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कमजोर खपत बरकरार

Last Updated- December 11, 2022 | 9:09 PM IST

सितंबर से दिसंबर 2021 तिमाही के दौरान 2,986 सूचीबद्ध कंपनियों के नतीजों का विश्लेषण बताता है कि मुद्रास्फीति का असर पड़ रहा है। खर्च बढ़ गया है, मार्जिन में कमी आई है और निजी खपत कमजोर है। आधार प्रभाव समाप्त हो रहा है, 2020-21 की तीसरी तिमाही से कंपनियों का मुनाफा सुधरा था। सकारात्मक पक्ष की बात करें तो जिंस क्षेत्र मसलन तेल एवं गैस उत्पादक, खनन, रसायन और औद्योगिक धातु क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा रहा है। गतिविधियों में सुधार के भी संकेत हैं। विमानन क्षेत्र ने वापसी की है, लॉजिस्टिक्स और नौवहन क्षेत्र का विकास हुआ है तथा स्वागत उद्योग में भी सुधार हो रहा है। कुल मिलाकर देखा जाए तो नमूनों से पता चलता है कि 32 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री हुई। यह सालाना आधार पर 24 फीसदी का सुधार है, परिचालन मुनाफा 12.5 फीसदी बढ़कर 7.96 लाख करोड़ रुपये रहा और जबकि कर पश्चात लाभ 33 फीसदी बढ़कर 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा। थोक मूल्य सूचकांक में दो अंकों की वृद्धि लागत में दिख रही है। ईंधन की लागत 40 फीसदी बढ़ी है जबकि अन्य कच्चे माल और तैयार वस्तुओं की लागत में भी इतना ही इजाफा हुआ है।
तेल एवं गैस तथा परिशोधन, बैंकिंग और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को छोड़ दिया जाए तो बिक्री में 22 फीसदी का इजाफा हुआ, जबकि परिचालन मुनाफा 6.9 फीसदी बढ़ा। परिचालन मार्जिन अवश्य घटा और वह एक वर्ष पहले के 21.8 फीसदी से घटकर 19 फीसदी रह गया। शुद्ध मार्जिन भी 8.5 फीसदी से घटकर 8 फीसदी रह गया। तेल एवं गैस उत्पादन क्षेत्र की बिक्री इस तिमाही में 43 फीसदी बढ़ी जबकि कर पश्चात मुनाफा 226 फीसदी बढ़ गया। गैस वितरण क्षेत्र में बिक्री 67 फीसदी बढ़ी जबकि कर पश्चात मुनाफा 43 फीसदी बढ़ा। परंतु बैंक ऋण में केवल 3.5 फीसदी का सुधार हुआ और एनबीएफसी का ऋण स्थिर रहा। निजी खपत भी कम रही। दैनिक उपभोग की उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र का कर पश्चात मुनाफा और परिचालन मुनाफा दोनों स्थिर रहे।
वाहन निर्माताओं की बिक्री कम हुई और परिचालन मुनाफा 19 फीसदी कम हुआ। कर पश्चात मुनाफे में 54 फीसदी गिरावट आई। दोपहिया वाहन कंपनियों बजाज और हीरो की बिक्री में भारी गिरावट आई। मारुति और टाटा मोटर्स के साथ भी ऐसा ही हुआ। वाहन उद्योग अभी भी चिप की कमी से जूझ रहा है। वाहन कलपुर्जा क्षेत्र के कर पश्चात लाभ में 39 फीसदी की कमी आई। सार्वजनिक व्यय में सुधार की बात करें तो सीमेंट की बिक्री और बुनियादी ढांचा विकास में एक अंक की मामूली वृद्धि हुई। उच्च व्यय के कारण सीमेंट क्षेत्र का कर पश्चात मुनाफा 32 फीसदी घटा। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में परिणाम घोषित करने वाली 137 कंपनियों की शुद्ध बिक्री 21.5 फीसदी बढ़ी और परिचालन मुनाफा 9.5 फीसदी तथा कर पश्चात मुनाफा 8.6 फीसदी बढ़ा। व्यय में 25.5 फीसदी इजाफा हुआ और परिचालन मार्जिन एक वर्ष पहले के 27.9 फीसदी से घटकर 25 फीसदी रह गया। औद्योगिक संगठन नैसकॉम का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2022-23 में बेहतरी आएगी लेकिन उसने मार्जिन में कमी आने को चिंता का सबब बताया है। निर्यात आधारित औषधि क्षेत्र में की बिक्री एक फीसदी बढ़ी और कर पश्चात लाभ को कच्चे माल और ढुलाई की बढ़ी हुई लागत ने प्रभावित किया। गैर लौह धातु और लोहा तथा इस्पात में तेजी आई क्योंकि वैश्विक मांग के कारण कीमतें बढ़ी हैं। इस्पात उद्योग की बिक्री 43 फीसदी और कर पश्चात लाभ 60 फीसदी बढ़ा। गैर लौह धातु क्षेत्र की बिक्री 44 फीसदी और कर पश्चात लाभ 70 फीसदी बढ़ा। कुल मिलाकर उच्च मुद्रास्फीति और कम रोजगार के कारण खपत कम हैं और ऋण विस्तार में कमी भी चिंता का विषय है। व्यापक आर्थिक सुधार जारी है लेकिन तीसरी तिमाही में गति तेज होने के बजाय शायद धीमी पड़ी है।

First Published - February 20, 2022 | 10:56 PM IST

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