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ईंट कारोबारियों की चूलें हिलीं

Last Updated- December 08, 2022 | 10:08 AM IST

मध्यप्रदेश के अग्निरोधी ईंट (रिफ्रेक्टरी) निर्माण उद्योगों की नींव भी मंदी की वजह से हिलने लगी है।


उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि यूरोप और अमेरिका से मिलने वाले ऑर्डर में पिछले कुछ दिनों से करीब 50 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।

अग्निरोधी ईंट बनाने वाली करीब 35 इकाइयां पहले ही लागत में इजाफे की वजह से संकट से गुजर रही थी, ऐसे में ऑर्डर में आ रही गिरावट ने उद्योगों की हालत और खस्ता कर दी है।

मध्यप्रदेश के जबलपुर और कांटी इलाके में स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट और तांबा उद्योगों के लिए बड़े पैमाने पर अग्निरोधी ईंट बनाने का काम होता है।

मध्यप्रदेश रिफ्रेक्टरी मैन्युफक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद गुगलिया का कहना है कि सीमेंट और स्पंज आयरन उद्योगों की ओर से नई इकाइयों की स्थापना को ठंडे बस्ते में डाल दिए जाने से अग्निरोधी ईंटों की मांग में भारी गिरावट आई है।

उन्होंने बताया कि ईंट निर्माण इकाइयों ने उत्पाद की कीमतों में करीब 15 फीसदी की कमी की है, लेकिन कच्चे माल की आपूर्ति करने वालों की ओर से दाम में कोई कटौती नहीं की गई है।
इससे इकाइयों का मुनाफा काफी घट गया है।

अरविंद ने बताया कि हर इकाई में 150 टन कोयले की प्रतिमाह जरूरत होती है, लेकि कोयला कंपनियों की ओर से सही आपूर्ति नहीं की जा रही है।

ऐसे में इन इकाइयों को महंगे दामों पर कोयला खरीदना पड़ रहा है। कोयले की आपूर्ति में आ रही बाधा से ईंट निर्माण इकाइयां फर्नेस ऑयल का उपयोग कर रही हैं।

दरअसल, फर्नेस ऑयल की कीमतों में हाल के दिनों में काफी कमी आई है। इससे ईंट निर्माण कंपनियों को लागत कम करने में थोड़ी सहूलियत हो रही है।

गुगलिया का कहना है कि कोयले की कीमतें अभी भी काफी ज्यादा है। इससे ईंट इकाइयों को काफी परेशानी आ रही है और उनके मुनाफे में भी 7 से 8 फीसदी की कमी आई है।

उनका कहना है कि अगर लौह एवं इस्पात परियोजनाओं को हरी झंडी नहीं दी गई, तो अग्निरोधी ईंट इकाइयों को बहुत अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।उन्होंने बताया कि तमाम ईंट कंपनियां सीमेंट और स्पंज आयरन की नई परिययोजनाओं पर ध्यान लगाए है।

अगर वहां से ऑर्डर मिलना बंद हो जाए, तो ईंट उद्योग का अस्तित्व संकट में आ जाएगा। गुगलिया ने कहा कि उनकी कंपनी महाकौशल रिफ्रेक्टरी में करीब 4000 लोगों को प्रत्यक्ष, वहीं 2000 लोगों को अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिला हुआ है।

मंदी के बावजूद कंपनी ने एक भी कर्मचारियों की छंटनी नहीं की है, बल्कि नए खरीदारों को जोड़ने के लिए मार्केटिंग कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की तैयारी चल रही है।

अमेरिका, यूरोप से मांग में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट

घरेलू बाजारों से भी नहीं मिले आर्डर

कोयले जैसे कच्चे माल की ऊंची कीमतों के कारण भी बढ़ रही है लागत

First Published - December 21, 2008 | 9:26 PM IST

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