालों में तत्कालीन सरकार केमुखिया के परिवार के लोग, सत्ता पक्ष के पदाधिकारी और सरकार के करीबी अधिकारी व उनके परिवार-जन शामिल थे।

आवंटन की धांधली इस कदर की गई कि कई लाभ पाने वाले आवंटियो ने आधे-अधूरे आवेदन पत्र भरे और बहुतों के तो पते ही गलत निकले।

फायदा लेनेवालों में एक रसूखदार तो सत्ता पक्ष के राष्ट्रीय पदाधिकारी थे और उन्होंने पहले गरीबों को दिए जानेवाले मकान का आवेदन किया और उसे पाते ही  महंगे आवासीय भूखंड में तब्दील करा दिया।

गोमतीनगर के दूर की विस्तार योजना के लिए आवंटन पानेवाली मुख्यमंत्री के करीबी अधिकारी ने मौके का फायदा उठाया और खुद को राजधानी के ताज होटल के करीब विपुल खंड में स्थानांतरित करवा दिया।

विपुल खंड में भूखंड आवंटन का फायदा उठाने वाले एक राजनेता ने तो अपने लिए एक आलीशान बंगला बनाया और उसे हिन्दी फिल्मी जगत की एक बडी हीरोइन के नाम पर नामकरण कर दिया। फायदा उठानेवालों में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के करीबी कई अधिकारी व राजनेता शामिल रहे।

घोटाले को लेकर जनहित याचिका भी दायर की गई और उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश भी हुई। आज मायावती सरकार में अतिरिक्त कैबिनेट सचिव विजय शंकर पाण्डेय ने सारे प्रकरण की जांच की। पाण्डेय ने पाया कि सारा मामला फर्जी है जहां पर गलत तरकों से अपने को लाभ पहुंचान के लिए करोड़ों के भूखंड कौड़ियों के भाव आवंटित कर दिए गए।

इसी रिपोर्ट में है कि दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे चलाए जाएं।

 जमीन घोटाले दिखाते हैं राजनैतिक गठजोड़

घोटालों के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वाले समाजसेवी विश्वनाथ चतुर्वेदी से बात की सिद्धार्थ  कलहंस ने :

लखनऊ का सबसे चर्चित और विवादित भूमि घोटाला है जहां अधिकारी और राजनेता का गठजोड़ खुलकर सामने आया है। मुलायम सिंह यादव की सरकार में उनकी पार्टी के पदाधिकारी और उससे भी आगे बढ़कर अधिकारी इस घोटाले का लाभ उठाने में सबसे आगे रहे हैं।

 मुख्यमंत्री के खुद के सचिवालय के प्रमुख सचिव और एक सचिव ने सीधे आवंटन के जरिए भूखंड पाने का लाभ उठाया वह भी सरकारी दामों पर।

सारे घोटाले पर मोहर लगाने वाले लखनऊ विकास प्राधिकरण के तत्कालीन उपाध्यक्ष बी बी सिंह ने भी बहती गंगा में हाथ धोने में कोई कसर नहीं छोड़ी और अपने रिश्तेदारों के नाम दो भूखंड आवंटित कर दिए।

सारे मामले की जांच विजय शंकर पाण्डेय को सौंपी गई, पर वह भी मामले की तह तक न जा सके। हालांकि उन्होंने भी अपनी जांच केबाद यह पाया कि सारा मामला फर्जी है और न केवल घोटाला करने वाले बल्कि भूखंड आवंटन का लाभ पाने वालों पर भी मुकदमा चलाना चाहिए।

First Published - January 8, 2009 | 9:34 PM IST

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