facebookmetapixel
Advertisement
Valentine Day Pick: ₹1640 पर खरीदारी का मौका, ₹1890 तक जाएगा Tech Mahindra? ब्रोकरेज ने जताया भरोसाHUL Q3 Results: शुद्ध मुनाफा 2 गुना से ज्यादा बढ़ा, नेट सेल्स बढ़कर ₹16,441 करोड़ITR फाइल करने के बाद भी नहीं मिला रिफंड? जानिए एक्सपर्ट के अनुसार देरी की 6 मुख्य वजहेंBharat Bandh Today: आज क्या रहेगा बंद, क्या सेवाएं रहेंगी चालू? जानिए पूरी जानकारीGold-Silver Price Today: वैलेंटाइन डे से पहले सोने-चांदी के दामों में गिरावट, चेक करें आज के रेटक्या सोना-चांदी में फिर से जोरदार तेजी आएगी? Emkay Wealth की रिपोर्ट ने बढ़ाई हलचलहो गया ऐलान! 160 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड देगी फार्मा कंपनी, जान लें रिकॉर्ड डेटप्रधानमंत्री ने अमेरिका को सौंपा भारत का भविष्य: राहुल गांधीपूंजी निवेश से प्रगति की राह, 2047 लक्ष्य की ओर सरकार का कदमनिफ्टी भले रुका, लेकिन इन 3 शेयरों में आज दिख रहा 5 से 8% तक का अपसाइड!

SME लिस्टिंग के नियम होंगे सख्त, UPSI की परिभाषा में होगा विस्तार!

Advertisement

बाजार नियामक व्यापार को आसान बनाने के लिए अन्य कई बदलाव भी कर सकता है।

Last Updated- December 13, 2024 | 1:00 PM IST
SEBI

सेबी छोटे और मझोले उद्यमों (SME) के आईपीओ के नियम सख्त करने और अप्रकाशित प्राइस सेंसिटिव इंफॉर्मेशन (UPSI) की परिभाषा को व्यापक बनाने की योजना बना रहा है। सूत्रों के मुताबिक, ये फैसले 18 दिसंबर को होने वाली सेबी की बोर्ड बैठक में लिए जा सकते हैं। बाजार नियामक व्यापार को आसान बनाने के लिए अन्य कई बदलाव भी कर सकता है।

SME IPO में निवेश सीमा बढ़ेगी

SME लिस्टिंग नियमों को सख्त करने का कदम शेयर बाजार में धांधली और गलत प्रैक्टिस की चिंताओं के बीच उठाया जा रहा है। सेबी SME IPO में निवेश की न्यूनतम सीमा को बढ़ाकर 2 लाख रुपये या 4 लाख रुपये कर सकता है। इसके अलावा, ऑफर फॉर सेल (OFS) की सीमा को कुल इश्यू साइज के 20% तक सीमित किया जा सकता है।

सेबी इश्यू प्रोसिड्स के उपयोग पर निगरानी के लिए मॉनिटरिंग एजेंसियों की नियुक्ति को अनिवार्य कर सकता है। साथ ही, प्रमोटर्स के लिए लॉक-इन की शर्तें और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं।

SME के लिए नए नियम क्यों?

सेबी के ये कदम ऐसे समय में उठाए जा रहे हैं जब SME कंपनियों द्वारा फर्जी लेनदेन, फंड डायवर्जन, और संबंधित पार्टियों के साथ सर्कुलर लेनदेन के जरिए शेयरों की कीमत बढ़ाने जैसे मामलों में कार्रवाई की गई है। इन नए नियमों का उद्देश्य SME लिस्टिंग में पारदर्शिता बढ़ाना और निवेशकों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है।

UPSI के दायरे में क्या होगा शामिल?

सेबी प्रमोटर एग्रीमेंट्स, डीलिस्टिंग, फंड जुटाने की गतिविधियां, प्रमोटर्स या प्रमुख अधिकारियों द्वारा धोखाधड़ी या डिफॉल्ट, लोन पुनर्गठन, कानूनी कार्रवाई और अन्य अपडेट को प्राइस-सेंसिटिव जानकारी की कैटेगरी में शामिल कर सकता है। इन संशोधनों का उद्देश्य इनसाइडर ट्रेडिंग (PIT) नियमों के तहत UPSI की परिभाषा को विस्तृत करना है।

पिछले साल SEBI ने इन बदलावों का प्रस्ताव रखा था, लेकिन सलाह-मशविरा के बाद पहले ट्रेडिंग प्लान में लचीलापन देने का फैसला किया। सेबी ने देखा कि कई लिस्टेड कंपनियां कानून का पालन केवल “शब्दों के अनुसार” कर रही थीं, न कि “भावना के अनुसार”।

अन्य संभावित बदलाव

मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs): स्टॉक एक्सचेंज, क्लीयरिंग कॉरपोरेशन और डिपॉजिटरी जैसी संस्थाओं के बोर्ड में पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर्स की नियुक्ति के नियमों की समीक्षा की जा सकती है।

REITs और InVITs के लिए आसान नियम: रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs), इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InVITs), और छोटे-मझोले REITs के लिए नियमों में ढील देने पर विचार हो सकता है।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब सेबी चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच के कार्यकाल के विस्तार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कांग्रेस पार्टी और अमेरिका स्थित हिन्डनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए आरोपों के चलते पुरी बुच विवादों के केंद्र में रही हैं। उन्होंने इन सभी आरोपों को खारिज किया है।

Advertisement
First Published - December 12, 2024 | 8:07 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement