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लोकलुभावन वादों की होड़

Last Updated- December 11, 2022 | 10:07 PM IST

देश के विधानसभा चुनावों में नि:शुल्क तोहफों के वादे एक मानक बन चुके हैं। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश, पंजाब, मणिपुर, उत्तराखंड और गोवा के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर किए जा रहे वादों पर एक नजर डालना उपयोगी सिद्ध हो सकता है। आम आदमी पार्टी इनमें से लगभग सभी चुनावों में मैदान में है लेकिन गोवा और पंजाब में जहां वह वास्तव में टक्कर में है, वहां उसने नि:शुल्क बिजली का वादा किया है। ऐसे ही वादे ने अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में सत्ता में आने में मदद की थी। अब पार्टी इन राज्यों में भी 300 यूनिट नि:शुल्क बिजली देने का वादा कर रही है। ऐसा करने वाली यह इकलौती पार्टी नहीं है, अन्य दल भी ऐसा वादा कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी ने प्रदेश के बिजली कनेक्शन वाले 2.7 करोड़ परिवारों में से अधिकांश को 300 यूनिट बिजली नि:शुल्क देने का वादा किया है। यह इकलौता उपहार नहीं है जिसकी पेशकश की गई है। यादव ने छात्रों को नि:शुल्क लैपटॉप देने और आवारा सांड द्वारा मारे जाने वाले लोगों के परिवार को 5 लाख रुपये की राशि देने का वादा भी किया है। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने नि:शुल्क बिजली के अलावा राज्य की हर महिला को 1,000 रुपये प्रति माह देने का वादा किया है। शिरोमणि अकाली दल ने हर महिला को 2,000 रुपये देने का वादा किया है। अंत में सत्ताधारी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि यदि कांग्रेस दोबारा सत्ता में आती है तो वह न केवल 2,000 रुपये देगी बल्कि आठ गैस सिलिंडर भी नि:शुल्क दिए जाएंगे। उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने निजी ट्यूबवेल कनेक्शनों की बिजली शुल्क दर आधी कर दी है।
इन लोकलुभावन कल्याण पेशकशों को लेकर मची होड़ भारतीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था के हालिया घटनाक्रम का परिणाम है। 2019 के आम चुनाव के नतीजों के कई विश्लेषण यह सुझाते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोबारा चुनाव जीतने में कल्याण योजनाओं का विस्तार भी एक वजह है। तब से अब तक के वर्षों की बात करें तो ज्यादातर समय महामारी का दबदबा रहा है। ऐसे में ग्रामीण और असंगठित क्षेत्र में व्यापक तौर पर निराशा का माहौल रहा है। ऐसे में गरीबी से निपटने और चुनावों को ध्यान में रखते हुए लोकप्रिय नि:शुल्क उपहारों की चाहत ने जोर पकड़ा। लेकिन इस इच्छा का प्रतिरोध किया जाना चाहिए क्योंकि यह न तो स्थायी है और न ही समझदारी भरी। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में हर परिवार को 300 यूनिट बिजली नि:शुल्क देने से 22,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा। बिजली पर पहले ही 11,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। ज्यादातर राज्य शायद ही ऐसी योजनाओं का राजकोषीय बोझ उठाने की स्थिति में हैं। पंजाब में ऐसा लोकलुभावन कल्याणवाद सरकार के व्यय पर बोझ बना हुआ है। गोवा जैसे छोटे और तमिलनाडु जैसे अमीर राज्यों के लिए उपयुक्त योजनाएं जरूरी नहीं कि उत्तर प्रदेश में भी कामयाब हों।
चुनाव लड़ रहे राजनीतिक दलों को ऐसे वादे करने से बचना चाहिए जिनको पूरा करने की कोशिश राजकोषीय क्षमता को प्रभावित करे। परंतु केंद्र सरकार को भी सावधानी बरतनी चाहिए। केंद्रीय बजट कुछ ही सप्ताह में पेश किया जाना है और इसमें दो राय नहीं कि सभी चुनावी राज्यों में ऐसी घोषणाएं करने का दबाव होगा। ऐसा करना न केवल गलत होगा बल्कि यह खतरनाक भी हो सकता है क्योंकि पूरे देश पर कर्ज का दबाव है। केंद्र सरकार को बजट के जरिये ऐसे लोकलुभावन कल्याण की होड़ को हवा नहीं देनी चाहिए।

First Published - January 13, 2022 | 11:07 PM IST

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