facebookmetapixel
Advertisement
Jio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडरकोटक बैंक ने सावधि जमा धोखाधड़ी मामले में दर्ज की शिकायतरिलायंस समेत कंपनियों को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने बिजली ड्यूटी छूट वापसी को सही ठहराया

Home Loan लेने वालों पर दर में कटौती का होगा असर, EMI घटाएं या लोन की अवधि?

Advertisement

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 7 फरवरी, 2025 को बेंचमार्क रीपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती करते हुए उसे 6.25 फीसदी कर दिया।

Last Updated- February 24, 2025 | 7:40 AM IST
Will rate cut affect home loan takers, reduce EMI or loan tenure? होम लोन लेने वालों पर दर में कटौती का होगा असर, EMI घटाएं या लोन की अवधि?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 7 फरवरी, 2025 को बेंचमार्क रीपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती करते हुए उसे 6.25 फीसदी कर दिया। पिछले करीब 5 वर्षों में पहली बार रीपो दर में कटौती की गई है। आरबीआई के इस फैसले से होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन के फ्लोटिंग रेट यानी लचीले ब्याज दर वाले उधारकर्ताओं को फायदा होगा।

होम लोन लेने वालों पर प्रभाव

होम लोन लेने वालों के लिए रीपो दर में कटौती का लाभ उनके बकाया मूलधन और ब्याज दर पर निर्भर करेगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी ने 75 लाख रुपये का होम लोन 20 साल की अदायगी अवधि के साथ लिया है और ब्याज दर को 9 फीसदी से घटाकर 8.75 फीसदी कर दिया गया तो उनकी ईएमआई 67,479 रुपये से घटकर 66,278 रुपये रह जाएगी। अगर एक साल तक दरों में कोई बदलाव नहीं होता है तो इससे ग्राहक को 1,201 रुपये की मासिक और 14,412 रुपये की वार्षिक बचत होगी।

रीपो दर से जुड़े ऋण पर दर में कटौती का प्रभाव तेजी से दिखेगा। पैसाबाजार के सह-संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी नवीन कुकरेजा ने कहा, ‘मौजूदा उधारकर्ताओं के लिए रीपो दर में कटौती के प्रभाव की वास्तविक तारीख संबंधित ऋणदाता द्वारा दर में बदलाव की तिथि पर निर्भर करेगी। तब तक उन्हें अपने मौजूदा दरों पर ही अदायगी जारी रखनी होगी।’ उन्होंने कहा कि सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) से जुड़े ऋण पर रीपो दर में कटौती का प्रभाव दिखने में देरी हो सकती है।

रीपो दर में गिरावट आने पर बैंक आम तौर पर ऋण अदायगी की अवधि को कम कर देते हैं। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत निवेश सलाहकार दीपेश राघव ने कहा, ‘अगर उधारकर्ता अनुरोध करें तो बैंक अदायगी की अवधि में कोई बदलाव न करते हुए उन्हें अपनी ईएमआई कम करने की भी इजाजत दे सकते हैं।’

लोन की अवधि घटाएं या EMI?

उधारकर्ताओं को अपनी वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए ईएमआई में कमी करने अथवा अदायगी की अवधि घटाने का चयन करना चाहिए। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार और फी-ओनली इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स एलएलपी के प्रमुख हर्ष रूंगटा ने कहा, ‘अगर आपकी आमदनी कम है तो आपके लिए ईएमआई में कमी का विकल्प बेहतर रहेगा। अगर आपकी आमदनी अच्छी है तो निश्चित तौर पर अदायगी की अवधि घटाने का विकल्प चुनें।’

ईएमआई में कमी करने का विकल्प चुनने से ऋण की अवधि लंबी बनी रहेगी। ऐसे में कुल मिलाकर आपका ब्याज भुगतान अधिक होगा।

जहां तक नए उधारकर्ताओं का सवाल है तो ऋणदाता शायद उन्हें दर में कटौती का पूरा लाभ नहीं देंगे। कुछ ऋणदाता अदायगी की अवधि को बढ़ाकर मौजूदा ऋण दरों को बरकरार रख सकते हैं। अगर दरें घटाई गईं तो नए उधारकर्ता कम लागत का फायदा उठा सकेंगे और वे ऋण की अधिक रकम के लिए भी पात्र होंगे।

सहजमनी डॉट कॉम के संस्थापक और सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार अभिषेक कुमार ने कहा, ‘नए उधारकर्ताओं को (अपने क्रेडिट स्कोर के हिसाब से) विभिन्न ऋणदाताओं की ब्याज दरों की तुलना अवश्य करनी चाहिए।’

राघव ने एमसीएलआर से जुड़े ऋण लेने वाले मौजूदा उधारकर्ताओं सलाह दी है कि उन्हें रीपो दर से जुड़े ऋण की ओर रुख करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा उधारकर्ताओं को अदायगी की अवधि घटाने और कुल ब्याज भुगतान को कम करने के लिए समय से पहले भुगतान को अवश्य जारी रखना चाहिए।

रूंगटा ने कहा, ‘मौजूदा उधारकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे अपने क्रेडिट स्कोर के लिए बेहतरीन उपलब्ध दर का भुगतान कर रहे हैं। अगर ऐसा नहीं है तो उन्हें अपने बैंक के भीतर अथवा बाहर बेहतर दर की तलाश करनी चाहिए।’

सावधि जमा

सावधि जमा (एफडी) की दरों में तत्काल कोई गिरावट नहीं दिख सकती है। कुकरेजा ने कहा, ‘रीपो दर में कटौती किए जाने से बैंक सावधि जमा की दरों में भी कमी किए जाने की संभावना बढ़ गई है। मगर बैंक एफडी तक उसके प्रभाव के पहुंचने की रफ्तार ऋण एवं जमा वृद्धि, तरलता और बाजार की स्थिति जैसे विभिन्न कारकों पर निर्भर करेगी।’

अगर आपके पास निवेश के लायक रकम है और आप सावधि जमा के बारे में सोच रहे हैं तो आपको अधिक रिटर्न के लिए लंबी अवधि के एफडी पर विचार करना चाहिए। कुकरेजा ने कहा, ‘इससे ब्याज दरों में गिरावट के दौर में भी अधिक रिटर्न हासिल करने का अवसर मिलेगा।’

दर में कटौती का मौजूदा चक्र लंबा नहीं चलने वाला। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें जल्द ही बदलाव हो सकता है। कुमार ने कहा, ‘एफडी निवेशकों के लिए यही सलाह है कि वे अलग-अलग अवधि के एफडी बुक करने की रणनीति अपनाएं। इससे ब्याज दरों में बदलाव के अनुकूल ढलने में मदद मिलेगी।’

Advertisement
First Published - February 24, 2025 | 7:39 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement