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कम दाम में लिवाली से उछला बाजार

Last Updated- December 11, 2022 | 8:50 PM IST

देसी शेयर बाजार में आज खासी तेजी देखी गई। निवेशकों को लगता है कि रूस-यूक्रेन युद्घ का अर्थव्यवस्था पर जितना असर पडऩा था, वह पड़ चुका है और उन्होंने कम दाम पर शेयरों की लिवाली की क्योंकि बहुत सारे शेयर कई महीने के निचले स्तर पर आ गए हैं।
सेंसेक्स आज 1,223 अंक या 2.3 फीसदी की बढ़त के साथ 54,647 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 332 अंक के लाभ के साथ 16,345 पर बंद हुआ। ब्रेंट क्रूड के 140 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने और अन्य जिंसों के दामों में तेजी के कारण पिछले हफ्ते शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी और सूचकांक फिसलकर सात महीने के निचले स्तर पर आ गए थे।
अवेंडस कैपिटल स्ट्रैटजीज के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड ने कहा, ‘गिरावट पर खरीदारी से दुनिया भर के बाजारों में तेजी आई है। बाजार कमोबेश अच्छा है क्योंकि रूस के तेल निर्यात पर अमेरिका की पाबंदी का पहले ही असर हो चुका है। अमेरिका रूस से काफी कम तेल का आयात करता है। तेल के दाम में स्थिरता आ सकती है क्योंकि यूरोपीय देशों ने रूस से तेल अयात पर रोक नहीं लगाई है। अधिकतर यूरोपीय देश काफी हद तक रूस से ईंधन की आपूर्ति पर ही निर्भर हैं।’
रूस द्वारा यूक्रेन के शहरों पर बमबारी के बावजूद यूरोपीय बाजारों में मजबूत तेजी देखी गई जिससे दुनिया भर के बाजारों में निवेशकों का हौसला बढ़ा। खबरों के अनुसार यूरोपीय बाजार में तेजी इस उम्मीद में आई है कि नीति निर्माता रूस-यूक्रेन युद्घ की आंच से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए राहत पैकेज का ऐलान कर सकते हैं। कई लोगों को आशंका है कि जिंसों के ऊंचे दाम मुद्रास्फीति को बढ़ावा दे सकते हैं, जिसमें पहले ही तेजी आ चुकी है। कई अर्थशास्त्रियों ने अनुमान जाहिर किया है कि ऊंची मुद्रास्फीति से आर्थिक वृद्घि के अनुमान में कटौती की जा सकती है। आने वाले दिनों में पता चलेगा कि केंद्रीय बैंक इस समस्या का क्या हल निकालते हैं। यूरोपीय केंद्रीय बैंक गुरुवार को दरों की घोषणा कर सकता है। अगले हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंगलैंड भी दरों पर अपने निर्णय का ऐलान कर सकते हैं। फेड ब्याज दरों में 25 आधार अंक का इजाफा कर सकता है।
निवेशकों की नजर कल आने वाले विधानसभा चुनावों के नतीजों पर भी है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव के नतीजों का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वृहद आर्थिक जोखिम उससे कहीं ज्यादा है।
बीएसई पर करीब 70 शेयर 52 हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गए, जबकि 20 ने 52 हफ्ते के निचले स्तर को छुआ।

First Published - March 9, 2022 | 11:24 PM IST

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देसी शेयर बाजार में आज खासी तेजी देखी गई। निवेशकों को लगता है कि रूस-यूक्रेन युद्घ का अर्थव्यवस्था पर जितना असर पडऩा था, वह पड़ चुका है और उन्होंने कम दाम पर शेयरों की लिवाली की क्योंकि बहुत सारे शेयर कई महीने के निचले स्तर पर आ गए हैं।
सेंसेक्स आज 1,223 अंक या 2.3 फीसदी की बढ़त के साथ 54,647 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 332 अंक के लाभ के साथ 16,345 पर बंद हुआ। ब्रेंट क्रूड के 140 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने और अन्य जिंसों के दामों में तेजी के कारण पिछले हफ्ते शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी और सूचकांक फिसलकर सात महीने के निचले स्तर पर आ गए थे।
अवेंडस कैपिटल स्ट्रैटजीज के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड ने कहा, ‘गिरावट पर खरीदारी से दुनिया भर के बाजारों में तेजी आई है। बाजार कमोबेश अच्छा है क्योंकि रूस के तेल निर्यात पर अमेरिका की पाबंदी का पहले ही असर हो चुका है। अमेरिका रूस से काफी कम तेल का आयात करता है। तेल के दाम में स्थिरता आ सकती है क्योंकि यूरोपीय देशों ने रूस से तेल अयात पर रोक नहीं लगाई है। अधिकतर यूरोपीय देश काफी हद तक रूस से ईंधन की आपूर्ति पर ही निर्भर हैं।’
रूस द्वारा यूक्रेन के शहरों पर बमबारी के बावजूद यूरोपीय बाजारों में मजबूत तेजी देखी गई जिससे दुनिया भर के बाजारों में निवेशकों का हौसला बढ़ा। खबरों के अनुसार यूरोपीय बाजार में तेजी इस उम्मीद में आई है कि नीति निर्माता रूस-यूक्रेन युद्घ की आंच से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए राहत पैकेज का ऐलान कर सकते हैं। कई लोगों को आशंका है कि जिंसों के ऊंचे दाम मुद्रास्फीति को बढ़ावा दे सकते हैं, जिसमें पहले ही तेजी आ चुकी है। कई अर्थशास्त्रियों ने अनुमान जाहिर किया है कि ऊंची मुद्रास्फीति से आर्थिक वृद्घि के अनुमान में कटौती की जा सकती है। आने वाले दिनों में पता चलेगा कि केंद्रीय बैंक इस समस्या का क्या हल निकालते हैं। यूरोपीय केंद्रीय बैंक गुरुवार को दरों की घोषणा कर सकता है। अगले हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंगलैंड भी दरों पर अपने निर्णय का ऐलान कर सकते हैं। फेड ब्याज दरों में 25 आधार अंक का इजाफा कर सकता है।
निवेशकों की नजर कल आने वाले विधानसभा चुनावों के नतीजों पर भी है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव के नतीजों का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वृहद आर्थिक जोखिम उससे कहीं ज्यादा है।
बीएसई पर करीब 70 शेयर 52 हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गए, जबकि 20 ने 52 हफ्ते के निचले स्तर को छुआ।

First Published - March 9, 2022 | 11:24 PM IST

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