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दबाव के बाद मजबूत दिख रही सन फार्मा

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टैरिफ संबंधित अनिश्चितताओं के बीच, सन जैसी कंपनियां अमेरिका में दबाव से दूर बनी रह सकती हैं, क्योंकि वहां नाइश सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा कम है।

Last Updated- April 13, 2025 | 10:49 PM IST
Sun Pharma Q1FY26 Results
बिजनेस स्ट्रेंडर्ड हिन्दी

वर्ष की शुरुआत से मार्च के निचले स्तर तक 17 प्रतिशत गिरने के बाद देश की सबसे बड़ी दवा कंपनी सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज के शेयर ने अपने लगभग आधे नुकसान की भरपाई कर ली है। ताजा अधिग्रहणों, हेयर लॉस संबंधित दवा लेकसेल्वी में अदालत के अनुकूल निर्णय, स्पेशियल्टी पोर्टफोलियो की वजह से प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त और विविधीकृत वैश्विक पहुंच ने शेयर में आई गिरावट की भरपाई करने में
मदद की।

जनवरी के बाद से इस शेयर में आई गिरावट की मुख्य वजह से सुस्त अमेरिकी वृद्धि, बढ़ते शोध एवं विकास (आरऐंडडी) खर्च, यूएसएफडीए से जुड़ी नियामकीय चुनौतियां और जेनेरिक सेगमेंट में मूल्य निर्धारण संबंधित दबाव है। फिर भी, ज्यादातर ब्रोकरेज कंपनी के दीर्घावधि परिदृश्य पर उत्साहित बने हुए हैं। इस शेयर को हाल में बढ़ावा लेक्सेलवी पर सन के पक्ष में एक अमेरिकी अदालत के फैसले से मिला। अदालत ने प्रारंभिक निषेधाज्ञा को हटा दिया, जिससे दवा के संभावित लॉन्च का रास्ता साफ हो गया, जो 40 करोड़ डॉलर के बाजार की जरूरत पूरी करेगी।

हालांकि कोई भी नई पेशकश चुनौतीपूर्ण होगी और उससे अल्पावधि में बिक्री एवं आय को ज्यादा फायदा होने की संभावना नहीं है, लेकिन एमके रिसर्च का मानना है कि लेक्सेल्वी का अवसर 2029-30 तक प्लाक सोरायसिस की दवा इलुम्या के स्तर तक पहुंच जाएगा (जिसकी अनुमानित वैश्विक बिक्री 50 करोड़ डॉलर से अधिक होगी)। अन्य कारक अमेरिका स्थित फास्ट-फॉलोअर कंपनी चेकपॉइंट थेरेप्यूटिक्स का अधिग्रहण है। इम्यूनोथेरेपी और संबंधित ऑन्कोलॉजी फर्म को 35.5 करोड़ डॉलर में अधिग्रहीत किया गया था, जिसमें 6.1 करोड़ डॉलर के भविष्य से जुड़े अवसर शामिल थे। अग्रिम भुगतान 7 मार्च को चेकपॉइंट के बंद भाव के मुकाबले 66 प्रतिशत वृद्धि पर किया गया।

इस सौदे से सन के वैश्विक डर्मेटोलॉजी-केंद्रित स्पेशियलिटी पोर्टफोलियो का विस्तार हुआ है। इसके साथ ही एफडीए द्वारा स्वीकृत दवा, अनलॉक्सिक्ट भी आई है, जिसका उपयोग वयस्कों में मेटास्टेटिक त्वचा कैंसर के इलाज के लिए किया जाता है, यह एक ऐसा सेगमेंट है जिसका अमेरिकी बाजार आकार 1 अरब डॉलर है। ऊंची कीमत के बावजूद, इलारा सिक्योरिटीज को अधिग्रहण में अच्छी संभावना दिख रही है। ब्रोकरेज के विश्लेषक बीनो पाथिपरम्पिल ने कहा, ‘हमारा विश्लेषण से पता चलता है कि अनलॉक्सिक्ट अमेरिका में 20 करोड़ डॉलर की सालाना बिक्री तक पहुंच सकती है। चूंकि सन के पास पहले से ही डर्मेटोलॉजी से संबंधित बिक्री टीम है, इसलिए दवा के विपणन की अतिरिक्त लागत कम आएगी।’

भविष्य को ध्यान में रखते हुए बाजार की नजर अमेरिकी व्यवसाय में सुधार के संकेतों पर लगी रहेगी। अमेरिकी व्यवसाय में राजस्व अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान सालाना आधार पर 1 फीसदी और तिमाही आधार पर 8 फीसदी घट गया था। यह गिरावट कैंसर की दवा रेवलिमिड के जेनेरिक वर्जन की कम बिक्री और जेनेरिक दवाओं में चल रहे मूल्य संबंधित दबाव की वजह से आई। ब्रोकर इस खराब प्रदर्शन को विनिर्माण मुद्दों (चेतावनी पत्र और आयात अलर्ट सहित) से जोड़कर देख रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि इसे स्थिर होने में कुछ तिमाहियों का वक्त लग सकता है।

एचएसबीसी के विश्लेषक दमयंती केराई और गौरांग सकारे सन के स्पेशियल्टी ऑर्डर प्रवाह पर सकारात्मक बने हुए हैं, जिसमें इलुम्या (सोरायसिस), विनलेवी (एक्ने) और सेक्वा (ड्राई आईज) शामिल हैं। हालांकि कुछ चिकित्सकीय परीक्षणों में विलंब देखा गया है, लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि सन अपने स्पेशलियल्टी पोर्टफोलियो के लिए आरऐंडडी में निवेश को प्राथमिकता देना जारी रखेगी। एचएसबीसी ने इस शेयर के लिए 2,000 रुपये के कीमत लक्ष्य के साथ ‘खरीदें’ रेटिंग दी है।

कोटक रिसर्च ने इस शेयर के लिए ‘एक्यूमलेट’ रेटिंग बनाए रखी है। क्लीनिकल प्रवाह बढ़ाने के लिए ऊंचे आरऐंडडी खर्च के बावजूद विश्लेषक अलंकार गरुडे ने 2023-24 से 2026-27 के दौरान परिचालन मार्जिन 200 आधार अंक सुधरकर 28.8 फीसदी होने का अनुमान जताया है, क्योंकि उसे मजबूत स्पेशियल्टी मार्जिन और बेहतर घरेलू उत्पादकता से मदद मिलेगी।

टैरिफ संबंधित अनिश्चितताओं के बीच, सन जैसी कंपनियां अमेरिका में दबाव से दूर बनी रह सकती हैं, क्योंकि वहां नाइश सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा कम है। सन के अमेरिकी राजस्व में स्पेशलियल्टी उत्पादों का हिस्सा करीब 55-57 प्रतिशत है। मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा भारत और दूसरे बाजारों से भी आता है, जो अमेरिका की तरफ से संभावित नुकसान को कम करने में मदद करता है।

अमेरिकी बाजार के विपरीत, सन के घरेलू फार्मा व्यवसाय में तेजी से विकास हो रहा है। उसने तीसरी तिमाही में 14 फीसदी की वृद्धि दर्ज की और कई प्रमुख थेरेपी खंडों में बाजार के मुकाबले ज्यादा वृद्धि देखी गई। ब्रोकरों को बिक्री वृद्धि की वजह से यह रुझान भारतीय फॉर्मूलेशन सेगमेंट में बरकरार रहने की संभावना है।

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First Published - April 13, 2025 | 10:49 PM IST

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