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2030 तक ₹100 लाख करोड़ पार करने की तैयारी, अमीरों की पसंद बने PMS और AIF!

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अमीर निवेशकों के लिए PMS और AIF बन रहे हैं बेहतर रिटर्न और कस्टम समाधान का पसंदीदा विकल्प, 2030 तक 100 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार करने की उम्मीद।

Last Updated- December 03, 2024 | 5:39 PM IST
PMS

भारत का वैकल्पिक निवेश उद्योग, जिसमें पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) और ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) शामिल हैं, 2030 तक 100 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकता है। यह दावा PMS बाजार की एक रिपोर्ट में किया गया है। यह मौजूदा मूल्य का पांच गुना है और इसे हासिल करने में सिर्फ छह साल लगेंगे।

क्या हैं ये वैकल्पिक निवेश विकल्प?

1. पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS)

अगर आपके पास अच्छा पैसा है लेकिन आप इसे सही तरीके से निवेश करने या खुद सही विकल्प को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं, तो PMS आपकी मदद कर सकता है।

पोर्टफोलियो मैनेजर एक प्रोफेशनल होता है, जो आपकी तरफ से आपके निवेश को संभालता है। वह स्टॉक्स, बॉन्ड्स और अन्य संपत्तियों को देखकर आपकी जरूरत, रिस्क लेने की क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार एक कस्टम प्लान तैयार करता है।

उदाहरण के तौर पर, अगर आप शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं लेकिन आपके पास रिसर्च करने का समय या विशेषज्ञता नहीं है, तो PMS आपके लिए यह काम करता है। यह रिसर्च करता है, निर्णय लेता है और आपके निवेश की निगरानी करता है ताकि आपकी संपत्ति बढ़ सके।

PMS एक व्यक्तिगत और प्रोफेशनल निवेश सेवा है, जो बड़े निवेशकों (अक्सर 50 लाख रुपये या उससे अधिक पूंजी वाले) के लिए बनाई गई है। इसमें पोर्टफोलियो मैनेजर आपकी पूंजी को आपके गोल और रिस्क सहने की क्षमता के अनुसार मैनैज करता है। इसका मुख्य उद्देश्य हाई रिटर्न देना है।

2. ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF): रिस्क और अवसर का बैलेंस

AIF में कई निवेशकों की पूंजी को एक फंड मैनेजर द्वारा मैनेज किया जाता है। यह पूंजी स्टॉक्स या बॉन्ड्स के बजाय प्राइवेट इक्विटी, रियल एस्टेट, वेंचर कैपिटल, हेज फंड्स या स्टार्टअप्स जैसे एसेट में लगाई जाती है।

उदाहरण के तौर पर, यदि आप स्टार्टअप्स में निवेश करना चाहते हैं लेकिन पर्सनल रिस्क उठाने से बचना चाहते हैं, तो AIF आपकी पूंजी को अन्य निवेशकों के साथ मिलाकर हाई रिटर्न वाले विकल्पों में निवेश करता है।

ये निवेश विकल्प अभी क्यों लोकप्रिय हो रहे हैं?

  • बढ़ती संपत्ति: भारत में धनी व्यक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
  • आर्थिक साक्षरता: लोग अब अपने पैसे को बेहतर तरीके से निवेश करने के बारे में जागरूक हो रहे हैं।
  • विविधता की मांग: बाजार की अस्थिरता को देखते हुए निवेशक अलग-अलग जगह निवेश करके रिस्क को कम करना चाहते हैं।
  • नियामक समर्थन: सरकार और सेबी ने इस बाजार को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

कैटेगरी-II AIF में सबसे ज्यादा रुचि

FY25 में, AIF के अंदर कैटेगरी-II फंड्स का हिस्सा सबसे बड़ा रहा। यह वैकल्पिक निवेश विकल्प हाई नेटवर्थ व्यक्तियों (HNI) और अल्ट्रा-हाई नेटवर्थ व्यक्तियों (UHNIs) के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। 2030 तक PMS और AIF बाजार 100 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है। यह न केवल भारत को एक मजबूत वित्तीय केंद्र बना रहा है, बल्कि निवेशकों को बेहतर रिटर्न और विकल्प प्रदान कर रहा है।

2030 तक वैकल्पिक निवेश उद्योग 100 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को करेगा पार

भारत का पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) और ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। FY14 से FY25 के बीच, इस उद्योग की संपत्तियां लगभग 1 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 18.87 लाख करोड़ रुपये हो गई हैं। PMS बाजार की रिपोर्ट के अनुसार, अगर यही रफ्तार बनी रही तो 2030 तक यह आंकड़ा 100 लाख करोड़ रुपये पार कर सकता है।

अर्थव्यवस्था में तेज विकास से बढ़ा वैकल्पिक निवेश का आकर्षण

भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, सरकारी पहल, घरेलू बाजार का विस्तार और बुनियादी ढांचे में निवेश ने वैकल्पिक निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। भारत के 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के साथ, HNI और UHNI निवेशकों के लिए PMS और AIF पसंदीदा विकल्प बनते जा रहे हैं।

PMS और AIF: बेहतर रिटर्न और विविधता के लिए आकर्षक विकल्प

उद्योग की बढ़ोतरी: PMS और AIF उद्योग ने पिछले दशक में 33% CAGR दर्ज किया है।
तेजी से विकास: वैकल्पिक संपत्तियों की विकास दर पिछले पांच वर्षों में म्यूचुअल फंड्स से दोगुना रही है।
पांच गुना वृद्धि का अनुमान: 2030 तक PMS और AIF संपत्तियां पांच गुना बढ़ने की उम्मीद है।

निवेशकों का झुकाव क्यों बढ़ा?

पर्सनल समाधान और ज्यादा रिटर्न: HNI और UHNI निवेशक अपने हिसाब से बने निवेश विकल्प और बेहतर रिटर्न पाने के लिए वैकल्पिक निवेश को चुन रहे हैं।
विविधता की मांग: इन विकल्पों से पोर्टफोलियो में विविधता लाने में मदद मिलती है।
नियामकीय सुधार: हाल के नियम निवेशकों की सुरक्षा बढ़ाने और उनके विश्वास को मजबूत करने पर केंद्रित हैं।

विशेषज्ञ की राय

Axis Securities के CIO नवीन कुलकर्णी के अनुसार, “म्यूचुअल फंड्स से हटकर PMS और AIF जैसे विकल्पों की तरफ तेजी से रुझान बढ़ रहा है। बेहतर रिटर्न और कम जोखिम के कारण ये निवेश विकल्प ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। आने वाले सालों में यह उद्योग 3-4 गुना तक बढ़ सकता है।”

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First Published - December 3, 2024 | 5:39 PM IST

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