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NSE में IPO की उम्मीद से खुदरा निवेशकों की संख्या चार गुना बढ़ी, हिस्सेदारी 11.81% पर पहुंची

जून 2025 तक एक्सचेंज का सार्वजनिक शेयरधारक आधार 1.57 लाख तक बढ़ गया है जो मार्च के अंत से चार गुना की वृद्धि है।

Last Updated- July 24, 2025 | 9:41 PM IST
NSE
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बहु प्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) की उम्मीद से नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में खुदरा निवेशकों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा हो रहा है। जून 2025 तक एक्सचेंज का सार्वजनिक शेयरधारक आधार 1.57 लाख तक बढ़ गया है जो मार्च के अंत से चार गुना की वृद्धि है।

खुदरा निवेशक इस दौड़ में सबसे आगे हैं। 2 लाख रुपये तक की शेयर पूंजी वाले व्यक्ति को खुदरा निवेशक माना जाता है। मार्च में इनकी संख्या करीब 34,000 थी जो बढ़कर जून तक 1.46 लाख हो गई। इस तरह देश के सबसे बड़े एक्सचेंज में उनकी सामूहिक हिस्सेदारी 9.89 फीसदी से बढ़कर 11.81 फीसदी पर पहुंच गई।

यह उछाल एक महत्वपूर्ण परिचालन बदलाव के बाद आई है : 24 मार्च को एनएसई की अंतरराष्ट्रीय प्रतिभूति पहचान संख्या (आईएसआईएन) का सक्रिय होना। इस अनूठे वैश्विक कोड ने शेयर हस्तांतरण प्रक्रिया को सहज कर दिया है जिससे लेन-देन का समय महीनों से घटकर केवल कुछ दिन रह गया है। बाजार प्रतिभागियों ने इस बात की पुष्टि की कि शेयर अब स्वतंत्र रूप से हस्तांतरणीय हैं। क्रेता और विक्रेता दोनों का अच्छा वॉल्यूम है।

अनलिस्टेडएरीना के सह-संस्थापक अभय दोशी ने बताया, आईएसआईएन से पहले के दौर में दस्तावेज का अनुपालन बहुत जटिल था जिससे लेन-देन सीमित थे। चूंकि शेयरों का प्रभावी रूप से ‘फ्रीज ‘ खत्म हो गया था। इसलिए हमने निवेशकों की जबरदस्त मांग देखी है। इसी से शेयरधारक आधार काफ़ी बढ़ गया है। आईपीओ पर बढ़ती स्पष्टता और प्रगति ने इस भावना को और बढ़ावा दिया है।

बढ़ती मांग के कारण एनएसई के गैर-सूचीबद्ध शेयरों की कीमत 2,225 रुपये प्रति शेयर हो गई है जिससे एक्सचेंज का मूल्यांकन करीब 5.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह चालू वित्त वर्ष की शुरुआत के करीब 1,600 रुपये से काफी ज्यादा है। 

अर्थशास्त्री और बाजार विशेषज्ञ उदय तारडालकर ने कहा, यह वृद्धि इस एक्सचेंज में खुदरा के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है, जो उनके लिए धन सृजन का अवसर है। हम लंबी अवधि के कुछ धनाढ्य निवेशकों (एचएनआई) की हिस्सेदारी कम होते देख रहे हैं। 

खुदरा स्वामित्व में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन 2 लाख रुपये से ज्यादा शेयर पूंजी वाले व्यक्तिगत सार्वजनिक शेयरधारकों की हिस्सेदारी थोड़ी घटकर 9.52 फीसदी (9.64 फीसदी से) रह गई। मार्च के बाद से विदेशी स्वामित्व में भी लगभग एक फीसदी की गिरावट आई है।

एनएसई द्वारा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ काफी समय से लंबित को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों में 1,388 करोड़ रुपये के समझौते के करीब पहुंचने के संकेतों के बाद आईपीओ की उम्मीदें बढ़ गई हैं। सूत्रों का कहना है कि सेबी अगले दो महीनों के भीतर विवरणिका मसौदा (डीआरएचपी) दाखिल करने के लिए अहम अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी कर सकता है।

पूंजी बाजार पर आईएमसी टास्क फोर्स के अध्यक्ष और एमसीक्यूब के प्रबंध भागीदार मृगांक परांजपे ने कहा, स्वामित्व के लिए निवेशकों की मजबूत मांग लिस्टिंग के लिए आकर्षक मामला बनाती है। उन्होंने कहा, लिस्टिंग से सार्वजनिक मूल्य निर्धारण बेहतर होगा और मूल्यांकन पर वर्तमान स्पष्टता की कमी दूर होगी।

एनएसई के अग्रणी शेयरधारकों में जीवन बीमा निगम (एलआईसी), एसबीआई कैपिटल मार्केट्स, अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस), भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड और प्रमुख निवेशक राधाकिशन दमानी शामिल हैं।

First Published - July 24, 2025 | 9:41 PM IST

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