अमेरिका की हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर जेन स्ट्रीट पर प्रतिबंध के बावजूद जुलाई में डेरिवेटिव कारोबार में मासिक आधार पर 10 फीसदी का इजाफा हुआ और यह आठ महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच प्रॉपराइटरी और रिटेल कारोबारियों की वजह से बिक्री में तेजी आई है।
जुलाई में दोनों एक्सचेंजों का संयुक्त औसत दैनिक कारोबार (एडीटीवी) 381 लाख करोड़ रुपये रहा जो नवंबर 2024 के बाद से सबसे अधिक है। नवंबर 2024 में इस सेगमेंट में निवेशकों के अति उत्साह को नियंत्रित करने के लिए नियामकीय सख्ती की शुरुआत हुई थी। हालांकि यह अभी भी सितंबर 2024 के 537 लाख करोड़ रुपये के ऊंचे स्तर से काफी नीचे है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कारोबार में बढ़ोतरी के संकेत हैं। यह उछाल इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि जेन स्ट्रीट की जांच के बीच ‘बड़े पैमाने पर तरलता उपलब्ध कराने वाले’ एचएफटी की गतिविधियां शायद धीमी पड़ गई हैं।
मोतीलाल ओसवाल में डेरिवेटिव ऐंड टेक्नीकल रिसर्च के प्रमुख चंदन तापड़िया ने कहा, ‘बाजार परिदृश्य में बदलाव की वजह से पिछली एक-दो तिमाहियों में बड़े पैमाने पर लर्निंग और री-लर्निंग हुईं। बाजार कारोबारियों ने बदलावों के साथ तालमेल बिठा लिया है और उनकी कारोबारी रफ्तार बढ़ रही है। हम विकास के दौर में हैं। इसलिए, ज्यादातर लीवरेज प्रोडक्ट फोकस में रह सकते हैं।’
उन्होंने कहा कि अगस्त में एक्सचेंजों द्वारा एक्सपायरी तिथियों में बदलाव की वजह से कारोबार पर पड़ने वाले प्रभाव पर नजर रखने की जरूरत होगी।
इस बीच, कैश सेगमेंट के लिए संयुक्त एडीटीवी 15 प्रतिशत घटकर 1.02 लाख करोड़ रुपये रह गया। विशेषज्ञों ने नकद बाजार के कारोबार में गिरावट का कारण शेयर कीमतों में नरमी को बताया। जुलाई में निफ्टी और सेंसेक्स 3 प्रतिशत की गिरावट का शिकार हुए जबकि व्यापक निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक क्रमशः 6.7 प्रतिशत और 4 प्रतिशत गिरे।
एनएसई मार्केट पल्स रिपोर्ट के अनुसार इक्विटी डेरिवेटिव में व्यक्तिगत निवेशकों की संख्या जून 2024 के 52 लाख के ऊंचे स्तर से घटकर लगभग 30 लाख रह गई है। ब्रोकरों का मानना है कि एडीटीवी के रुझानों को देखते हुए लगता है कि जुलाई में व्यक्तिगत निवेशकों की संख्या में वृद्धि हुई होगी।
बाजार के जानकारों का कहना है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद खुदरा निवेशकों की उल्लेखनीय भागीदारी रही है। वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में इक्विटी स्ट्रैटेजी में निदेशक क्रांति बाथिनी ने कहा, ‘पहले जब बाजार में भारी अस्थिरता होती थी तो खुदरा भागीदारी में बड़ी गिरावट आती थी। अब हम देख रहे हैं कि खुदरा कारोबारियों के नुकसान की तमाम चिंताओं के बावजूद बाजार में खुदरा भागीदारी काफी तेजी से बढ़ रही है।’