इलारा कैपिटल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल इक्विटी फंडों से आठ हफ्तों में पहली बार साप्ताहिक निकासी देखी गई। ग्लोबल लिक्विडिटी ट्रैकर रिपोर्ट के अनुसार निवेशकों ने पिछले हफ्ते करीब 7 अरब डॉलर निकाले हैं। वैश्विक शेयरों से ज्यादा शुद्ध निकासी का पिछला मामला मार्च में उस समय रहा था जब ईरान संघर्ष अपने चरम पर था।
पिछले हफ्ते चीन, जापान और यूरोप में बड़े पैमाने पर रीडम्पशन (निवेश निकासी) देखने को मिली। यह इस बात का संकेत है कि ईरान समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच उभरते बाजारों और कमोडिटी से जुड़े क्षेत्रों में निवेश का जोखिम लेने की इच्छा घट रही है।
उभरते बाजार (ईएम) दबाव में रहे और उनसे लगातार सातवें हफ्ते निवेश निकासी हुई। इस कमजोरी की मुख्य वजह चीन में घरेलू स्तर पर बिकवाली और भारत से विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी थी। वैश्विक उभरते बाजार (जीईएम) फंडों में भी चौथे हफ्ते गिरावट का सिलसिला चलता रहा। यह मार्च 2025 के बाद रीडम्पशन का ऐसा पहला दौर था। इस तरह कुल निकासी बढ़कर 4.2 अरब डॉलर हो गई।
इलारा कैपिटल के उपाध्यक्ष सुनील जैन ने कहा कि यह रुझान दिखाता है कि उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों में निवेशकों की दिलचस्पी में काफी कमी आई है जबकि निवेश का झुकाव अब भी कुछ चुनिंदा मौकों की तरफ ही बना हुआ है। मई महीने में उभरते बाजारों का प्रदर्शन मिलाजुला रहा। दक्षिण कोरिया और ताइवान में क्रमशः 28 फीसदी और 15 फीसदी की तेजी देखने को मिली। दूसरी ओर इंडोनेशिया, ब्राजील और भारत में क्रमशः 12 फीसदी, 7 फीसदी और 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
भारत में निवेश निकासी फिर से शुरू हो गई है। पिछले हफ्ते विदेशी निवेशकों ने 46.3 करोड़ डॉलर निकाल लिए। विदेशी निवेश की आवक में कुछ समय की स्थिरता के बाद यह ताजा निकासी हुई है। कुल मिलाकर मई में (27 मई तक) विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की निकासी 34,000 करोड़ रुपये रही, जो मार्च (1.22 लाख करोड़ रुपये) और अप्रैल (70,000 करोड़ रुपये) की निकासी की तुलना में काफी कम थी।
इस बीच, अमेरिका केंद्रित और ग्लोबल मैंडेट फंड ही एकमात्र ऐसी मुख्य श्रेणियां रहीं, जिनमें लगातार निवेश आता रहा। इलारा कैपिटल के नोट के अनुसार, टेक्नॉलजी, औद्योगिक और सेमीकंडक्टर फंडों में सबसे ज्यादा निवेश हुआ, जिससे पता चलता है कि निवेशक अभी भी आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी थीम को ही ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
निवेशकों की पसंद में आया बदलाव कमोडिटी में भी साफ दिखा। इस हफ्ते कीमती धातुओं के फंडों से 1.1 अरब डॉलर की और निकासी हुई। जनवरी 2026 में चांदी पहली ऐसी बड़ी कमोडिटी थी, जिसने अपनी रफ्तार खोई और फिर मार्च के बाद से सोने में सुस्ती आई।
नोट में कहा गया है, कुल मिलाकर कई ऐसे सेक्टर हैं जिन्हें एआई व इलेक्ट्रिफिकेशन ट्रेड से फायदा हुआ था, उनमें-जैसे दक्षिण कोरिया, ताइवान, ब्राजील, चांदी, सोना, कमोडिटी और एनर्जी- अब धीमा या ऋणात्मक निवेश दिख रहा है। एकमात्र ऐसा सेगमेंट जिसमें मजबूत निवेश हुआ है वह यूएस टेक, इंडस्ट्रियल और सेमीकंडक्टर है।