विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने कैलेंडर वर्ष 2025 में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), एफएमसीजी और बिजली क्षेत्र के शेयरों से सबसे ज्यादा निवेश निकासी की। इस साल में शुद्ध रूप से रिकॉर्ड निकासी हुई। विदेशी निवेशकों ने शुद्ध रूप से 74,698 करोड़ रुपये के आईटी शेयर, 36,786 करोड़ रुपये के एफएमसीजी शेयर और 26,522 करोड़ रुपये के बिजली शेयरों की बिक्री की।
वर्ष 2025 में एफपीआई की शुद्ध बिकवाली 1.7 लाख करोड़ रुपये रही, जो आंकड़े उपलब्ध होने के बाद से किसी एक कैलेंडर वर्ष में सबसे ज्यादा है। स्वास्थ्य सेवा (24,967 करोड़ रुपये), टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं (21,369 करोड़ रुपये) और उपभोक्ता सेवाएं (16,524 करोड़ रुपये) ऐसे सेक्टर रहे, जहां एफफीआई की भारी बिकवाली हुई।
इक्विनॉमिक्स के संस्थापक और अनुसंधान प्रमुख जी. चोकालिंगम ने कहा, आईटी क्षेत्र में राजस्व वृद्धि डॉलर के लिहाज से एक अंक में है। पिछले कुछ वर्षों से उच्च आधार के कारण यही स्थिति बनी हुई है। आईटी सेवाओं की बढ़ती मांग के कोई नए संकेत नहीं हैं। साथ ही, एफएमसीजी के वॉल्यूम में वृद्धि भी सुस्त रही है क्योंकि बड़ी खुदरा श्रृंखलाएं अपने स्वयं के ब्रांड नामों से कई उत्पाद बेच रही हैं। ई-कॉमर्स कंपनियां छोटे कारोबारियों को अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पाद बेचने की सुविधा दे रही हैं, जिससे सूचीबद्ध बड़ी कंपनियों को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है।
चोकालिंगम ने कहा कि बिजली कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ऊंची कीमतों के कारण हुई। उन्हें उम्मीद है कि बिकवाली के बाद बेहतर भाव के कारण यह क्षेत्र फिर से विदेशी निवेशकों की नजर में आ सकता है। उन्होंने कहा, बाजार में चौतरफा उथल-पुथल के कारण बिजली कंपनियों के शेयरों के भावों में गिरावट आई है।
इसी दौरान, विदेशी निवेशकों ने दूरसंचार क्षेत्र के शेयरों में 48,222 करोड़ रुपये और तेल एवं गैस क्षेत्र के शेयरों में 8,431 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। सेवा क्षेत्र (7,071 करोड़ रुपये), रसायन (6,017 करोड़ रुपये) और धातु एवं खनन (4,661 करोड़ रुपये) अन्य ऐसे क्षेत्र थे, जिनमें बड़ी खरीदारी देखी गई।
भारती एयरटेल में प्रवर्तकों ने शेयरों की बिक्री की जिससे शेयरों की आपूर्ति में वृद्धि हुई और टैरिफ में बढ़ोतरी का लाभ हुआ। इन वजह से दूरसंचार शेयरों में होल्डिंग में इजाफा हुआ। बीएनपी पारिबा के भारत इक्विटी अनुसंधान प्रमुख कुणाल वोरा ने अपनी भारत रणनीति रिपोर्ट में कहा, निवेशक मानते हैं कि इस क्षेत्र में पूंजीगत व्यय में तीव्रता में कमी के साथ-साथ स्वस्थ एबिटा वृद्धि प्रदान करने की क्षमता है। एयरटेल और रिलायंस की सालाना वृद्धि में टैरिफ बढ़ोतरी के लाभ नजर आए हैं।
कैलेंडर वर्ष 2025 के अंत में, एफपीआई का वित्तीय सेवा शेयरों में सबसे अधिक सेक्टर आवंटन 31.8 फीसदी था। इसके बाद तेल और गैस शेयरों में 7.7 फीसदी और ऑटोमोबाइल शेयरों में 7.6 फीसदी था।
पिछले साल, विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में भारी बिकवाली की। इसका कारण निराशाजनक नतीजे और अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता थी। अगस्त में अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 50 फीसदी का दंडात्मक शुल्क लगाया और तब से व्यापार समझौते की बातचीत में कोई प्रगति नहीं हो पाई है।
सेंसेक्स और निफ्टी का डॉलर के लिहाज से रिटर्न 2025 में क्रमशः 3.8 फीसदी और 5.2 फीसदी रहा।