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गुना के धनिया किसानों को है आईटीसी का इंतजार

Last Updated- December 05, 2022 | 4:29 PM IST

अपनी फसल की बेहतर कीमत पाने के लिए मध्य प्रदेश स्थित गुना जिले में देश के पहले धनिया निर्यात क्षेत्र के किसानों की उम्मीदें आईटीसी की अंतरराष्ट्रीय बिजनेस डिवीजन पर टिकी हैं।


दरअसल आईटीसी ने पिछले साल सुनहरा कल परियोजना के तहत गुना क्षेत्र से धनिया खरीदने का फैसला किया था। कंपनी ने इस बारे में एक पत्र भी जारी किया है। गुना में भारत की सबसे बेहतरीन धनिया ‘कुंभराज’ की खेती की जाती है। इसकी कीमत 2200 रुपये से 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक होती है।



नेशकला कार्प प्रोडयूसर्स कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने आईटीसी को 200 टन धनिया बेचने की पेशकश की है। इस कंपनी की स्थापना 2006 में विश्व बैंक की सहायता से की गई थी। गुना में पिछले साल 44,000 टन धनिया पैदा हुई थी।


गुना जिले के कुंभराज, बीनागंज, बामोरी और आसपास के इलाकों को धनिया उत्पादक गलियारे के रूप में जाना जाता है। गुना जिले में बड़ी संख्या में निर्यातकों के एजेंट हैं और मुंबई के लिए धनिया की आपूर्ति करते हैं। वहां से विभिन्न देशों को धनिया का निर्यात कर दिया जाता है। हालांकि, किसानों को फसल की वाजिब कीमत अभी भी नहीं मिल पा रही है।



मध्य प्रदेश जिला गरीबी पहल परियोजना के प्रमुख रविन्द्र पास्टर ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि ‘हम आईटीसी से बातचीत कर रहे हैं ताकि गरीब किसानों को खेतों में ही बड़े खरीददार मिल सकें। हमारी कोशिश है कि किसानों को स्थानीय मंडी के मुकाबले बेहतर कीमत मिल सके।


खेतों में ही फसल बिक जाने से भालभाड़ा भी बच सकेगा।’ सरकारी सूत्रों ने बताया है कि ‘किसान लंबे अर्से से इंतजार कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि वे (आईटीसी) खरीदी के लिए आएंगे। फसल तैयार है।’
आईटीसी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार डिवीजन के मुख्य कार्यकारी एस शिवकुमार ने फोन पर बीएस को बताया कि ‘यह संभव है।


हम गुना से जिंस की खरीदी कर सकते हैं।’ लेकिन, उन्होंने इस बारे में अधिक ब्यौरा नहीं दिया। गुना को कुछ वर्षो पहले कृषि निर्यात क्षेत्र घोषित कर दिया गया है लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार की तरफ से धनिया किसानों के लिए कुछ नहीं किया गया है।


कृषि निर्यात क्षेत्र के फायदे सिर्फ निर्यातकों तक ही सीमित हैं। इस समय नेशकला मध्य प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के ब्रांड ‘विंघ्य वैली’ को कुंभराज धनिया की आपूर्ति करती है।

First Published - March 9, 2008 | 8:39 PM IST

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