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Eternal के शेयर में 7 महीने की सबसे बड़ी गिरावट, निवेशकों में क्यों मची घबराहट?

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नए लेबर कोड लागू होने की खबर से निवेशक घबराए, 52 हफ्ते के हाई से 23% नीचे आया Eternal का शेयर

Last Updated- December 16, 2025 | 4:30 PM IST
Eternal share price

मंगलवार को इंट्रा-डे कारोबार में Eternal का शेयर करीब 5% गिरकर 285.70 रुपये पर आ गया। भारी बिकवाली के चलते यह गिरावट पिछले सात महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट रही। इससे पहले 2 मई 2025 को शेयर 5.3% और 7 अप्रैल 2025 को करीब 10% गिरा था।

आज की गिरावट के बाद Eternal का शेयर अपने 52 हफ्ते के हाई 368.40 रुपये (जो 16 अक्टूबर 2025 को बना था) से करीब 23% नीचे आ गया है। दोपहर 03:29 बजे शेयर 4.71% की गिरावट के साथ 284.30 रुपये पर कारोबार कर रहा था, जबकि बीएसई सेंसेक्स सिर्फ 0.62% गिरा था। शेयर में ट्रेडिंग वॉल्यूम भी काफी ज्यादा रहा और एनएसई व बीएसई पर कुल करीब 3.81 करोड़ शेयरों का कारोबार हुआ।

बाजार क्यों घबराया?

सरकार ने चार नए श्रम कानून (लेबर कोड) 21 नवंबर 2025 से लागू करने की मंजूरी दे दी है। ये कानून साल 2020 में पास हुए थे, लेकिन अब तक लागू नहीं हुए थे। सरकार के मुताबिक 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नए कानून बनाए गए हैं, ताकि नियम आसान हों और कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित रहें।

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इन नए नियमों के तहत प्लेटफॉर्म कंपनियों, जैसे Eternal और Swiggy, को गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी फंड में पैसा देना होगा। इसके अलावा, एक नया न्यूनतम वेतन तय किया जा सकता है, जो मौजूदा न्यूनतम वेतन से ज्यादा होगा। इससे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।

ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक, अगर Eternal और Swiggy को कर्मचारियों को दिए जाने वाले सालाना भुगतान का करीब 5% अतिरिक्त देना पड़ा, तो फूड डिलीवरी बिजनेस में हर ऑर्डर पर करीब 3.2 रुपये का बोझ बढ़ सकता है। वहीं, क्विक कॉमर्स बिजनेस में यह असर करीब 2.4 रुपये प्रति ऑर्डर हो सकता है। जानकारों का मानना है कि कंपनियां आगे चलकर यह खर्च ग्राहकों से वसूल सकती हैं, जैसे प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर।

आगे का हाल

लंबे समय में जोमैटो (Eternal) ने अलग-अलग बिजनेस में अपनी पकड़ मजबूत की है और ग्रोथ भी दिखाई है। लेकिन Axis Direct के एक एनालिस्ट के मुताबिक, फिलहाल बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तेजी से नए स्टोर खोलने की वजह से मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है।

इस बीच, जीएसटी दरों में कटौती से Blinkit की आम खरीदारी पर औसतन करीब 3% टैक्स कम हुआ है, जिससे मांग बढ़ने की उम्मीद है। कंपनी ने कहा कि इसका अच्छा असर Q3FY26 से दिखेगा। हालांकि Q2FY26 में ग्राहकों ने खरीदारी टाल दी थी, जिससे कंपनी की ग्रोथ और मार्जिन दोनों पर असर पड़ा।

(डिस्क्लेमर: यहां सलाह ब्रोकरेज ने दी है। बाजार में निवेश जो​खिमों के अधीन है। निवेश संबंधित फैसले करने से पहले अपने एक्सपर्ट से परामर्श कर लें।)

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First Published - December 16, 2025 | 4:24 PM IST

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