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एंकर निवेशक बने म्युचुअल फंड

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म्युचुअल फंडों ने इस साल IPO में 2,850 करोड़ रुपये का निवेश किया

Last Updated- September 19, 2023 | 9:37 PM IST
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देसी म्युचुअल फंडों ने इस साल के ज्यादातर आरंभिक सार्वजनिक निर्गम को सहारा दिया, जहां छोटे व मझोले आईपीओ का वर्चस्व था। वित्त वर्ष 24 में अब तक 24 आईपीओ पेश हुए हैं और म्युचुअल फंडों ने इनमें से 20 में एंकर निवेशक की भूमिका निभाई है।

उन्होंने एंकर श्रेणी के तहत पेश कुल 6,900 करोड़ रुपये के शेयरों में से 40 फीसदी से ज्यादा यानी 2,850 करोड़ रुपये के शेयरों के लिए आवेदन किया। यह जानकारी प्राइम डेटाबेस से मिली। यह फर्म प्राथमिक बाजार के आंकड़ों पर नजर रखती है।

ज्यादातर मामलों में फंड मैनेजरों ने तीन दिन की पेशकश अवधि के दौरान और शेयरों के लिए भी आवेदन किया, जो एंकर आवंटन के बाद होता है।

एंकर श्रेणी को बड़े निवेशक के तौर पर भी जाना जाता है, जो संस्थागत निवेशक होते हैं और जिन्हें आईपीओ से पहले कंपनियां शेयर आवंटित करती हैं। यह मांग को प्रदर्शित करने में मदद करता है और अन्य निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत बनाता है।

एंकर आवंटन सिर्फ और सिर्फ तथाकथित पात्र संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) को किया जा सकता है, जिनमें सॉवरिन वेल्थ फंड, म्युचुअल फंड, पेंशन फंड और बाजार नियामक सेबी के पास पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक शामिल हैं।

ज्यादातर मौकों पर एफपीआई ने एंकर श्रेणी का ज्यादातर हिस्सा हासिल किया। हालांकि इस साल आईपीओ का औसत आकार सिकुड़ा है, ऐसे में एंकर निवेशकों को तौर पर म्युचुअल फंडों की भूमिका को ज्यादा सुर्खियां मिली।

वित्त वर्ष 24 में अब तक पेश आईपीओ का औसत आकार करीब 530 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2022-23 के 1,500 करोड़ रुपये के मुकाबले कम है।

एक निवेश बैंकर ने कहा, एफपीआई मोटे तौर पर 1,500 करोड़ रुपये से कम आकार वाले आईपीओ में भागीदारी नहीं करते। दूसरी ओर, देसी फंडों को अपने स्मॉलकैप व मिडकैप फंडों में उत्साहजनक निवेश मिल रहा है। ऐसे में उनके पास आईपीओ के जरिए आने वाली नई कंपनियों में निवेश की काफी गुंजाइश बनती है।

कुछ आईपीओ मसलन ​ऋषभ इंस्ट्रूमेंट्स, एरोफ्लेक्स इंडस्ट्रीज और न्यूवेब टेक्नोलॉजिज में म्युचु्अल फंडों ने एंकर श्रेणी के तहत आरक्षित शेयरों के आधे से ज्यादा हिस्से के लिए आवेदन किया। सेबी के नियम के तहत क्यूआईबी के तहत आरक्षित शेयरों का अधिकतम 60 फीसदी एंकर निवेशकों को आवंटित किया जा सकता है।

एंकर बुक में उपलब्ध एक तिहाई शेयर म्युचुअल फंडों के लिए आरक्षित होते हैं। मोटे तौर पर आईपीओ में पेश शेयरों का 50 फीसदी क्यूआईबी के लिए आरक्षित होता है। हालांकि मुनाफा व नेटवर्थ के मानदंडों को पूरा करने में नाकाम रहने वाली कंपनियों को कम से कम 75 फीसदी शेयरों के लिए आवेदन अनिवार्य तौर पर क्यूआईबी के तहत होता है।

म्युचुअल फंडों की तरफ से सबसे ज्यादा आवेदन जिन आईपीओ में देखने को मिला है उनमें मैनकाइंड फार्मा, आरआर केबल और सामी होटल्स शामिल हैं। इनमें उन्होंने एंकर श्रेणी के तहत 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर हासिल किए।

यात्रा ऑनलाइन, कॉनकॉर्ड बायोटेक, टीवीएस सप्लाई चेन और एवलॉन टेक्नोलॉजिज समेत अन्य 11 आईपीओ में म्युचुअल फंडों ने एंकर श्रेणी के तहत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर हासिल किए। पिछले वित्त वर्ष में म्युचुअल फंडों ने एंकर श्रेणी में 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर हासिल किए थे और उनके निवेश का करीब 50 फीसदी एलआईसी में हुआ।

इस बार हालांकि आईपीओ पर रिटर्न बेहतर रहा है, लेकिन वित्त वर्ष 24 में सूचीबद्ध दो आईपीओ अपने इश्यू प्राइस से नीचे कारोबार कर रहे हैं।

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First Published - September 19, 2023 | 9:37 PM IST

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