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क्रेडिट रिस्क फंड चुनने से पहले पोर्टफोलियो देखें

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एक साल के दौरान क्रेडिट रिस्क फंड (नियमित योजना) ने अपनी श्रेणी में 7.45 फीसदी का औसत रिटर्न दिया है।

Last Updated- May 01, 2024 | 11:45 PM IST
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पिछले एक साल के दौरान क्रेडिट रिस्क फंड (नियमित योजना) ने अपनी श्रेणी में 7.45 फीसदी का औसत रिटर्न दिया है। इन फंडों को अपनी परिसंपत्तियों का कम से कम 65 फीसदी हिस्सा सबसे अधिक रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड में आवंटित करना आवश्यक है। उनके फंड मैनेजर अक्सर अतिरिक्त रिटर्न की तलाश में क्रेडिट गुणवत्ता पर कम ध्यान देते हैं।

फिलहाल इस श्रेणी में 14 फंड हैं जो कुल 23,141.4 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करते हैं। निवेशकों को इन फंडों में निवेश करने से पहले न केवल पिछले प्रदर्शन पर गौर करना चाहिए बल्कि इनमें निहित जोखिमों पर भी विचार करना चाहिए।

उच्च एक्यूरल्स, कुछ पूंजीगत लाभ

पिछले एक साल के दौरान एक्यूरल्स ने रिटर्न में खासा योगदान किया है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) के मुख्य निवेश अधिकारी (निर्धारित आय) मनीष बंठिया ने कहा, ‘एक्यूरल्स ब्याज दर में स्थिरता और सीमित यील्ड के बीच रिटर्न का एक अच्छा स्रोत रहा है।’

डीएसपी म्युचुअल फंड के फंड मैनेजर विवेक रामकृष्णन ने भी इससे सहमति जताई। उन्होंने कहा, ‘उच्च यील्ड वाले बॉन्ड ने अच्छा कैरी (यील्ड) दिया है। कुछ एए और इससे कम रेटिंग वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के मामले में यह 9 फीसदी से अधिक और कंपनियों मामले में 8 फीसदी से अधिक रही है।’

यील्ड में नरमी से भी कुछ फायदा हुआ है। रामकृष्णन ने कहा, ‘साल 2023 में ब्याज दरों में नरमी के साथ ही क्रेडिट रिस्क फंडों के सरकारी बॉन्ड वाले हिस्से ने पूंजीगत लाभ प्रदान किया।’

इनमें से कुछ फंडों ने उन निवेशों की भरपाई की, जिन्हें पहले बट्टेखाते में डाल दिया गया था। गोलटेलर के सह-संस्थापक विवेक बांका ने कहा, ‘दो अंकों में उनके मौजूदा रिटर्न में इसने भी योदान किया है।’

सकारात्मक वाहक

अगले 12 महीनों के दौरान रिटर्न को काफी हद तक एक्यूरल्स से रफ्तार मिलेगी। फंड मैनेजर बंठिया ने कहा, ‘दरों के सकारात्मक माहौल को देखते हुए हमारा मानना है कि एक्यूरल्स रिटर्न का एक महत्त्वपूर्ण घटक बना रहेगा, क्योंकि स्प्रेड ऐसेट्स सुरक्षा मार्जिन के साथ उचित कैरी प्रदान करते हैं।’

अन्य लोगों का मानना है कि पूंजीगत लाभ भी इसमें योगदान करेगा। रामकृष्णन ने कहा, ‘हमारा मानना है कि आगामी वर्षों के दौरान ब्याज दरों में गिरावट आएगी, जिससे पूंजीगत लाभ की गुंजाइश होगी।’

इनक्रेड मनी के मुख्य कार्याधिकारी विजय कुप्पा का भी मानना है कि अगर मुद्रास्फीति लगातार मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के 4 फीसदी के लक्ष्य के आसपास बनी रहती है, तो 2024-25 के आखिर में दरों में कटौती की जा सकती है। ऐसे में क्रेडिट रिस्क फंड सहित सभी डेट फंड को फायदा होगा।

ऋण बाजार के परिदृश्य में स्थिरता बरकरार रहने की उम्मीद है। रामकृष्णन ने कहा, ‘म्युचुअल फंडों ने पोर्टफोलियो लिक्विडिटी बनाए रखने और बॉटम-अप क्रेडिट का व्यापक विश्लेषण करने पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने प्रशासन पर भी ध्यान केंद्रित किया है, जिससे डिफॉल्ट की संभावना कम हो गई है।’

बांका के अनुसार, रेटिंग में सुधार के कारण भारतीय कॉरपोरेट बॉन्ड में विदेशी संस्थागत निवेशकों का प्रवाह बढ़ा है। इससे इन फंडों का प्रदर्शन सकारात्मक रूप से प्रभावित होगा। उन्होंने कहा, ‘कम रेटिंग लेकिन मजबूत कॉरपोरेट घराने में रणनीतिक निवेश किए जाने से इन फंडों के परिपक्व होने पर बेहतर यील्ड मिल सकती है।’

प्रमुख जोखिम

मुद्रास्फीति के नरम होने में उम्मीद से अधिक समय लग सकता है। बांका ने कहा, ‘अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक होती हैं अथवा मॉनसून अनुकूल नहीं रहता है, तो मुद्रास्फीति बढ़ सकती है। इससे ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो जाएगी।’

कुप्पा ने कहा, ‘अगर अर्थव्यवस्था में सकल या शुद्ध गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में वृद्धि होती है, तो क्रेडिट स्प्रेड बढ़ सकता है। इससे क्रेडिट रिस्क फंडों के प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ेगा।’

आईएलऐंडएफएस संकट के बाद, कई क्रेडिट रिस्क फंड सुरक्षित हो गए हैं। बांका ने कहा, ‘मगर निवेशक अधिक रिटर्न चाहते हैं। इसलिए कुछ फंड अपने क्रेडिट गुणवत्ता मानकों में ढिलाई बरत सकते हैं। इससे भविष्य में डिफॉल्ट एवं नकारात्मक रिटर्न की आशंकाएं बढ़ेंगी।’

किसे करना चाहिए निवेश?

केवल अधिक जोखिम उठाने की क्षमता वाले निवेशकों को ही इन फंडों में निवेश करना चाहिए। कुप्पा ने कहा, ‘कम से कम एक साल का समय रखें, क्योंकि अधिकतर क्रेडिट रिस्क फंड इस दौरान रिडम्प्शन के लिए 1 फीसदी तक का एक्जिट लोड लगाते हैं।’

बांका ने सुझाव दिया कि कम कर दायरे में आने वाले ऐसे लोगों को इनमें निवेश करने पर विचार करना चाहिए जो निवेश को 12 से 24 महीने तक बरकरार रख सकें। लाभ पर कराधान स्लैब दरों के अनुसार लगाया गया है और इसलिए अधिक कर दायरे में आने वाले लोगों के लिए रिस्क फंड संभवत: फायदेमंद नहीं रहेगा।

निवेशकों को इन फंडों में अपने कुल डेट फंड आवंटन का 5 से 10 फीसदी ही निवेश करना चाहिए। जो लोक कम जोखिम लेना चाहते हैं उन्हें इनसे दूर ही रहना चाहिए। बांका ने सुझाव दिया कि इस श्रेणी के तहत उन फंडों में निवेश करने से बचें जिनका व्यय अनुपात अधिक हो और पोर्टफोलियो की अवधि तीन साल से अधिक हो। निवेश करने से पहले फंड के बॉन्ड होल्डिंग्स की समीक्षा करें ताकि उसमें जोखिम के स्तर को समझा जा सके।

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First Published - May 1, 2024 | 11:35 PM IST

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