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अमेरिका-केंद्रित फंडों की बढ़ रही है लोकप्रियता

Last Updated- December 11, 2022 | 10:24 PM IST

कैलेंडर वर्ष 2021 में, अंतरराष्ट्रीय फंड सुर्खियों में रहे, क्योंकि निवेशकों फिर से उन योजनाओं पर अपना ध्यान बरकरार रखा जिन्होंने वैश्विक शेयरों या सूचकांकों में निवेश किया है। अमेरिकी बाजारों और जिंस क्षेत्रों पर आधारित योजनाओं ने पिछले एक साल में मजबूत प्रतिफल दिया है। 
आदित्य बिड़ला सनलाइफ कमोडिटीज इक्विटीज फंड-ग्लोबल एग्री प्लान, मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक 100 एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ), और मोतीलाल ओसवाल एसऐंडपी 500 इंडेक्स फंड जैसे फंडों ने पिछले एक साल में 30 प्रतिशत से ज्यादा का प्रतिफल दिया है।

मोतीलाल ओसवाल ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी में उपाध्यक्ष (शोध-पैसिव फंड) महावीर कासवा ने कहा, ‘भारतीय निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो का 99 प्रतिशत निवेश रखकर घरेलू बाजारों  मजबूत घरेलू धारणा को प्रदर्शित किया है। हालांकि मौजूदा रुझान से पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय निवेश में काफी हद तक तेजी आई है। इसके अलावा, पूंजी का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से जुड़े फंडों में लगा है, और यह खासकर भारतीय इक्विटी के मुकाबले अमेरिकी बाजार द्वारा मजबूत प्रदर्शन की वजह से संभव हुआ है।’

चूंकि अमेरिकी फंडों से प्रतिफल लगातार बढ़ा है, इसलिए निवेशक इनकी ओर आकर्षित हुए हैं। पिछले एक साल में अपनी एसयूएम में तेजी दर्ज करने वाले फंडों में मुख्य तौर पर अमेरिका-केंद्रित फंड शामिल थे। पिछले एक साल में, मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक 100 ईटीएफ की एयूएम बढ़कर नवंबर 2021 में 6,099.73 करोड़ रुपये हो गईं, जबकि नवंबर 2020 में यह आंकड़ा 2,337.31 करोड़ रुपये था।
भले ही भारतीय इक्विटी में पिछले एक साल में अच्छी तेजी आई है, लेकिन ऐसे निवेशकों की अच्छी तादाद है जो गूगल, फेसबुक और नेटफ्लिक्स जैसी कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं।

बीएसई के सेंसेक्स सूचकांक ने पिछले एक साल में 22 प्रतिशत का प्रतिफल दिया है। अमेरिका-केंद्रित फंडों के अलावा, वैश्विक बाजारों निवेश करने वाले फंडों ने भी पिछले साल में अच्छा प्रदर्शन किया है। अंतरराष्ट्रीय फंडों की सफलता से कई फंडों को पिछले साल में ऐसे फंडों से बाहर निकलने में मदद मिली। 

First Published - January 5, 2022 | 11:26 PM IST

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