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फिर बढ़ेगा ‘मालाबार परोटा’ का स्वाद, केरल हाईकोर्ट ने 18 की जगह 5 फीसदी GST लगाने का दिया आदेश

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सुनवाई में सरकार ने अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग (AAR) और अपीलेट अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग (एएएआर) के आदेशों का हवाला देकर मालाबार पराठे पर 18 फीसदी की दर को लगाने के लिए कहा था।

Last Updated- April 17, 2024 | 3:18 PM IST
Malabar Porotta

GST को लेकर केरल हाईकोर्ट में आए एक अनोखे मामले में अदालत ने आज अपना फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट के मालाबार ‘पराठा’ पर जीएसटी कम करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि मालाबार पराठा ‘ब्रेड (रोटी)’ के बराबर है और इस तरह ले इसे टैक्सेशन के अंतर्गत लाने के लिए हैडिंग 1905 के तहत केटेगराएज किया जाना चाहिए।

केरल हाई कोर्ट ने तय किया कि ‘क्लासिक मालाबार पराठा’ और ‘होल व्हीट मालाबार पराठा’ दोनों पर 18 फीसदी की जगह कम करके 5 फीसदी की जीएसटी दर से टैक्स लगाया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि दोनों ही HSN code 1905 के तहत लिस्टेड आइटम्स (जैसे कि ब्रेड) के समान हैं।

बता दें, सुनवाई में सरकार ने अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग (AAR) और अपीलेट अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग (एएएआर) के आदेशों का हवाला देकर मालाबार पराठे पर 18 फीसदी की दर को लगाने के लिए कहा था। AAR और AAAR ने पराठे पर 18 फीसदी जीएसटी निर्धारित किया था।

क्या है पूरा मामला-
इस अनोखे मामले की शुरुआत कैसी हुई और पूरा मामला आखिर है क्या आइए जानते हैं इसकी डिटेल-

साल 2022 में गुजरात के अग्रिम निर्णय अपीलीय प्राधिकरण (एएएआर) ने एक आदेश में कहा कि पराठे बनाने में भले ही गेहूं के आटे का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन यह सामान्य रोटी की तरह नहीं है और 5 प्रतिशत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) वाले उत्पादों की श्रेणी में नहीं आता। इसपर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।

ये भी पढ़ें- GST Update: सरकार ने पान मसाला, गुटखा कंपनियों के लिए स्पेशल रजिस्ट्रेशन, रिटर्न फाइलिंग की समय सीमा बढ़ाई

इसके बाद अब फ्रोजन फूड बनाने वाली कंपनी असेसी मॉडर्न फूड एंटरप्राइजेज प्रा. लिमिटेड, ‘क्लासिक मालाबार पराठा’ और ‘होल व्हीट मालाबार पराठा’ की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई करती है। कंपनी ने इन दोनो प्रोडक्ट्स को ‘ब्रेड’ के रूप में माना जा सकता है या नहीं, इस पर प्राधिकरण से सफाई मांगी थी।

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कंपनी ने एक रिट दायर की थी जिसमें केरल हाई कोर्ट ने इस टिप्पणी के माध्यम से इजाजत दी थी कि हार्मोनाइज्ड सिस्टम (GRI) के General Rules of Interpretation के नियम 4 के अनुसार, जिन वस्तुओं को नियम I से III के अनुसार बांटा नहीं किया जा सकता है, उन्हें उस सामान के लिए उपयुक्त हैडिंग के तहत बांटा जाएगा जिसमें समानता है।

इस तरह से इस प्रोडक्टपर 5 फीसदी के अंदर आने का रास्ता साफ हो गया। हाई कोर्ट ने HSN sub-heading 1905 के नोट्स पर भी कहा कि इस हैडिंग में प्रोडक्ट्स के सबसे आम इंग्रीडिएंट्स अनाज का आटा, पत्तियां और नमक हैं। लेकिन उनमें अन्य इंग्रीडिएंट्स भी शामिल हो सकते हैं, जो फरमेंटशन की सुविधा देते हैं और विशेषताओं में सुधार करते हैं।

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First Published - April 17, 2024 | 2:43 PM IST

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