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बंगाल के चुनाव में कलाकारों की सुरताल

Last Updated- December 10, 2022 | 7:36 PM IST

लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल के राजनीतिक ड्रामे में लोगों को संगीत, काव्य और कला तीनों का लुत्फ उठाने का मौका मिलेगा।
राज्य में मौजूद सभी धुरंधर पार्टियां इन क्षेत्रों के दिग्गजों को चुनावों के लिए टिकट दे रही हैं। 90 के दशक में अपनी गायकी से राज्य के लोगों को मदहोश करने वाले कबीर सुमन को तृणमूल कांग्रेस जाधवपुर संसदीय क्षेत्र से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।
इसी सीट से साल 1984 में निवर्तमान लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को हराकर ममता बनर्जी ने अपनी संसदीय यात्रा शुरू की थी। कबीर सुमन तृणमूल कांग्रेस का चेहरा बने तो कोलकाता के प्रसिद्ध चित्रकार सुवाप्रसन्ना पीछे से ही पार्टी को समर्थन देंगे।
हालांकि पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट देने की पेशकश भी की थी। लेकिन उन्होंने इसे नकार दिया। सुवाप्रसन्ना ने बताया, ‘मुझे पार्टी में अच्छे ओहदे पर मौजूद व्यक्ति ने चुनाव लड़ने की पेशकश दी थी। लेकिन चुनाव लड़ना मेरा काम नहीं है।’
लेकिन ऐसा नहीं है कि वह पार्टी को अपनी सेवाएं नहीं दे रहे हैं। अब वह पार्टी के लिए एक नई भूमिका में हैं। सुवाप्रसन्ना अब हमेशा गुस्से में रहने वाली ममता बनर्जी के सलाहकार की भूमिका निभाएंगे। पार्टी के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने ममता बनर्जी के कई कारोबारियों से अच्छी खासी बातचीत कराई है।
अगर पार्टी की अधिकतर मीटिंग भी सॉल्ट लेक स्थित उनके बंगले पर होती हैं। इस बारे में सुवाप्रसन्ना ने बताया, ‘मेरे अंदर अभिमान नहीं है। अगर किसी को मुझसे सलाह चाहिए तो मैं उसे सलाह जरूर दूंगा। आप बताइएं अगर मैं आपके पास कोई सलाह मांगने आता हूं, तो क्या आप मुझे भगा देंगे?’
उन्होंने बताया, ‘इस समय बंगाल की हालत काफी खराब है। राज्य झूठे राजनीतिक विचारों में उलझा हुआ है। राज्य को झूठे मार्क्सवाद को उखाड़कर फेंक देना चाहिए। इस राज्य ने देश को कई बड़े नेता दिए हैं, जिन्होंने यहां पर समाजवाद के बीज बोए थे। हमें समाजवाद सीखने के लिए  सीपीआई (एम) की जरूरत नहीं है।’
अब अगर तृणमूल के पास कबीर सुमन और सुवाप्रसन्ना हैं तो सीपीआई (एम) कैसे पीछे रह सकती है? उसने भी एक और मशहूर चित्रकार वसीम रियाज कपूर को अपने खेमे में कर लिया है। कपूर ने बताया, ‘उत्तरी कोलकाता से पार्टी के प्रत्याशी मोहम्मद सलीम मेरे पास अपने बैनर और पोस्टर बनवाने के लिए मेरे पास आए।’
उन्होंने बताया कि वह सलीम की रैली और कैंपेन में उनका साथ देने के लिए तैयार हो गए। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने बताया कि इससे कला को एक नया आयाम मिलेगा। फिल्म निर्माता अपर्णा सेन को भी तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाली इस निर्देशिका ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
एक तरफ जहां सेन को सक्रिय राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है, वहीं बंगाली फिल्मों की अभिनेत्री शताब्दी रॉय तृणमूल के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं। हालांकि रॉय की राजनीतिक क्षमता के बारे में किसी को भी खास जानकारी नहीं है, लेकिन पार्टी का मानना है कि वह जीत जाएंगी। दिलचस्प बात यह है कि वह जिस सीट से चुनाव लड़ेंगी अभी उस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
वाम दलों को हमेशा से ही दिग्गज कलाकारों का साथ मिला है। सलिल चौधरी, सचिन देव बर्मन, शंभू मित्रा, सफदर हाशमी और हबीब तनवीर जैसे महान कलाकार पार्टी को अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके साथ ही ए के हंगल और उत्पल दत्त ने भी वाम दलों के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है।
दिलचस्प बात यह है कि राज्य यातायात मंत्री सुभाष चक्रवर्ती ने एक बार उषा उथुप के कार्यक्रम को असभ्य बताया था। तो इन चुनावों के लिए जिस तेजी से तृणमूल कलाकारों को टिकट दे रही है, वह तो वाम दलों के लिए सांस्कृतिक आघात ही होगा।

First Published - March 12, 2009 | 1:10 PM IST

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