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साकार नहीं हो सके घर-घर बिजली पहुंचाने के सरकारी सपने

Last Updated- December 05, 2022 | 10:44 PM IST

सरकार ने आज माना कि 10वीं योजनावधि के दौरान बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और जम्मू कश्मीर सहित देश के सात राज्यों और पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में गांवों की विद्युतीकरण प्रक्रिया धीमी रही।


केन्द्रीय बिजली राज्य मंत्री जयराम रमेश ने राज्यसभा को बताया कि 10वीं योजनावधि के तहत गैर विद्युतीकृत गांवों के विद्युतीकरण की प्रगति मुख्यत: बिहार, झारखंड, उड़ीसा, राजस्थान, उत्तराखंड ,पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्यों तथा जम्मू कश्मीर में धीमी है।’


उन्होंने हरीश रावत के सवाल के लिखित जवाब में कहा कि पहाड़ी क्षेत्र सहित क्षेत्र की खराब स्थिति छिटपुट व्यवस्था में समस्या आदि के कारण उत्तराखंड में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत विद्युतीकरण का कार्य धीमा नहीं हुआ है। आंकड़े इसे स्पष्ट दर्शाते हैं।


रमेश ने बताया कि उत्तराखंड में 31 मार्च की स्थिति के अनुसार 13 जिलों की स्वीकृत परियोजनाओं में शामिल 1,469 गैर विद्युतीकृत गांवों में से 1,226 का विद्युतीकरण कर लिया गया। यह जानकारी कार्यान्वयन एजेंसी यूपीसीएल ने दी। उन्होंने बताया कि इसके अलावा 5230 गांवों का सघन विद्युतीकरण किया जा रहा है। शेष 243 गांवों में विद्युतीकरण जारी है और इसे 2009 तक पूरा किए जाने की उम्मीद है।


महाराष्ट्र ने दी चंद्रपुर परियोजना के मंजूरी


महाराष्ट्र सरकार ने चंद्रपुर ताप बिजली परियोजना को मंजूरी दे दी है। बिजली राज्य मंत्री जयराम रमेश ने आज राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने सुप्रिया सुले के सवाल के लिखित जवाब में कहा, ‘महाराष्ट्र सरकार से मिली सूचना के मुताबिक इस परियोजना से शुरूआत में 55 चीनी कारखाने लाभान्वित होंगे।’


उन्होंने बताया कि चीनी कारखानों से इक्विटी परियोजना लागत का दस प्रतिशत होगी जिसका 50 प्रतिशत उपकर से और शेष 50 प्रतिशत चीनी कारखानों से अंशदान के जरिए प्राप्त होगा। रमेश ने बताया कि चीनी विकास फंड से आसान रिण 30 प्रतिशत है और शेष 60 प्रतिशत वित्तीय संस्थानों से जुटाया जाएगा।


उन्होंने बताया कि परियोजना के तीन साल के भीतर पूरी होने की संभावना है। इससे चीनी कारखानों को बिजली की बिक्री से अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। मंत्री ने बताया कि चीनी कारखानों को स्वच्छ विकास तंत्र का लाभ प्राप्त होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में लोड शेडिंग कम की जा सकेगी और गांवों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही किसानों को गन्ने का अतिरिक्त मूल्य प्राप्त होगा।

First Published - April 21, 2008 | 9:50 PM IST

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