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NSE: मार्च में को-लोकेशन की भागीदारी घटी

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एनएसई डेरिवेटिव में को-लोकेशन 49.6% से घटकर 46%, कैश 35.9%

Last Updated- May 01, 2024 | 11:30 PM IST
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स्टॉक एक्सचेंजों पर कारोबारी गतिविधि का एक छोटा हिस्सा उन व्यापारियों से आया जो किसी दूसरे की तुलना में तेजी से कारोबार करके लाभ कमाना चाहते हैं। ये कारोबारी को-लोकेशन नामक प्रणाली के तहत स्टॉक एक्सचेंज परिसर में अपने सर्वर स्थापित करते हैं। इससे स्टॉक एक्सचेंज पर होने वाले उनके ऑर्डरों में लगने वाला समय घटता है।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान स्टॉक एक्सचेंज की बढ़ती गतिविधि में को-लोकेशन का बड़ा योगदान रहा है। इससे हाल की कई अवधियों में उन उभरते रुझान का पता चलता है, जिनका आंकड़ा उपलब्ध है। यह अब बीएसई पर नकदी सेगमेंट और एनएसई पर डेरिवेटिव सेगमेंट तथा नकदी दोनों सेगमेंट में गिरावट दर्शाता है।

ट्रेडिंग गतिविधि में को-लोकेशन की एनएसई डेरिवेटिव सेगमेंट भागीदारी फरवरी 2024 के 50.5 प्रतिशत से घटकर मार्च 2024 में 49.6 प्रतिशत रह गई। कैश सेगमेंट की भागीदारी इस अवधि में 36.1 प्रतिशत से घटकर 35.9 प्रतिशत रह गई। ट्रेडिंग टर्नओवर में बीएसई कैश सेगमेंट को-लोकेशन की भागीदारी 36.6 प्रतिशत से घटकर 30.2 प्रतिशत रह गई जबकि डेरिवेटिव सेगमेंट में यह 61.4 प्रतिशत से बढ़कर 66.1 प्रतिशत हो गई।

ग्रीकसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज के निदेशक हितेश हकानी का कहना है कि को-लोकेशन की भागीदारी में गिरावट से ट्रेडिंग के अन्य स्वरूपों के प्रति रुझान का संकेत मिल सकता है। उनका कहना है, ‘फरवरी में ट्रेडिंग का को-लोकेशन मोड अपनाने वाले कुछ कॉरपोरेट ग्राहकों ने मार्च में शायद डायरेक्ट मार्केट एक्सेस मोड अपनाया होगा।’

एक एल्गोरिदम ट्रेडिंग सॉल्युशन प्रदाता के मुख्य अधिकारी का मानना है कि मौजूदा रुझान ट्रेडिंग पैटर्न में बड़ा बदलाव नहीं दिखाता। एनएसई में ट्रेडिंग के मोड में डायरेक्ट मार्केट एक्सेस की भागीदारी डेरिवेटिव सेगमेंट में जनवरी के 11.48 प्रतिशत से बढ़कर मार्च में 13.6 प्रतिशत हो गई। वहीं इस दौरान कैश मार्केट सेगमेंट में यह 5.6 प्रतिशत से बढ़कर 7 प्रतिशत हो गई।

वर्ष 2010 में एनएसई द्वारा शुरू किया गया को-लोकेशन आमतौर पर उन संस्थागत निवेशकों के डोमेन का इस्तेमाल करता है जो अपने सर्वर स्टॉक एक्सचेंज की साइट पर लोकेट करते हैं। इसके लिए वे फीस देते हैं। को-लोकेशन के जरिये सूचना स्थानांतरण की गति यह सुनिश्चित करती है कि ज्यादा ऑर्डर कम समय में पूरे किए जा सकते हैं।

एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी आशिषकुमार चौहान ने निवेशकों के साथ 12 फरवरी को बातचीत में कहा कि एनएसई पर को-लोकेशन की मांग तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा, ‘क्योंकि मांग अधिक है, इसलिए हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी बिल्डिंग के अंदर अधिक से अधिक डेटा केंद्र बना रहे हैं जिससे कि मांग पूरी हो सके।

हम इस समय में डेटा सेंटर स्पेस बढ़ा रहे हैं जिसे संभावित रूप से वर्तमान एनएसई भवन में बनाया जा सकता है। हम पूरे डेटा सेंटर की जरूरी मंजूरी मिलने के बाद इस प्रक्रिया में तेजी ला रहे हैं। यह डेटा सेंटर अभी एनएसई बिल्डिंग में है।’

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First Published - May 1, 2024 | 11:30 PM IST

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