facebookmetapixel
Advertisement
ईरान-अमेरिका तनाव कम होने का असर! BPCL, HPCL और IOC के शेयरों में आई तेजी35% तक रिटर्न के लिए इन 7 स्टॉक्स पर BUY रेटिंग, ब्रोकरेज की सलाह- लॉन्ग टर्म रखें नजरियाEV बढ़ेंगे तो किन Power Stocks की चमकेगी किस्मत? NTPC और CG Power पर ब्रोकरेज की रायकेनरा बैंक का Q1 मुनाफा ₹4,856 करोड़, NPA में आया सुधार; शेयर में 3% की जोरदार तेजीForeign Assets वाले सावधान! ITR में गलत एक्सचेंज रेट डालने पर फंस सकते हैं, टैक्स एक्सपर्ट ने दी चेतावनीITR Deadline 2026: क्या 31 जुलाई के बाद बढ़ेगी आखिरी तारीख? सरकार ने दे दिए संकेतअब सिर्फ चाय नहीं बेच रही Tata Consumer! ये 4 कारोबार बन रहे कमाई का नया इंजनक्या बिना PAN के अटक रहा है ITR? मिनटों में बनाएं और डाउनलोड करें डिजिटल e-PANनंदन नीलेकणी से एस. सोमनाथ तक… जानिए परीक्षा सुधार पैनल के 6 विशेषज्ञों की पूरी प्रोफाइलJuniper Green Energy IPO: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी ला रही ₹1,800 करोड़ का इश्यू, प्राइस बैंड हुआ तय; जानें कब खुलेगा

टूटे फैशन डिजाइनिंग के सपने

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 11:05 AM IST

तेजी से बदलते दौर में कैरियर के कई नए विकल्प सामने आए हैं। इन विकल्पों में शामिल फैशन डिजाइनिंग और टेक्नालॉजी के कोर्स की चमक धुंधली नजर आ रही है, हालांकि कुछ दिनों पहले तक इस पाठयक्रम को युवाओं और खासकर लड़कियों का सबसे पसंदीदा माना जाता था।


लखनऊ में युवाओं को एविएशन, बीपीओ, होटल मैनेजमेंट और एनीमेशन जैसे पाठयक्रम आकर्षित कर रहे हैं। लखनऊ स्थित कैरियर काउंसलिंग फर्म में काम करने वाली मोनिका ने बताया कि ‘नए क्षेत्र आकर्षक वेतन पैकेज की पेशकश कर रहे हैं और यहां रोजगार सुरक्षा की संभावना भी अपेक्षाकृत अधिक है।

इन पाठयक्रम की प्रशिक्षण अवधि कुछ महीनों से लेकर 1 साल तक होती है, जबकि फैशन डिजायनिंग का कोर्स 2 से 3 साल का है और इसके बाद भी कोई गारंटी नहीं है कि नौकरी मिल ही जाएगी।’ करीब पांच साल पहले की बात है लखनऊ में कई फैशन संस्थान की शुरूआत हुई थी। छात्रों के नहीं आने के कारण इनमें से ज्यादातर संस्थान बंद हो चुके हैं। एक संस्थान के मालिक ने बताया कि ‘हमने पांच साल पहले फैशन डिजायनिंग का कोर्स शुरू किया था लेकिन पर्याप्त संख्या में छात्रों के नहीं आने के कारण इसे बंद करना पड़ा।’

कुछ लोगों का कहना है कि लखनऊ में प्रबंधन की पर्याप्त व्यवस्था और फैशन उद्योग में संपर्क नहीं होने के कारण संस्थानों को नाकामी देखनी पड़ी है। जी डी इंस्टीच्युट ऑफ फैशन टेक्नालॉजी के केन्द्र निदेशक संदीप गोला ने बताया कि टेलर और फैशन डिजायनर में काफी अंतर है। ऐसे किसी भी संस्थान को खोलने वाले को इस अंतर के बारे में पता होना चाहिए और इसके अनुसार माहौल उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘छात्रों को रोजगार मुहैया करने के लिए उद्योग में पकड़ होनी चाहिए वर्ना अपने को बचाए रखना मुश्किल हो जाएगा।’

शहर के एक फैशन संस्थान की संकाय सदस्य अल्का ने बताया कि ‘फैशन डिजायनिंग आज भी आकर्षक कैरियर विकल्प है और हमेशा रहेगा। हालांकि शुरूआत में हमने जैसी मांग देखी थी वैसी आज दिखाई नहीं देती है। यह करने के जगह कि हमें छात्र नहीं मिल रहे हैं, मैं कहना चाहूंगी कि हर क्षेत्र में ठहराव आता है।’ फैशन संस्थान की फीस अन्य पाठयक्रमों के मुकाबले काफी कम है। फैशन डिजायनिंग के पाठयक्रम की फीस अधिकतम 50000 रुपये है जबकि एविएशन और मैनेजमेंट की फीस कम से कम एक लाख रुपये है।

Advertisement
First Published - July 15, 2008 | 10:15 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement