facebookmetapixel
Advertisement
भारत और UAE के बीच 6 ऐतिहासिक समझौते; अबू धाबी में PM मोदी की यात्रा के दौरान रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र पर बड़ा फैसलापश्चिम एशिया संकट का असर: चार साल में पहली बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, CNG भी हुई महंगीतेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर रुपये से शेयर बाजार बेदम; सेंसेक्स-निफ्टी में साप्ताहिक गिरावटApple पर CCI कसेगा शिकंजा, वैश्विक टर्नओवर के बजाय अब भारत के राजस्व पर मांगा जवाबरिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया: ₹96.14 तक लुढ़का, क्या ₹100 प्रति डॉलर तक गिर जाएगा?IMD का पूर्वानुमान: केरल में जल्दी आएगा मॉनसून, लेकिन अल नीनो के कारण सामान्य से कम बारिश की आशंकानीट परीक्षा में बड़ा बदलाव: अगले साल से ऑनलाइन मोड में होगी परीक्षा, शिक्षा मंत्री ने किया ऐलानरक्षा क्षेत्र का नया हब बनेगा आंध्र प्रदेश, सत्य साईं जिले में रखी गई स्टेल्थ फाइटर जेट परियोजना की नींवभोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला, परिसर को बताया देवी सरस्वती का मंदिरनई दिल्ली में ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया संघर्ष पर नहीं बनी सहमति, बिना संयुक्त विज्ञप्ति के समाप्त हुई चर्चा

Defensive funds: गिरावट में डटे रहे ये फंड्स, क्या आगे देंगे दमदार रिटर्न? जानें निवेशकों के लिए क्या है सही स्ट्रैटेजी

Advertisement

जब किसी फंड का चयन करें तो सिर्फ हालिया प्रदर्शन न देखें। आलेख यादव के अनुसार, "इस बात पर ध्यान दें कि फंड ने विभिन्न बाजार चक्रों में कैसा प्रदर्शन किया है।

Last Updated- March 11, 2025 | 7:06 AM IST
Mutual Fund

Defensive funds: बाजार में गिरावट के दौरान कुछ फंड्स ने अन्य फंड्स और बेंचमार्क की तुलना में नुकसान को बेहतर तरीके से सीमित किया। अब निवेशक यह चर्चा कर रहे हैं कि क्या उन्हें इन फंड्स में शिफ्ट करना चाहिए। इन फंड्स की मजबूती के पीछे कुछ खास रणनीतियां रहीं। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के डायरेक्टर-मैनेजर रिसर्च कौस्तुभ बेलापुरकर के मुताबिक, “कुछ फंड मैनेजर्स ने अपने पोर्टफोलियो में बड़ी मात्रा में कैश बनाए रखा, जिससे बाजार गिरने पर नुकसान सीमित रहा। हालांकि, केवल कुछ ही फंड मैनेजर्स ने यह रणनीति अपनाई और 20% से ज्यादा कैश होल्ड किया, जबकि अधिकांश फंड्स ने अपने कैश स्तर को 10% से कम रखा।”

बेलापुरकर ने कहा, “कुछ सेक्टर, जैसे फाइनैंशियल सर्विसेज, हेल्थकेयर और सूचना प्रौद्योगिकी (IT), बाजार में गिरावट के दौरान अपेक्षाकृत कम गिरे। जिन फड्स ने इन सेक्टर्स में ज्यादा निवेश किया था, उन्हें कम नुकसान हुआ।”

सैंक्टम वेल्थ के इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट हेड आलेख यादव ने कहा, सब-एसेट एलोकेशन भी एक महत्वपूर्ण कारक रहा। जिन फ्लेक्सीकैप फंड्स ने लार्जकैप शेयरों की ओर ज्यादा झुकाव रखा, उन्होंने बेंचमार्क की तुलना में कम गिरावट दर्ज की।”

क्या ये फंड्स रिकवरी में आगे रहेंगे?

जो फंड्स बाजार में गिरावट के दौरान नुकसान को सीमित करने में सफल रहे, वे जरूरी नहीं कि बाजार रिकवरी में सबसे आगे हों। आलेख यादव के अनुसार, “जो फंड्स करेक्शन के दौरान डिफेंसिव हो गए थे, वे बाजार रिकवरी के समय पिछड़ सकते हैं, खासकर जब रिकवरी तेज होती है।”

बाजार में बेहतर प्रदर्शन फंड मैनेजर की रणनीतिक क्षमता पर निर्भर करेगा। बेलापुरकर ने कहा, “अगर किसी मैनेजर ने अधिक मात्रा में कैश होल्ड किया था, तो उसका प्रदर्शन इस पर निर्भर करेगा कि वह कितनी तेजी से उस कैश को फिर से निवेश करता है। वहीं, जिन फंड्स ने सेक्टोरल निवेश से अच्छा प्रदर्शन किया, उनका रिटर्न इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन सा सेक्टर पहले रिकवर होता है।”

बाजार में रिकवरी अप्रत्याशित होती है। जो मैनेजर्स बहुत अधिक कैश होल्ड करके बैठे थे, वे अचानक और तेज रिकवरी की स्थिति में अवसर गंवा सकते हैं

Also read: महिलाएं निवेश में आगे, SIP और एकमुश्त निवेश में पुरुषों से अधिक योगदान

गणित डिफेंसिव फंड्स के पक्ष में

सेबी में रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार दीपेश राघव कहते हैं, “अगर किसी फंड की नेट एसेट वैल्यू (NAV) ₹100 से गिरकर ₹50 हो जाती है- जो 50% की गिरावट है- तो उसे फिर से ₹100 तक पहुंचने के लिए 100% की बढ़त दर्ज करनी होगी। गणित उन फंड्स के पक्ष में रहता है जो कम गिरते हैं। जितनी ज्यादा गिरावट होगी, रिकवरी उतनी ही कठिन होगी।”डिफेंसिव फंड्स उतार-चढ़ाव के दौरान पोर्टफोलियो में बनाए रखना आसान होते हैं।

आलेख यादव के अनुसार, “बुल मार्केट में निवेशक थोड़े कम रिटर्न स्वीकार करने के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन वे बड़ी गिरावट को पसंद नहीं करते। इसे ‘लॉस एवर्शन’ (loss aversion) कहा जाता है।”

एक से कम बीटा वाले फंड (जो बाजार की तुलना में कम उतार-चढ़ाव वाले होते हैं) स्थिरता प्रदान करते हैं। बेलापुरकर के अनुसार, “जो फंड बाजार गिरने पर कम गिरते हैं और तेजी के दौरान मध्यम रूप से बढ़ते हैं, वे स्थिर रिटर्न देते हैं। ऐसे फंड पोर्टफोलियो को अधिक मजबूत और संतुलित बनाने में मदद करते हैं।”

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

निवेशकों को अपने एसेट एलोकेशन (इक्विटी, फिक्स्ड इनकम, और गोल्ड का मिश्रण) और सब-एसेट एलोकेशन (लार्जकैप, मिडकैप, और स्मॉलकैप का अनुपात) का मूल्यांकन करना चाहिए। इस गिरावट ने उन्हें उनकी जोखिम सहनशीलता (risk appetite) को समझने का बेहतर अवसर दिया होगा। जिन निवेशकों ने अपनी क्षमता से ज्यादा जोखिम लिया है, उन्हें इक्विटी में अपने निवेश को घटाना चाहिए, खासकर मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स में एक्सपोजर कम करना चाहिए।

राघव के अनुसार, “अपने जोखिम को पहले एसेट और सब-एसेट एलोकेशन के माध्यम से कंट्रोल करने की कोशिश करें।”

लार्जकैप फंड्स पोर्टफोलियो में स्थिरता प्रदान करते हैं, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स बाजार में गिरावट के दौरान ज्यादा प्रभावित होते हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म में हाई रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।

राघव के अनुसार, “अपनी जोखिम सहने की क्षमता (risk appetite) के आधार पर इन सब-एसेट क्लासेज का सही संतुलन चुनें।”

Also read: NFO: चांदी में करें स्मार्ट इन्वेस्टमेंट, आज से खुल गए दो नए Silver ETF; पैसा लगाने से पहले देख लें जरूरी डिटेल

सिर्फ हालिया प्रदर्शन के आधार पर फंड न चुनें

जब किसी फंड का चयन करें तो सिर्फ हालिया प्रदर्शन न देखें। आलेख यादव के अनुसार, “इस बात पर ध्यान दें कि फंड ने विभिन्न बाजार चक्रों में कैसा प्रदर्शन किया है। उन फंड्स को चुनें, जिन्होंने लंबे समय तक स्थिरता और निरंतरता दिखाई है।”

केवल वे निवेशक जो अस्थिरता (volatility) को सहन कर सकते हैं, उन्हें अधिक उतार-चढ़ाव वाले फंड्स में निवेश करना चाहिए, बशर्ते कि उन फंड्स ने इतिहास में लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न दिए हों।

Advertisement
First Published - March 11, 2025 | 7:06 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement