निवेशकों को बेंचमार्क भारत सरकार के 10-वर्षीय बॉन्ड पर प्रतिफल में और इजाफे के लिहाज से तैयार रहना चाहिए, क्योंकि इनका विस्तार ऐतिहासिक औसत से कम बना हुआ है। भारत सरकार के 10 वर्षीय बॉन्ड पर प्रतिफल फिलहाल 10 वर्षीय यूएस ट्रेजरी बॉन्ड पर प्रतिफल के मुकाबले 491 आधार अंक अधिक है। यह जनवरी 2010 के बाद से 531 आधार अंकों के औसत प्रतिफल विस्तार से 40 आधार अंक कम है।
शुक्रवार को भारतीय बॉन्ड बाजार 6.753 प्रतिशत के प्रतिफल पर बंद हुआ, जो गुरुवार के 6.746 प्रतिशत से कुछ अधिक है। अमेरिकी सरकार के 10 वर्षीय बॉन्ड पर प्रतिफल शुक्रवार करीब 1.84 प्रतिशत रहा, जबकि एक दिन पहले यह 1.81 प्रतिशत था।
विश्लेषकों के अनुसार, यह अंतर भारत में बॉन्ड प्रतिफल में और ज्यादा इजाफे के लिए जगह बना रहा है। जेएम फाइनैंस इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के प्रबंध निदेशक और मुख्य रणनीतिकार धनंजय सिन्हा का कहना है कि बॉन्ड और मुद्रा बाजारों में बढ़ती अस्थिरता तथा भारत जैसे उभरते बाजारों में अधिक जोखिम प्रीमियम के मद्देनजर अधिकता वाले पक्ष की ओर झुकाव होना चाहिए। उन्हें इस बात की उम्मीद है कि भारत में 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल मौजूदा कैलेंडर वर्ष के अंत तक बढ़कर लगभग 7.5 प्रतिशत हो जाएगा, जो वर्तमान में लगभग 6.75 प्रतिशत है और जुलाई 2020 में कोविड-19 के बाद 5.8 प्रतिशत कम है।
भारत सरकार के 10 वर्षीय बॉन्ड पर अधिक प्रतिफल से ब्याज दरों को बढ़ावा मिलेगा और इसका असर इक्विटी सहित परिसंपत्ति की कीमतों पर असर पड़ेगा। ट्रेजरी बॉन्ड जैसी जोखिम-मुक्त परिसंपत्ति पर अधिक ब्याज दर इक्विटी, रियल एस्टेट और जिंसों जैसी जोखिम वाली परिसंपत्तियों के मामले में कम मूल्य में तब्दील हो जाती है।
भारत और अमेरिका के 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड के बीच प्रतिफल विस्तार में ऐतिहासिक प्रवृत्ति के मद्देनजर ऐसा अकारण नहीं है। मार्च और अप्रैल 2020 में यह विस्तार बढ़कर करीब 550 आधार अंक हो गया था तथा इसके बाद यह संकुचित होकर 440 आधार अंक रह गया, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और भारतीय रिजर्व बैंक ने बाजार में रिकॉर्ड तरलता से बाढ़ ला दी थी। इससे पहले इस प्रतिफल विस्तार ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा मौद्रिक कड़ाई की स्थिति में व्यापक होने की प्रवृत्ति दिखाई थी। उदाहरण के लिए जनवरी 2010 में यह प्रतिफल विस्तार 400 आधार अंकों से बढ़कर मई 2012 तक 700 आधार अंकों के अधिक स्तर पर पहुंच गया था, क्योंकि फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति को कड़ा कर दिया था, जिससे इस अवधि के दौरान इसकी बैलेंस शीट में कुछ गिरावट आई थी। फेड ने जुलाई 2011 में अपनी बैलेंस शीट को 2.9 लाख करोड़ डॉलर के तत्कालीन शीर्ष स्तर से कम करके अक्टूबर 2012 के अंत तक लगभग 2.8 लाख करोड़ डॉलर कर दिया था। अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस साल मार्च से एक बार फिर अपनी बैलेंस शीट में कमी करने की योजना बना रहा है। इससे उभरते बाजारों में डॉलर का प्रवाह कम हो जाएगा, जिससे दुनिया भर में बॉन्ड प्रतिफल अधिक हो जाएगा।