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विशेषज्ञों का कहना है कि FD पर इतना ज्यादा ब्याज कभी नहीं मिला था और यह दौर जल्द ही खत्म हो सकता है।

Last Updated- February 25, 2024 | 9:40 PM IST
Irrational Choice: Bank FD is correct! need for such a campaign बैंक एफडी सही है! ऐसे अभियान की जरूरत

सावधि जमा (एफडी) में इस समय रिटर्न बढ़िया मिल रहा है। एसबीएम बैंक 3 साल और 2 दिन की एफडी पर 8.25 फीसदी ब्याज दे रहा है तो आरबीएल बैंक 18 से 24 महीने की एफडी पर 8.1 फीसदी ब्याज दे रहा है। यूनिटी स्मॉल फाइनैंस बैंक तो 1,001 से ज्यादा दिन की एफडी पर 9 फीसदी तक ब्याज दे रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एफडी पर इतना ज्यादा ब्याज कभी नहीं मिला था और यह दौर जल्द ही खत्म हो सकता है। विंट वेल्थ के सह-संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी अंशुल गुप्ता के मुताबिक अगली कुछ तिमाहियों में ब्याज दरें नीचे आ जाएंगी। यानी ज्यादा ब्याज पर एफडी कराने का यही सबसे सही समय है। मगर एफडी पर ज्यादा से ज्यादा फायदा कैसे लिया जाए?

सबसे पहले आप बारबेल रणनीति अपना सकते हैं, जिसमें निवेश को कम मियाद और ज्यादा मियाद की एफडी में बांट लिया जाता है। सबसे कम निवेश मझोली अवधि की एफडी में किया जाता है। एमबी वेल्थ फाइनैंशियल सॉल्यूशंस के संस्थापक एम बर्वे समझाते हैं, ‘बारबेल रणनीति कहती है कि जोखिम और फायदे के बीच सही संतुलन बिठाना है तो उस समय निवेश करें, जब जोखिम सबसे ज्यादा हो।’

गुप्ता के मुताबिक इस रणनीति पर चलने वाले निवेशक आपात स्थिति के लिए रखा अपना पैसा कम मियाद की एफडी में लगा सकते हैं और ऊंची ब्याज दर पर लंबी मियाद की एफडी करा सकते हैं। बर्वे का यह भी कहना है कि इससे निवेशकों को अल्पावधि एफडी की सुरक्षा मिल जाती है और दीर्घावधि एफडी से बढ़िया रिटर्न भी मिल जाता है।

मगर यह एफडी कराने और भूल जाने का काम नहीं है। बैंकबाजार के मुख्य कार्याधिकारी आदिल शेट्टी कहते हैं, ‘इसके लिए पोर्टफोलियो सक्रियता से संभालना होता है और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव की अच्छी समझ भी जरूरी होती है।’

आपात स्थिति के लिए मोटी रकम रखने वाले निवेशक अगर एफडी के जरिये ऊंची ब्याज दर का फायदा उठाना चाहते हैं तो यह तरीका अपना सकते हैं। प्रमाणित वित्तीय योजनाकार और बियॉन्ड लर्निंग फाइनैंस की संस्थापक जीनल मेहता की राय है कि यह तरीका रिटायर हो चुके लोगों के लिए कारगर हो सकता है क्योंकि उन्हें आम तौर पर छोटी मियाद के लिए ही निवेश करना होता है।

निवेशक बुलेट रणनीति भी अपना सकते हैं, जिसमें एक ही तारीख पर पूरी होने वाली कई एफडी कराई जाती हैं। जीनल बताती हैं, ‘एफडी एक ही तारीख पर पूरी हों तो एक साथ मोटा पैसा आ जाता है।’

यह तरीका उनके लिए अच्छा है, जिन्हें किसी खास वित्तीय मकसद से खास वक्त पर एकमुश्त रकम चाहिए। मान लीजिए कि आपका बच्चा तीन साल में कॉलेज में दाखिला लेगा यानी तीन साल बाद आपको काफी रकम की जरूरत होगी तो आप यह तरीका अपना सकते हैं।

मगर शेट्टी आगाह करते हैं कि इसमें अलग-अलग ब्याज दरों का फायदा उठाना मुश्किल होता है। अगर इनके मैच्योर होने से ठीक पहले ब्याज दर घट जाएं तो मिली रकम की फिर एफडी कराने पर अच्छा रिटर्न नहीं मिलता। जीनल समझाती हैं कि एक साथ एफडी पूरी होने पर कर का बोझ भी बढ़ सकता है।

ऐसे में सबसे कारगर लैडरिंग की रणनीति हो सकती है, जिसमें थोड़े-थोड़े समय के अंतर पर कई एफडी कराई जाती हैं। इनमें कुछ कम, कुछ मझोली और कुछ बड़ी मियाद की होती हैं। मिसाल के तौर पर 5 लाख रुपये हाथ में हों तो 1 से 5 साल मियाद वाली 1-1 लाख रुपये की कई एफडी कराई जा सकती हैं।

गुप्ता समझाते हैं, ‘इससे पक्का होता है कि आपका निवेश मैच्योर होने की तारीख अलग-अलग रहेगी। लंबी अवधि की एफडी में एकमुश्त रकम लगाने के मुकाबले इसमें ब्याज दर का जोखिम कम रहता है।’

इसमें निवेशक ब्याज दर एकदम नीचे से बिल्कुल ऊपर जाने तक के चक्र में अलग-अलग मौकों पर एफडी कराते हुए कुल जमा अच्छा रिटर्न हासिल कर सकता है। साथ ही नियमित अंतराल पर नकदी भी हाथ में आ जाती है। चूंकि एफडी अलग-अलग समय पर पूरी होती है, इसलिए कम ब्याज दर पर दोबारा निवेश करने का जोखिम भी नहीं रहता।

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First Published - February 25, 2024 | 9:40 PM IST

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