पब्लिक सेक्टर के बैंकों यानी PSU बैंकों के शेयरों में सोमवार को मजबूत बढ़त देखने को मिली। Nifty PSU Bank इंडेक्स इंट्रा-डे ट्रेड में 1 प्रतिशत चढ़ गया, जबकि इसके मुकाबले Nifty 50 सिर्फ 0.12 प्रतिशत ऊपर था और 26,234.15 पर कारोबार कर रहा था। SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक, केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक के शेयर 1 से 3 प्रतिशत की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे।
कई शेयर हाल के दिनों में अपने रिकॉर्ड हाई स्तर को भी छू चुके हैं। SBI 26 नवंबर 2025 को ₹999 के ऑल टाइम हाई पर पहुंचा था, वहीं इंडियन बैंक नवंबर 2025 में ₹898.60 के हाई तक गया था। PSU सेक्टर में तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि Nifty PSU Bank इंडेक्स अपने 52 सप्ताह के लो से 55 प्रतिशत ऊपर आ चुका है।
जुलाई से सितंबर 2025 के बीच सरकारी बैंकों का मुनाफा पिछले साल के मुकाबले 4.7 प्रतिशत बढ़ गया। दूसरी ओर, इसी समय प्राइवेट बैंकों का मुनाफा 2.1 प्रतिशत कम हो गया। CareEdge Ratings का कहना है कि PSU बैंकों की कमाई इसलिए बढ़ी क्योंकि उन्हें फीस से ज्यादा पैसा मिला, सरकारी बॉन्ड से अच्छी कमाई हुई और रिटेल तथा छोटे व्यापारियों यानी MSME को दिए गए लोन में भी बढ़त हुई। उनके खर्च भी अब सामान्य हो गए हैं, जिससे मुनाफा और बढ़ा है। कुछ बैंकों को इनकम टैक्स रिफंड भी मिला, जिससे फायदा हुआ।
सरकारी बैंकों का क्रेडिट टू डिपॉजिट रेशियो लगभग 78 प्रतिशत है, जबकि प्राइवेट बैंकों में यह लगभग 90 प्रतिशत है। इस कम रेशियो की वजह से PSU बैंकों के पास लोन देने के लिए अधिक गुंजाइश रही, जिससे उनके बिजनेस में सुधार साफ दिखाई दिया है।
साल 2025 की दूसरी तिमाही में सभी बड़े बैंकों (SCBs) का RoA यानी Return on Assets 1.29 प्रतिशत रहा। यह पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम है। इसकी वजह यह है कि ब्याज दरें घटने के बाद बैंकों का मुनाफा थोड़ा दबाव में आ गया।
लेकिन अच्छी बात यह है कि पिछली तिमाही की तुलना में RoA में थोड़ा सुधार देखा गया है। इसका मुख्य कारण PSU बैंक हैं, क्योंकि इस तिमाही में उनका मार्जिन थोड़ा बढ़ा है और उनके बैड लोन की स्थिति भी बेहतर हुई है। यानी वे अपने दिए गए लोन की रिकवरी पहले से ज्यादा अच्छे तरीके से कर पा रहे हैं।
CareEdge का कहना है कि साल 2025–26 की दूसरी छमाही में बैंकों की कमाई और बढ़ सकती है। त्योहारों के समय लोगों की खरीदारी बढ़ती है, जिससे लोन की मांग भी बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा, CRR कम होने से बैंकों के पास ज्यादा पैसा आ जाएगा, जिसे वे आसानी से लोन के रूप में दे सकेंगे। अनसिक्योर्ड लोन और माइक्रोफाइनेंस लोन में जो दिक्कतें थीं, वे भी धीरे धीरे कम होती नजर आ रही हैं। इन सभी कारणों से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले महीनों में बैंकिंग सेक्टर की हालत और बेहतर हो जाएगी।
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CareEdge Ratings के एसोसिएट डायरेक्टर सौरभ भालेराव का कहना है कि इस समय सरकारी बैंक यानी PSU बैंक, प्राइवेट बैंकों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मानें तो इसका एक बड़ा कारण यह है कि पहले PSU बैंकों की स्थिति कमजोर थी, इसलिए अब जब उनमें सुधार हुआ है, तो उनका ग्रोथ रेट ज्यादा दिख रहा है। साथ ही उनका CD रेशियो भी प्राइवेट बैंकों से कम है, यानी उनके पास और लोन देने की ज्यादा गुंजाइश है, जिससे उनका बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है।
दूसरी तरफ प्राइवेट बैंकों पर माइक्रोफाइनेंस और छोटे रकम वाले लोन का ज्यादा दबाव पड़ा है, हालांकि इसमें भी अब धीरे धीरे सुधार दिखने लगा है। सौरभ भालेराव कहते हैं कि बैंकिंग सिस्टम की कुल पूंजी स्थिति अभी मजबूत है। कई बड़े PSU बैंकों ने हाल ही में बॉन्ड और QIP के जरिए पैसा जुटाया है, और आने वाले महीनों में और भी पूंजी जुटाई जाएगी। इससे यह पूरा सेक्टर आगे भी मजबूत बना रह सकता है।