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IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ का संदिग्ध खेल, चार अधिकारी सस्पेंड

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IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में लगभग 590 करोड़ रुपये की संदिग्ध अनियमितता सामने आई, चार अधिकारी निलंबित किए गए।

Last Updated- February 22, 2026 | 2:57 PM IST
IDFC First Bank
Representative Image

निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक IDFC FIRST Bank ने चंडीगढ़ स्थित अपनी एक शाखा में लगभग 590 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय अनियमितता का खुलासा किया है। बैंक ने नियामकीय सूचना में बताया कि प्रारंभिक जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों की ओर से अनधिकृत और कथित तौर पर धोखाधड़ी से जुड़े लेनदेन सामने आए हैं। इस मामले में हरियाणा सरकार से जुड़े खातों का जिक्र किया गया है।

कैसे सामने आया मामला

बैंक के अनुसार, यह मामला तब उजागर हुआ जब Government of Haryana के एक विभाग ने अपना खाता बंद करने और उसमें मौजूद राशि को किसी अन्य बैंक में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया। प्रक्रिया के दौरान बैंक के रिकॉर्ड में दर्ज शेष राशि और विभाग द्वारा बताई गई रकम में अंतर पाया गया।

इसके बाद 18 फरवरी 2026 से हरियाणा सरकार से संबद्ध अन्य इकाइयों ने भी अपने खातों के संबंध में बैंक से संपर्क किया। इन मामलों में भी बैंक के आंकड़ों और खाताधारकों द्वारा बताए गए बैलेंस में विसंगतियां सामने आईं।

सीमित दायरे में मामला

बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह अनियमितता केवल चंडीगढ़ शाखा के माध्यम से संचालित कुछ चुनिंदा सरकारी खातों तक सीमित है। शाखा के अन्य ग्राहकों या बैंक की अन्य शाखाओं पर इसका कोई असर नहीं बताया गया है।

बैंक के अनुसार, जिन खातों में मिलान की प्रक्रिया चल रही है, उनमें कुल लगभग 590 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। अंतिम वित्तीय प्रभाव का आकलन दावों की पुष्टि, वसूली की प्रक्रिया और कानूनी कार्रवाई पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा।

कर्मचारियों पर कार्रवाई

प्रारंभिक जांच के बाद बैंक ने चार संदिग्ध अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। बैंक ने कहा है कि दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक, दीवानी और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

बोर्ड और ऑडिट समिति को जानकारी

इस प्रकरण की समीक्षा के लिए 20 फरवरी 2026 को बैंक की विशेष समिति की बैठक बुलाई गई, जो धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की निगरानी करती है। इसके बाद 21 फरवरी 2026 को यह मामला ऑडिट समिति और निदेशक मंडल के समक्ष भी रखा गया।

फोरेंसिक ऑडिट और कानूनी प्रक्रिया

बैंक ने स्वतंत्र बाहरी एजेंसी से फोरेंसिक ऑडिट कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही अपने वैधानिक ऑडिटरों को भी इस घटनाक्रम की जानकारी दे दी गई है।

इसके अतिरिक्त, पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देने की बात कही गई है। जिन खातों में संदिग्ध लेनदेन की आशंका है, उनसे जुड़े लाभार्थी बैंकों को भी राशि पर रोक लगाने के लिए रिकॉल अनुरोध भेजे गए हैं।

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First Published - February 22, 2026 | 2:47 PM IST

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