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शेयर मार्केट में दो महीने की सबसे बड़ी गिरावट: फेड अनिश्चितता और FPI बिकवाली से बाजार धड़ाम

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837 अंक गिरने के बाद सेंसेक्स कुछ संभलकर 610 अंक यानी 0.7 फीसदी की गिरावट के साथ 85,103 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 226 अंक यानी 0.9 फीसदी गिरकर 25,961 पर बंद हुआ

Last Updated- December 08, 2025 | 9:40 PM IST
stock market
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की घोषणा से पहले सतर्कता और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर नए सिरे से अनिश्चितता के बीच सोमवार को शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई और बेंचमार्क सूचकांकों ने करीब दो महीने में अपने सबसे खराब कारोबार का प्रदर्शन किया। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली ने भी मनोबल को प्रभावित किया।

837 अंक गिरने के बाद सेंसेक्स कुछ संभलकर 610 अंक यानी 0.7 फीसदी की गिरावट के साथ 85,103 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 226 अंक यानी 0.9 फीसदी गिरकर 25,961 पर बंद हुआ। दोनों सूचकांकों के लिए यह 26 सितंबर के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट है। व्यापक बाजारों में भी बड़ी फिसलन देखी गई, जहां निफ्टी मिडकैप 100 में 1.83 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 2.6 फीसदी की गिरावट आई।

बीएसई में सूचबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 7 लाख करोड़ रुपये घटकर 464 लाख करोड़ रुपये रह गया।

फेड की नीतिगत नतीजों का इंतजार करते हुए निवेशकों का रुझान सुस्त रहा। अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती आमतौर पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों के आकर्षण को बढ़ाती है, जबकि ठहराव या आक्रामक रुख अक्सर निकासी को बढ़ावा देता है।

एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई की बिकवाली के कारण इस साल देसी शेयर बाजार में खासी गिरावट आई है। विदेशी निवेशकों ने 2025 में अब तक 1.5 लाख करोड़ रुपये के भारतीय शेयरों की बिक्री की है, जिसमें दिसंबर में 11,837 करोड़ रुपये की बिकवाली शामिल हैं।

सोमवार को एफपीआई 656 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) शुद्ध खरीदार रहे, जिन्होंने 2,543 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, इस हफ्ते फेड की नीतिगत फैसले से पहले निवेशकों के सतर्क रुख के कारण बाजार में व्यापक गिरावट देखी गई और यह 26,000 के स्तर से नीचे फिसल गया। घरेलू वृद्धि के मजबूत आंकड़ों और आरबीआई द्वारा हाल ही में ब्याज दरों में कटौती के बावजूद वैश्विक मौद्रिक नीति संबंधी चिंताओं, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार निकासी और मुद्रा अवमूल्यन के कारण अल्पकालिक धारणा प्रभावित हुई है। जापानी बॉन्ड यील्ड में कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाने से अस्थिरता और बढ़ गई, जिससे येन कैरी ट्रेड के संभावित रूप से समाप्त होने की आशंकाएं बढ़ गई हैं। 

इस साल भारतीय शेयर बाजारों को कंपनियों की कमजोर आय और अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के चलते काफी संघर्ष करना पड़ा है। अगस्त में अमेरिका ने अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाया, जिससे चुनिंदा भारतीय वस्तुओं पर कुल शुल्क करीब 50 फीसदी हो गया।

हालांकि, सितंबर तिमाही के उम्मीद से बेहतर नतीजों और व्यापार में सफलता को लेकर नए उत्साह के चलते हाल के महीनों में शेयरों में सुधार हुआ है। एआई से जुड़े नामों के क्षेत्रीय बदलाव और वैश्विक सहजता चक्र की बढ़ती उम्मीदों ने जोखिम उठाने की क्षमता को और बेहतर बनाया है। पिछले हफ्ते आरबीआई द्वारा रीपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती ने भी निवेशकों के उत्साह को बढ़ाया है। फिर भी, अमेरिका में टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता ने सूचकांक के नई ऊंचाइयों के करीब पहुंचने पर मुनाफावसूली को बढ़ावा दिया है।

एसबीआई सिक्योरिटीज के तकनीकी एवं डेरिवेटिव्स अनुसंधान प्रमुख सुदीप शाह ने कहा, 25,800 से नीचे कोई भी निरंतर चाल निफ्टी को 25,650 और उसके बाद 25,500 तक ले जा सकती है। ऊपर की ओर 26,150-26,200 का क्षेत्र एक मजबूत प्रतिरोध के रूप में कार्य कर सकता है।

बाजार में चढ़ने व गिरने वाले शेयरों का अनुपात काफी ज्यादा नकारात्मक रहा और बीएसई पर 3,460 शेयर गिरे जबकि 843 में बढ़ोतरी हुई। सेंसेक्स व निफ्टी के सिर्फ तीन शेयर ही बढ़त के साथ बंद हुए। इंडिगो निफ्टी में सबसे ज्यादा पिछड़ने वाला शेयर रहा, जो 8.6 फीसदी गिर गया। खबरें आईं कि विमानन नियामक ने बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने के बाद एयरलाइन को नोटिस जारी किया है। इस महीने अब तक इसके शेयर में 17 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।

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First Published - December 8, 2025 | 9:40 PM IST

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