भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अधिग्रहण फाइनैंसिंग पर अंतिम दिशानिर्देश जारी करने के एक सप्ताह बाद देश का सबसे बड़ा ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक बड़े अधिग्रहण सौदों को धन मुहैया कराने के लिए जापानी ऋणदाताओं के साथ बातचीत कर रहा है, क्योंकि इस तरह के लेनदेन अकेले नहीं किए जा सकते हैं।
भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि बैंक शुरू में उपलब्ध लेनदेन का आकलन करेगा, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि वे उसकी जोखिम लेने की क्षमता के अनुरूप हैं या नहीं। साथ ही बैंक सादे वेनिला संरचनाओं के साथ शुरुआत करेगा, जिसमें वह ऋण वित्तपोषण प्रदान करेगा जबकि अधिग्रहणकर्ता इक्विटी लाएगा।
शेट्टी ने मुंबई में इंडियन बैंकिंग एसोसिएशन (आईबीए) के एक कार्यक्रम के मौके पर कहा, ‘अधिकांश बड़े लेनदेन एक साथ किए जाने हैं। हम बैंकों से इस बारे में बात कर रहे हैं कि हम एक साथ कैसे काम कर सकते हैं। हम मुख्य रूप से जापानी बैंकों से बात कर रहे हैं, क्योंकि वे इस क्षेत्र में बहुत सक्रिय हैं।’
बैंक को अभी तक इस तरह के फाइनैंसिंग के लिए एसओपी तैयार करने हैं। शेट्टी ने कहा, ‘एक बार जब पॉलिसी को मंजूरी मिल जाएगी, तो हम स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के साथ बोर्ड के पास जाएंगे।’ उन्होंने कहा कि बोर्ड से नीति को मंजूरी लेने में कम से कम एक या दो महीने लग जाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘सबसे पहले हमें लेनदेन को समझने की जरूरत है, फिर अपनी जोखिम लेने की क्षमता को देखना होगा। अधिग्रहण फाइनैंसिंग संरचना बहुत गतिशील है , जिसमें मेजेनाइन फाइनैंसिंग, इक्विटी फाइनैंसिंग, बॉन्ड प्रोग्राम, लोन आदि शामिल है। शुरू में हम जटिल संरचनाओं में नहीं जाएंगे। हम प्लेन वेनिला फाइनैंसिंग देखेंगे, जहां अधिग्रहणकर्ता इक्विटी ला रहा है, और हम ऋण देंगे।’ उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे बैंक को अनुभव होगा, हम विचार करेंगे कि जटिल संरचनाओं के साथ क्या किया जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा, ‘यह नियमित ऋण देने जैसा नहीं है। हम इसमें अवसर तलाश सकते हैं, जो हमें स्वीकार्य है।’ उन्होंने कहा कि अधिग्रहण में सबसे प्रमुख मूल्यांकन का मसला है।
पिछले हफ्ते रिजर्व बैंक ने अंतिम फ्रेमवर्क में पहले के एक मसौदा प्रस्ताव को हटा दिया। इसमें अधिग्रहण फाइनैंस के लिए बैंक के कुल एक्सपोजर को अपने टियर-1 पूंजी का 10 प्रतिशत पर सीमित कर दिया था। इसके बजाय, रिजर्व बैंक ने कहा कि अधिग्रहण फाइनैंस को समग्र कैपिटल मार्केट एक्सपोजर लिमिट के भीतर फाइनैंसिंग बैंक के योग्य कैपिटल बेस के 20 प्रतिशत तक की अनुमति दी जाएगी।
इसने बैंकों को सूचीबद्ध और गैर सूचीबद्ध दोनों गैर वित्तीय कंपनियों के अधिग्रहण को फाइनैंस करने की भी अनुमति दी, जबकि इस तरह के फाइनैंसिंग को कुल अधिग्रहण मूल्य के 75 प्रतिशत पर सीमित कर दिया।
बैंक अधिग्रहण मूल्य के 75 से अधिक धन नहीं मुहैया करा सकते। अंतिम नियमों में शेष 25 प्रतिशत के लिए ब्रिज फाइनैंस का प्रावधान किया गया है, जिसका भुगतान 1 साल के भीतर करना होगा।