मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो वर्षों में मेनबोर्ड और एसएमई प्लेटफॉर्म दोनों पर आए कुल आईपीओ में पांच सेक्टर का योगदान आधे से अधिक रहा। निवेशकों को भेजे एक नोट में ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि इन सेक्टर का योगदान हर साल अलग-अलग रहा।
कैलेंडर वर्ष 2025 में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (26.6 प्रतिशत), पूंजीगत सामान (9.5 प्रतिशत), टेक्नॉलजी (9.2 प्रतिशत), हेल्थकेयर (6.4 प्रतिशत) और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (6 प्रतिशत) ने नई लिस्टिंग में दबदबा बनाया। इसके विपरीत कैलेंडर वर्ष 2024 की आईपीओ गतिविधि में ऑटोमोबाइल (19.3 प्रतिशत), टेलीकॉम (11.8 प्रतिशत), पूंजीगत सामान (9 प्रतिशत), रिटेल (8.7 प्रतिशत), और ई-कॉमर्स (7.6 प्रतिशत) आगे रहे। नोट में कहा गया है, ‘कैलेंडर वर्ष 2024 में जुटाई गई कुल पूंजी में करीब 18 फीसदी योगदान के बावजूद टेलीकॉम, यूटिलिटीज और प्राइवेट बैंकिंग जैसे सेक्टरों ने कैलेंडर वर्ष 2025 में एक भी पैसा नहीं जुटाया।’
ब्रोकरेज ने बताया कि पिछले दो साल में आईपीओ को 26.6 गुना ज्यादा सब्सक्राइब किया गया है। जिन सेक्टर में उनके निर्गम आकार के मुकाबले मजबूत बोलियों का स्तर देखा गया, उनमें पूंजीगत सामान, एनबीएफसी, हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी और ई-कॉमर्स शामिल हैं।
लिस्टिंग के बाद के प्रदर्शन के बारे में नोट में कहा गया है कि पिछले दो वर्षों में मेनबोर्ड यानी प्रमुख बाजार में 197आईपीओ लिस्ट हुए हैं। इनमें से 108 आईपीओ यानी 55 फीसदी अपनी ऑफर कीमत से प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं और 14 शेयर 100 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं।
आईपीओ आकार के हिसाब से टॉप 20 कंपनियों में से 16 अपने निर्गम भाव से ऊपर कारोबार कर रही हैं। भारती हेक्साकॉम अपने निर्गम भाव के मुकाबले 214 प्रतिशत फायदे के साथ सबसे आगे है। इसके बाद वारी एनर्जीज (104 प्रतिशत), मीशो (82 प्रतिशत), विशाल मेगा मार्ट (75 परसेंट) और बिलियनब्रेन्स गैराज (66 परसेंट) शामिल हैं।