facebookmetapixel
Advertisement
Gold silver price today: मुनाफावसूली से सोना ₹1,117 टूटा, चांदी ₹1,861 लुढ़कीAI की दौड़ से Airtel-Jio को बड़ा फायदा! डेटा सेंटर और क्लाउड से खुल सकते हैं कमाई के नए रास्तेOpening Bell: सेंसेक्स 300 अंक टूटा, निफ्टी 24,300 के करीब; टाटा ग्रुप के शेयरों में मिला-जुला कारोबारकच्चे तेल में बड़ी गिरावट के बाद आज कैसी है चाल? ब्रेंट 87 डॉलर के नीचेUS में H-1B वीजा का खेल बदला! भारतीय IT कंपनियों ने नए आवेदन से बनाई दूरी, 38.5% गिर गए रजिस्ट्रेशनअनलिमिटेड डेटा का दौर होगा खत्म? ज्यादा डेटा के लिए ज्यादा चार्ज क्यों चाहती हैं टेलीकॉम कंपनियांStocks to Watch Today: SBI से L&T तक, इन 10 शेयरों में आज दिख सकता है बड़ा एक्शनचंद्रशेखरन के बाद टीसीएस के सामने नेतृत्व की नई चुनौती, टाटा समूह के साथ तालमेल पर भी नजरउदारीकरण के 35 साल: ‘एशिया के डेट्रॉइट’ से चेन्नई ने कैसे तय किया दुनिया के ऑटो हब तक का सफरअटकी चंद्रशेखरन के वारिस की तलाश, उत्तराधिकारी चुनने वाली चयन समिति गठित करने में लगेगा वक्त; AGM पर भी संशय

SME लिस्टिंग के नियम होंगे सख्त, UPSI की परिभाषा में होगा विस्तार!

Advertisement

बाजार नियामक व्यापार को आसान बनाने के लिए अन्य कई बदलाव भी कर सकता है।

Last Updated- December 13, 2024 | 1:00 PM IST
SEBI

सेबी छोटे और मझोले उद्यमों (SME) के आईपीओ के नियम सख्त करने और अप्रकाशित प्राइस सेंसिटिव इंफॉर्मेशन (UPSI) की परिभाषा को व्यापक बनाने की योजना बना रहा है। सूत्रों के मुताबिक, ये फैसले 18 दिसंबर को होने वाली सेबी की बोर्ड बैठक में लिए जा सकते हैं। बाजार नियामक व्यापार को आसान बनाने के लिए अन्य कई बदलाव भी कर सकता है।

SME IPO में निवेश सीमा बढ़ेगी

SME लिस्टिंग नियमों को सख्त करने का कदम शेयर बाजार में धांधली और गलत प्रैक्टिस की चिंताओं के बीच उठाया जा रहा है। सेबी SME IPO में निवेश की न्यूनतम सीमा को बढ़ाकर 2 लाख रुपये या 4 लाख रुपये कर सकता है। इसके अलावा, ऑफर फॉर सेल (OFS) की सीमा को कुल इश्यू साइज के 20% तक सीमित किया जा सकता है।

सेबी इश्यू प्रोसिड्स के उपयोग पर निगरानी के लिए मॉनिटरिंग एजेंसियों की नियुक्ति को अनिवार्य कर सकता है। साथ ही, प्रमोटर्स के लिए लॉक-इन की शर्तें और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं।

SME के लिए नए नियम क्यों?

सेबी के ये कदम ऐसे समय में उठाए जा रहे हैं जब SME कंपनियों द्वारा फर्जी लेनदेन, फंड डायवर्जन, और संबंधित पार्टियों के साथ सर्कुलर लेनदेन के जरिए शेयरों की कीमत बढ़ाने जैसे मामलों में कार्रवाई की गई है। इन नए नियमों का उद्देश्य SME लिस्टिंग में पारदर्शिता बढ़ाना और निवेशकों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है।

UPSI के दायरे में क्या होगा शामिल?

सेबी प्रमोटर एग्रीमेंट्स, डीलिस्टिंग, फंड जुटाने की गतिविधियां, प्रमोटर्स या प्रमुख अधिकारियों द्वारा धोखाधड़ी या डिफॉल्ट, लोन पुनर्गठन, कानूनी कार्रवाई और अन्य अपडेट को प्राइस-सेंसिटिव जानकारी की कैटेगरी में शामिल कर सकता है। इन संशोधनों का उद्देश्य इनसाइडर ट्रेडिंग (PIT) नियमों के तहत UPSI की परिभाषा को विस्तृत करना है।

पिछले साल SEBI ने इन बदलावों का प्रस्ताव रखा था, लेकिन सलाह-मशविरा के बाद पहले ट्रेडिंग प्लान में लचीलापन देने का फैसला किया। सेबी ने देखा कि कई लिस्टेड कंपनियां कानून का पालन केवल “शब्दों के अनुसार” कर रही थीं, न कि “भावना के अनुसार”।

अन्य संभावित बदलाव

मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs): स्टॉक एक्सचेंज, क्लीयरिंग कॉरपोरेशन और डिपॉजिटरी जैसी संस्थाओं के बोर्ड में पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर्स की नियुक्ति के नियमों की समीक्षा की जा सकती है।

REITs और InVITs के लिए आसान नियम: रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs), इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InVITs), और छोटे-मझोले REITs के लिए नियमों में ढील देने पर विचार हो सकता है।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब सेबी चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच के कार्यकाल के विस्तार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कांग्रेस पार्टी और अमेरिका स्थित हिन्डनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए आरोपों के चलते पुरी बुच विवादों के केंद्र में रही हैं। उन्होंने इन सभी आरोपों को खारिज किया है।

Advertisement
First Published - December 12, 2024 | 8:07 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement