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महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग

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Last Updated- December 12, 2022 | 1:35 AM IST

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की ‘थप्पड़’ वाली कथित टिप्पणी की गूंज फिलहाल शांत होने वाली नहीं है। राणे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और भाजपा दफ्तरों में हमला करने वाले युवा सेना के सदस्यों की मुलाकात के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग उठने लगी, तो शिवसेना दावा कर रही है कि राणे ने केंद्र सरकार का सिर शर्म से झुका दिया है। हालांकि भाजपा इस बदले की कार्रवाई से न डरने की बात करते हुए कह रही है कि राणे कुछ दिनों में ही महाराष्ट्र में एक बार फिर अपनी ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ शुरू करेंगे। 
राणे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले युवा सेना के सदस्यों की मुख्यमंत्री से मुलाकात करने को आधार बनाते हुए भाजपा विधायक नितेश राणे ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। नितेश राणे ने युवा सेना के नेता वरुण सरदेसाई द्वारा साझा की गई एक तस्वीर को ट्वीट करते हुए कहा कि शिवसेना की युवा शाखा (युवा सेना) की कोर कमेटी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। कंकावली के विधायक ने ट्वीट करके कहा कि तो यह वास्तव में पश्चिम बंगाल की तरह ही सरकार द्वारा प्रायोजित हिंसा थी। राज्य के मुखिया के रूप में मुख्यमंत्री को सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए लेकिन वह वास्तव में गुंडों का अभिनंदन कर रहे हैं। इन ठगों से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति शासन ही एकमात्र रास्ता है।

नारायण राणे के आवास के बाहर प्रदर्शन करने वाले युवा सेना के सदस्यों की ठाकरे से मुलाकात की पुष्टि करते हुए शिवसेना युवा शाखा के नेता एवं प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले वरुण सरदेसाई ने बताया कि यह मुलाकात ठाकरे के आधिकारिक आवास वर्षा में मंगलवार रात को हुई। राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य एवं मुख्यमंत्री के बेटे आदित्य ठाकरे भी बैठक में शामिल हुए। आदित्य युवा सेना के प्रमुख भी हैं। सरदेसाई ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि क्या पार्टी नारायण राणे द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा का समर्थन करती है।
नाशिक में दर्ज प्राथमिकी पर राणे के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि वह मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ टिप्पणी को लेकर नाशिक में दर्ज प्राथमिकी के सिलसिले में नारायण राणे के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी। न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति एन जे जामदार का खंडपीठ राणे की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें नाशिक में दर्ज प्राथमिकी और भविष्य में दर्ज किए जा सकने वाले अन्य सभी मामलों को निरस्त करने का आग्रह किया गया है। राणे ने मंगलवार को दायर अपनी याचिका में गिरफ्तारी से संरक्षण दिए जाने का भी आग्रह किया है। राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने कहा कि नासिक में दर्ज प्राथमिकी के सिलसिले में याचिका पर सुनवाई की तारीख 17 सितंबर तक राणे के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। नारायण राणे कुछ दिनों में ही महाराष्ट्र में एक बार फिर अपनी ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ शुरू करेंगे। उनके सहयोगी राजन तेली ने एक बयान में बताया कि राणे की यात्रा तय मार्ग से ही निकलेगी और यात्रा बहाल होने की तारीख की जानकारी जल्द दी जाएगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल में हाल ही में शामिल किए गए भाजपा नेता राणे ने 19 अगस्त को मुंबई से यात्रा शुरू की थी। सात दिवसीय यात्रा को सिंधुदुर्ग में संपन्न होना था।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में राणे पर निशाना साधते हुए मंत्री की तुलना कई छेद वाले एक गुब्बारे से की और कहा कि भाजपा उसमें कितनी भी हवा भरने की कोशिश करे लेकिन वह ऊपर नहीं उठेगा। शिवसेना ने सामना के संपादकीय में कहा कि एक केंद्रीय मंत्री का पद दिए जाने के बावजूद राणे ने केंद्र सरकार का सिर शर्म से झुका दिया है। राणे के पुराने रिकॉर्ड देखते हुए मोदी और शाह को ठाकरे के खिलाफ की गई उनकी टिप्पणी को गंभीरता से लेना चाहिए। 
संपादकीय में कहा गया कि मुख्यमंत्री पर हमला करने की धमकी देने वाले हाथों को कानून के जरिये काबू करना चाहिए। महाराष्ट्र में पिछली देवेंद्र फडणवीस सरकार ने कुछ बुद्धिजीवियों को इस आरोप में जेल में बंद कर दिया था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रची थी। सामना में कहा गया कि मुख्यमंत्री को शारीरिक हमले की धमकी देना संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के 105 शहीदों की भावनाओं को आहत करने जैसा है। राणे ने महाराष्ट्र को आहत किया है और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस और चंद्रकांत पाटिल उनका समर्थन कर रहे हैं। कोई भी सुसंस्कृत नेता माफी मांगता और मामले को खत्म कर देता क्योंकि राज्य से ऊपर कोई नहीं है। लेकिन भाजपा के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का गौरव और प्रतिष्ठा कोई मायने नहीं रखते।

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First Published - August 26, 2021 | 1:54 AM IST

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