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Editorial: नए औद्योगिक वर्गीकरण से अर्थव्यवस्था की सटीक निगरानी और निवेश में मदद

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औद्योगिक वर्गीकरण पहली बार वर्ष 1962 में तैयार किया गया था और इसके बाद उसमें 1970, 1987, 1998, 2004 और 2008 में सुधार किया गया

Last Updated- September 07, 2025 | 10:01 PM IST
Indian Economy

प्रस्तावित राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (एनआईसी-2025) उन्नयन भारतीय अर्थव्यवस्था की निगरानी में सुधार लाने में मदद करेगा। औद्योगिक वर्गीकरण पहली बार वर्ष 1962 में तैयार किया गया था और इसके बाद उसमें 1970, 1987, 1998, 2004 और 2008 में सुधार किया गया। यह राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा विकसित एक मानकीकृत अंकीय प्रणाली है जो विभिन्न उद्योगों की गतिविधियों का वर्गीकरण करती है।

एनआईसी कोड राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों की गणना, सांख्यिकीय सर्वेक्षणों, निवेश के प्रवाह और नीति निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। हालांकि जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था डिजिटल सेवाओं, हरित ऊर्जा और गिग कार्यों की ओर बढ़ रही है, ऐसा लगता है कि पुरानी वर्गीकरण प्रणाली जल्दी ही अप्रासंगिक हो सकती है।

वर्ष 2025 का मसौदा इस खाई को दूर करने का वादा करता है जिसमें ओटीटी प्लेटफॉर्म से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों तक जैसे नवीनतम क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई है। यह क्यों मायने रखता है? साधारण सी बात है, इसलिए क्योंकि अगर कोड हकीकत को नहीं दर्शाते हैं तो यह जोखिम उत्पन्न हो जाता है कि शायद राष्ट्रीय लेखा पूरी आर्थिक गतिविधियों को पूरी तरह न दर्शा सकें। संभव है कि नए उद्योगों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल सके, जबकि पुराने उद्योग शायद उससे अधिक महत्त्वपूर्ण नजर आएं जितने कि वे वास्तव में हैं। इससे नीति-निर्माताओं के लिए ऐसी हालत बन सकती है जहां वे शायद सही तरीके से यह न जान सकें कि रोजगार कहां निर्मित हो रहे हैं और निवेश कहां आ रहा है।

एक ऐसा देश जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है और बहुत तेजी से विकसित हो रहा है, वहां सटीक वर्गीकरण आवश्यक है। यह इस बात को भी रेखांकित करता है कि परिवर्तन पर नजर रखने के लिए परिवारों के निरंतर सर्वेक्षण और संशोधन की आवश्यकता है ताकि बदलाव पर नजर रखी जा सके। कुछ आर्थिक संकेतकों के लिए एक लंबे अंतराल के बाद आधार वर्ष में बदलाव किया जा रहा है। हालांकि, वर्गीकरण की प्रक्रिया अपने आप में कई चुनौतियों से भरी हुई है।

अतीत के साथ निरंतरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि शोधकर्ता अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलावों को समझने के लिए दीर्घकालिक समय श्रृंखला डेटा पर निर्भर करते हैं। अगर कोडिंग की परंपराओं में अचानक बदलाव किया गया, तो ये प्रवृत्तियां धुंधली हो सकती हैं और देश के डेटा की अपने ही ऐतिहासिक रिकॉर्ड से तुलना करना कठिन हो जाएगा। इससे बचने के लिए, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय को चाहिए कि वह स्पष्ट ‘सामंजस्य तालिकाएं’ प्रदान करे, जो यह दिखाएं कि पुराने कोड नए कोड से कैसे मेल खाते हैं, और जिन्हें शोधकर्ता आसानी से उपयोग कर सकें।

तेजी से बढ़ती गिग अर्थव्यवस्था और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को सावधानीपूर्वक एकीकृत करने की आवश्यकता होगी। नीति आयोग का अनुमान है कि 2020-21 में इस क्षेत्र में 77 लाख कर्मचारी काम कर रहे थे लेकिन 2029-30 तक यह तीन गुना होकर 2.35 करोड़ हो जाएंगे। भारत में खाद्य आपूर्ति, फ्रीलांस सेवाएं और डिजिटल सूक्ष्म उद्यमिता आदि आय के खास स्रोत बन गए हैं-खासतौर पर युवा कर्मचारियों के लिए। इन गतिविधियों को सांख्यिकीय मूल ढांचे से बाहर रखने का जोखिम यह है कि इससे रोजगार और मूल्य संवर्धन दोनों का कम आकलन हो सकता है, जिससे संभावित रूप से नियामक स्तर पर भी खामियां उत्पन्न हो सकती हैं।

इसमें एक वैश्विक पहलू भी है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) का कहना है कि जिन देशों के पास आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलनीय कोड होते हैं, वे अधिक निवेश आकर्षित करते हैं क्योंकि निवेशक आसानी से क्षेत्रीय डेटा को पढ़ और समझ सकते हैं।भारत के लिए, जैसा कि योजना बनाई गई है, एनआईसी-2025 को अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण मानक के अनुरूप बनाना विश्वसनीयता और निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने में मदद करेगा।

अर्थव्यवस्था की समग्र निगरानी के संदर्भ में, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) फाइलिंग और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्राप्त डेटा का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। नई प्रणाली भविष्य की ओर उन्मुख हो सकती है। जैसे कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, पर्यावरण अनुकूल क्षेत्र की नौकरियां, और चक्रीय अर्थव्यवस्था जैसी गतिविधियों को शामिल करके। इसलिए, व्यापक संदर्भ में एनआईसी का उन्नयन करना अत्यंत आवश्यक है। एक तेजी से बदलती दुनिया में, खासकर तकनीक में हो रहे तीव्र बदलाव और उसके व्यापक उपयोग के कारण नीतियां और व्यवसाय तभी अनुकूल हो सकते हैं जब उन्हें सतत और मजबूत डेटा प्रवाह का समर्थन प्राप्त हो।

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First Published - September 7, 2025 | 10:01 PM IST

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