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Stock Market: PM मोदी के रहने की आस से शेयर बाजार को आई सांस

बाजार में तेजी से पूंजीकरण में 17 लाख करोड़ रुपये की भरपाई हुई क्योंकि एक दिन पहले ही इसमें 31 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई थी।

Last Updated- June 05, 2024 | 11:12 PM IST
FII in India

चुनाव नतीजे के दिन मंगलवार को बाजार में भारी गिरावट आई थी मगर निवर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिए सहज बहुमत जुटाने से बाजार ने आज अच्छी वापसी करते हुए आधे नुकसान की भरपाई कर ली। मंगलवार को उथलपुथल के बाद आज लिवाली और शॉर्ट कवरिंग से भी बाजार में तेजी आई।

निफ्टी 746 अंक या 3.4 फीसदी चढ़कर 22,620 पर बंद हुआ, जो 1 फरवरी, 2020 के बाद सूचकांक की एक दिन की सबसे बड़ी छलांग है। सेंसेक्स 2,303 अंक या 3.2 फीसदी की बढ़त के साथ 74,382 पर बंद हुआ। सोमवार को एक्जिट पोल आने के बाद से यह सूचकांक की सबसे बड़ी उछाल है।

हालांकि मंगलवार को चुनाव नतीजों दिन भाजपा के बहुमत से दूर रहने पर सेंसेक्स और निफ्टी 6 फीसदी टूट गया था। बाजार में उठापटक का संकेत देने वाला इंडिया वीआईएक्स 329.4 फीसदी गिरकर 18.8 फीसदी रह गया।

बाजार के भागीदारों ने कहा कि बाजार में उथलपुथल चुनावी नतीजों और सरकार के गठन को लेकर अनिश्चितता के कारण थी। उनका कहना था कि नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने को लेकर आगे कोई नकारात्मक आश्चर्य नहीं हुआ तो उठापटक कम हो सकती है।

भाजपा की सहयोगी दलों तेलुगुदेशम (तेदेपा) और जनता दल (यूनाइटेड) ने आज सरकार बनाने के लिए समर्थन दिया है। इससे निवेशकों की चिंता थोड़ी दूर हुई है। मगर राजनीतिक रूप से कठिन सुधारात्मक उपाय करने में सरकार की क्षमता को लेकर चिंता अभी भी बनी हुई है।

बाजार में तेजी से पूंजीकरण में 17 लाख करोड़ रुपये की भरपाई हुई क्योंकि एक दिन पहले ही इसमें 31 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई थी। बाजार के विश्लेषकों का तर्क है कि चुनाव के नतीजों को देखते हुए लगता है कि खास तौर पर पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रिक यूटिलिटी और सर्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को लेकर निवेश रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज में प्रबंध निदेशक और सह-प्रमुख संजीव प्रसाद ने एक नोट में लिखा है, ‘2024 के चुनाव परिणाम निवेशकों (संस्थातग और गैर-संस्थागत) को बयानों से ज्यादा आंकड़ों पर ध्यान देने पर मजबूर कर सकता है। हमारी नजर खुदरा निवेशकों के रुख में किसी तरह के बदलाव पर भी होगी क्योंकि बाजार में निवेश बढ़ाने में इनका भी अहम योगदान है।’

First Published - June 5, 2024 | 10:46 PM IST

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