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ड्रोन के साये में फरिश्ता बन काम करतीं भारत की नर्सें, साहस और दृढ़ता की मिसाल

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पश्चिम एशिया में काम करने वाली भारतीय नर्सों की तादाद 4,00,000 से 5,00,000 हो सकती है

Last Updated- March 03, 2026 | 11:26 PM IST
Nurses

कुवैत शहर से लगभग 32 किलोमीटर पश्चिम में इराक सीमा के पास एक स्थान अल जहरा है। इसे दुनिया के सबसे गर्म स्थानों में से एक माना जाता है जहां तापमान कई बार 53 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता है। अल जहरा के एक छोटे से क्लिीनिक में काम करने वाली केरल की नर्स जैस्मीन थॉमस (बदला हुआ नाम) और उनके कुछ भारतीय सहकर्मियों के लिए शनिवार की शुरुआत भी आम दिनों की ही तरह हुई थी। मगर कुछ ही घंटों में चीजें बदल गईं। अचानक उनके क्लीनिक के ऊपर से मिसाइल व ड्रोन उड़ने लगे और विस्फोटों की गूंज सुनाई देने लगी थी। एक समय उन्हें भी अपनी जान बचाने के लिए घबराहट में क्लीनिक से भागना पड़ा और बाकी समय हॉस्टल में गुजारना पड़ा।

सोमवार को जब बिज़नेस स्टैंडर्ड ने एक स्रोत के जरिये उनसे संपर्क किया तो जैस्मीन और उसके सहकर्मी काम पर वापस आ गए थे। लेकिन पूरे दिन मरीज नहीं आए। यह एकमात्र ऐसी घटना नहीं है बल्कि यह दुनिया भर के संघर्षरत इलाकों में अथक काम करने वाली भारतीय नर्सों के साहस और दृढ़ता की महज एक झलक है। चाहे 1990 के दशक में कुवैत युद्ध हो, 2003 का इराक युद्ध हो, सीरिया या मिस्र में हुए गृहयुद्ध हों या फिर मौजूदा पश्चिम एशिया का संघर्ष, भारतीय नर्सों ने पूरी निडरता और बहादुरी के साथ अग्रिम मोर्चे पर रहते हुए मुश्किलों का सामना किया है। अधिकतर जगहों पर वे सुरक्षित हैं, लेकिन पश्चिम एशिया में ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच इन ‘सफेद कपड़ों वाली फरिश्तों’ ने एक बार फिर ध्यान आकर्षित किया है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा संपर्क करने पर केरल सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि केरल की रहने वाली एक नर्स युद्धग्रस्त ईरान में पहले से ही फंसी हुई है। राज्य सरकार के लिए अनिवासी केरलवासियों की शिकायतों को दूर करने वाली नोडल एजेंसी एनओआरकेए रूट्स के मुख्य कार्याधिकारी अजित कोलासेरी ने कहा, ‘विदेश में रहने वाले नर्सिंग समुदाय के बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हमसे केवल वीजा समस्या जैसी सामान्य पूछताछ की जा रही है। मगर एक नर्स का फोन आया जो ईरान में फंस गई थी। हमें पता नहीं था कि ईरान में भी मलयाली नर्सें काम कर रही हैं।’

मगर पश्चिम एशिया में काम करने वाली जिन नर्सों या अन्य लोगों से बिज़नेस स्टैंडर्ड ने बात की, उनमें से अधिकतर की स्थिति थॉमस और उनके सहयोगियों जैसी नहीं है। संयुक्त अरब अमीरात के एक अस्पताल में काम करने वाले एक भारतीय ने कहा, ‘हम सुरक्षित हैं। मगर समय-समय पर चेतावनी के सायरन सुनाई दे रहे हैं। इसके अलावा फिलहाल कोई खतरा नहीं है। अस्पताल सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। सरकार किसी भी संभावित हमले को बेअसर करने के लिए पर्याप्त प्रयास कर रही है।’ कुवैत की एक अन्य नर्स ने कहा कि वहां प्रवासी भारतीयों के लिए चिंता की कोई बात नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन एवं विकास संस्थान (आईआईएमएडी) के अध्यक्ष एस इरुदया राजन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि केरल प्रवासन सर्वेक्षण (केएमएस) 2023 के आधार पर पश्चिम एशिया में लगभग 20 लाख केरलवासी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें करीब 20 फीसदी या लगभग 4,00,000 महिलाएं हैं। इन महिलाओं में करीब 60 फीसदी या लगभग 2,50,000 नर्सें हैं। अगर बाकी भारत को भी शमिल कर लिया जाए तो पश्चिम एशिया में काम करने वाली भारतीय नर्सों की तादाद 4,00,000 से 5,00,000 हो सकती है।

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First Published - March 3, 2026 | 11:26 PM IST

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