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2026 का बजट बाजार के लिए बड़ी घटना नहीं: जियो ब्लैकरॉक एएमसी

पिछले कुछ महीनों से मेरा विचार यह रहा है कि बाजारों में थोड़ी सकारात्मकता बनी रहेगी, हालांकि अस्थिरता भी रहेगी। मुख्य जोखिम काफी हद तक वैश्विक हैं

Last Updated- January 20, 2026 | 10:16 PM IST
Rishi Kohli of Jio BlackRock AMC
जियो ब्लैकरॉक एएमसी के मुख्य निवेश अधिकारी ऋषि कोहली

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजारों ने साल की शुरुआत घबराहट भरे माहौल में की है। जियो ब्लैकरॉक एएमसी के मुख्य निवेश अधिकारी ऋषि कोहली ने नई दिल्ली में पुनीत वाधवा को दिए साक्षात्कार में बताया कि प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में कटौती के लिए सरकार को काफी ज्ञापन मिले हैं। यह ऐसा मसला है जिस पर बाजार बारीकी से नजर रख रहे हैं। मुख्य अंश:

क्या अगले तीन से छह महीनों में बाजारों के लिए निराशा का माहौल हो सकता है?

पिछले कुछ महीनों से मेरा विचार यह रहा है कि बाजारों में थोड़ी सकारात्मकता बनी रहेगी, हालांकि अस्थिरता भी रहेगी। मुख्य जोखिम काफी हद तक वैश्विक हैं, विशेष रूप से भू-राजनीतिक घटनाक्रम। तथापि इनमें से अधिकांश जोखिमों का अब तक काफी अनुमान लगाया जा चुका है। एक महत्वपूर्ण कारक घरेलू आय वृद्धि रही है, जो लगभग पांच लगातार तिमाहियों से निराशाजनक रही है यानी 2024 की अंतिम तिमाही से लेकर वित्त वर्ष 2026 की पिछली तिमाही तक। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर दिसंबर और मार्च की तिमाहियों में मामूली सुधार की उम्मीद थी।

अगर आय में क्रमिक सुधार जारी रहता है तो बाजार सकारात्मक रफ्तार बनाए रखने में सक्षम होंगे। फिर भी जनवरी और फरवरी के दौरान अस्थिरता की उम्मीद थी। इस अवधि में एक स्पष्ट सीजनल रुझान देखने में आता है- जब बाजार साल के अंत तक तेजी से बढ़ते हैं तो जनवरी-फरवरी में अक्सर स्थिरता या मामूली गिरावट देखने को मिलती है। पिछले कुछ दिनों में आई गिरावट इसी पैटर्न के अनुरूप है और आश्चर्यजनक नहीं है। कुल मिलाकर, मेरा नजरिया थोड़ा सकारात्मक बना हुआ है। मैं किसी बड़े सकारात्मक बदलाव की उम्मीद नहीं कर रहा हूं, लेकिन अगर आय में मामूली सुधार जारी रहता है तो धीरे-धीरे भरोसा वापस आ जाएगा।

आपने पहले कहा था कि मिडकैप शेयरों में आय बहाली पर नजर रखनी चाहिए। क्या ऐसा दिख रहा है?

नतीजों का सीजन अभी शुरू ही हुआ है, लेकिन मोटे तौर पर स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। मुनाफे के लिहाज से देखें तो स्मॉलकैप की तुलना में लार्जकैप और मिडकैप शेयर बेहतर दिख रहे हैं। स्मॉलकैप शेयरों के आय की संभावना अभी भी कम है। लार्जकैप और मिडकैप शेयरों के बीच अगुआई समय-समय पर बदलती रह सकती है। लेकिन कुल मिलाकर मुझे अब भी उम्मीद है कि आय संभावना के लिहाज से लार्जकैप और मिडकैप शेयर स्मॉलकैप से बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

वित्त वर्ष 2027 के लिए आय वृद्धि को लेकर आपकी क्या उम्मीदें हैं?

बाजार के स्तर पर हम वित्त वर्ष 2027 के लिए लगभग 12 फीसदी की आय वृद्धि की उम्मीद करते हैं। चूंकि बाजार व्यापक रूप से समय के साथ आय का अनुसरण करते हैं। इसलिए उनसे भी उतना ही प्रतिफल मिलना चाहिए।

एकीकरण का मौजूदा दौर कब तक चलने की उम्मीद है?

जनवरी से मध्य मार्च तक आमतौर पर एकीकरण का दौर होता है। अगर मार्च तिमाही के परिणाम उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते हैं तो इसका बाजार पर दबाव पड़ सकता है। लेकिन मामूली रूप से सकारात्मक आंकड़े भी अगले एक से डेढ़ वर्ष तक अपेक्षाकृत अच्छे प्रदर्शन के लिए आधार तैयार करने के लिए पर्याप्त होंगे।

आगामी केंद्रीय बजट से आपकी क्या उम्मीदें हैं?

मेरी अपेक्षाएं काफी कम हैं। राजकोषीय और मौद्रिक गुंजाइश सीमित है। इस वर्ष राजकोषीय घाटा करीब 4.4 फीसदी और अगले वर्ष 4.2 फीसदी रहने की संभावना है, जिसमें आगे की राह के लिहाज से मामूली समायोजन होंगे। पूंजीगत व्यय में कोई भी मामूली वृद्धि सकारात्मक होगी। लेकिन सेंटिमेंट ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। सेंटिमेंट में सुधार ही अंततः कंपनियों के निरंतर पूंजीगत व्यय में बदलता है, जो अभी तक निरंतरता के बजाय छिटपुट रहा है। कराधान मामले में बड़े बदलावों की गुंजाइश सीमित है। एसटीटी को लेकर सरकार के समक्ष महत्वपूर्ण प्रेजेंटेशन किया जा चुका है और बाजार इस पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। लेकिन अगर एसटीटी पर कुछ नहीं भी होता है तो भी मुझे यह कोई बड़ा नकारात्मक पहलू नहीं लगता, क्योंकि उम्मीदें पहले से ही कम हैं।

इसके अलावा, बाजार अपेक्षाकृत नरम स्थिति में बजट का सामना कर रहे हैं। जब बाजार अत्यधिक आशावाद के साथ बजट देखते हैं तो निराशा का जोखिम अधिक होता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है, इसलिए तीव्र नकारात्मक प्रतिक्रिया की संभावना सीमित दिखती है। दिन के दौरान कुछ तात्कालिक उतार-चढ़ाव संभव है, लेकिन संरचनात्मक रूप से कुछ खास नहीं होगा। कुल मिलाकर, बजट का बाजारों पर कोई खास प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।

सोने और चांदी के ईटीएफ में भारी निवेश देखने को मिला है। क्या कर संबंधी किसी भी बदलाव से निवेशकों का मनोबल गिर सकता है?

सोने और चांदी के ईटीएफ पर पहले से ही अपेक्षाकृत कम कर लगता है। यही कारण है कि कई निवेशक एक साल पूरा होने से पहले बड़ा लाभ होने पर भी बाहर नहीं निकलना चाहते। व्यापक दृष्टिकोण से देखें तो भारत के लिए कमोडिटी बाजारों का विकास वास्तव में फायदे की बात है। भारत पारंपरिक रूप से इक्विटी और बॉन्ड बाजार रहा है, जिसमें सोने और चांदी के अलावा कमोडिटी की भागीदारी सीमित रही है। समय के साथ तांबे जैसी कमोडिटी के लिए हाजिर बाजार और ईटीएफ विकसित करना, मौजूदा सोने और चांदी के उत्पादों पर कर को और सख्त करने की तुलना में कहीं अधिक सकारात्मक साबित होगा।

First Published - January 20, 2026 | 10:12 PM IST

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