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छात्रों को भी डरा रहा है वित्तीय संकट

Last Updated- December 07, 2022 | 10:48 PM IST

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लीमन ब्रदर्स जैसे वित्तीय संस्थानों के चरमराने के बाद आईटी, मार्केटिंग जैसे पाठयक्रमों में प्रवेश पाने के इच्छुक छात्र-छात्राओं की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी होने की संभावना है।


प्रोफेशनल पाठयक्रमों के क्षेत्र में वित्त से संबधित कोर्स हमेशा से ही छात्रों को सबसे ज्यादा आकर्षित करते रहे हैं। वित्तीय पाठयक्रमों के विशेषज्ञों का अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के वित्त संस्थानों के ढहने के बाद छात्र  आईटी और विपणन नीतियों से संबधित कोर्सों को ज्यादा तरजीह देना शुरू कर देंगे।

आने वाले सत्र में में वित्त से संबधित कोर्सों में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या में 7 फीसदी की कमी आने की संभावना है। वर्तमान में वित्तीय पाठयक्रमों में छात्रों की उपस्थिति कुल पाठयक्रमों की लगभग 30 फीसदी है। लखनऊ स्थित भारतीय प्रंबधन संस्थान के एक वरिष्ठ प्रोफेसर का कहना है कि अब छात्रों के लिए मार्केटिंग एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।

आईटी क्षेत्र से संबधित पाठयक्रमों के विशेषज्ञों का कहना है कि ‘आईटी क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट का असर पड़ रहा है।इस कारण छात्र आईटी क्षेत्र भी छात्रों के मन में संशय पैदा कर सकता है। पिछले वर्ष लीमन ब्रदर्स में संस्थान के तीन छात्रों का प्लेसमेंट हुआ था।

लेकिन उन तीनों को ही बैंक के कंगाल होने पर नौकरी गंवानी पड़ी है। लेकिन संस्थान के छात्रों की मांग संस्थान में पढ़ने वाले कुल उपस्थित छात्रों की संख्या से बहुत ज्यादा है। ‘ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे वित्तीय संकट को देखते हुए सामाजिक क्षेत्र से जुडे पाठयक्रम भी छात्रों को अपनी तरफ खींच सकते है।

First Published - October 6, 2008 | 10:34 PM IST

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