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खेल उत्पाद में भी ‘खेल’

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Last Updated- December 09, 2022 | 3:57 PM IST

भारतीय क्रि केट टीम ने वर्ष 2008 में लगभग हर बार बाजी मारी। लेकिन अगर हम उस शहर की बात करें जो इन्हें खेल का सामान मुहैया कराता है,


तो उनके लिए साल अच्छा नहीं रहा। घरेलू से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक खेल के सामान की बिक्री बेहद निराशाजनक रही। 2008 के वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही पंजाब के उद्योगों को झटका लगा।

बीट ऑल स्पोट्र्स के रमेश कोहली का कहना है, ‘हमारे निर्यात ऑर्डर में 30-40 फीसदी की कमी आई है जबकि घरेलू बाजार में भी 50 फीसदी की कमी आई है। अब यह उद्योग राज्य सरकार से राहत पैकेज मिलने की उम्मीद कर रही है।’

कोहली का कहना है कि पिछले तीन महीने से उन्हें मंदी जैसी स्थिति की आशंका हो रही है। निर्यात के ऑर्डर में भी 30 प्रतिशत की कमी आई है।

कोहली का कहना है कि निर्यातकों के भुगतान में लगभग 25 फीसदी का घाटा हुआ है। इसकी वजह यह है डॉलर और रुपये की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

सावी इंटरनेशनल के मालिक अशोक वर्मा का कहना है, ‘वर्ष 2007 पूरे स्पोट्र्स इंडस्ट्री के लिए ही अच्छा साल था क्योंकि बहुत ऑर्डर मिल रहे थे। लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल चुके हैं। अब तो पहले से मिले हुए ऑर्डर में भी सीधे तौर 45 प्रतिशत की कमी आ गई है।’

उन्हें यह आशंका है कि यह श्रम आधारित उद्योग है। अगर इसमें मंदी आती है तो कई लोग बेरोजगार हो सकते हैं। इस उद्योग से जुड़े कई मालिकों को पैसे की काफी कमी महसूस हो रही है। दूसरी ओर लोन की दरें भी उनकी पहुंच से बाहर हो रही है।

वर्मा का दावा है कि अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो अगले कुछ महीनों में ही पंजाब में 15,000 से ज्यादा कामगारों के पास कोई काम नहीं होगा। बिहार और यूपी से आए हुए मजदूर भी बेरोजगार हो जाएंगे।

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First Published - December 30, 2008 | 8:45 PM IST

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