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फोनपे ने आईपीओ के लिए UDRHP दाखिल किया, सिर्फ ओएफएस से जुटाएगी पूंजी

बताया जाता है कि फोनपे लगभग 15 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर ओएफएस के जरिए करीब 12,000 करोड़ रुपये (1.35 अरब डॉलर) जुटाने की संभावना देख रही है

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अजिंक्या कवाले   
Last Updated- January 22, 2026 | 9:34 PM IST

वॉलमार्ट समर्थित फिनटेक कंपनी फोनपे ने विशुद्ध ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिये धन जुटाने के लिए बाजार नियामक के पास अपडेटेड ​विवरणिका का मसौदा (यूडीआरएचपी) जमा कराया है। प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) में 5.06 करोड़ इक्विटी शेयरों का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) शामिल है।

वॉलमार्ट इंटरनैशनल होल्डिंग्स इंक के स्वामित्व वाली कंपनी डब्ल्यूएम डिजिटल कॉमर्स होल्डिंग्स इसकी प्रवर्तक है। उसके समेत मौजूदा निवेशक 4.6 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहे हैं। टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट क्रमशः 10.39 लाख और 36.78 लाख शेयर बेचेंगी।

बेंगलूरु की फिनटेक कंपनी फोनपे में वॉलमार्ट की 71.77 फीसदी हिस्सेदारी है। जनरल अटलांटिक के पास 8.98 फीसदी और हेडस्टेड के पास 5.73 फीसदी हिस्सेदारी है। फोनपे के सह-संस्थापक समीर निगम और राहुल चारी के पास कंपनी की 2.55-2.55 फीसदी हिस्सेदारी है। फोनपे को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से आईपीओ के लिए मंजूरी मिलने के एक दिन बाद अपडेटेड डीआरएचपी जमा कराया गया है।

बताया जाता है कि फोनपे लगभग 15 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर ओएफएस के जरिए करीब 12,000 करोड़ रुपये (1.35 अरब डॉलर) जुटाने की संभावना देख रही है। यह आईपीओ ऐसे समय आ रहा है जब पेटीएम, मोबिक्विक, इन्फीबीम एवेन्यूज और पाइन लैब्स सहित कई फिनटेक कंपनियां भारतीय शेयर बाजारों में सूचीबद्ध हो चुकी हैं।

फोनपे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस में बाजार की अगुआ है और वह रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म पर हर महीने कुल लेनदेन का लगभग 45 फीसदी प्रोसेस करती है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में 7,115 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जो इससे एक साल पहले की तुलना में 40 फीसदी ज्यादा है। परिचालन से 1,202 करोड़ रुपये के नकदी प्रवाह के साथ कंपनी का मुक्त नकदी प्रवाह भी सकारात्मक हो गया।

फोनपे ने वित्त वर्ष 2025 में लाभप्रदता में सुधार किया और एबिटा से पूर्व समायोजित आय (ईसॉप्स लागत को छोड़कर) पिछले वर्ष के 652 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,477 करोड़ रुपये हो गई, जो दोगुना से भी अधिक है। कर पश्चात समायोजित लाभ (ईसॉप्स लागत को छोड़कर) तीन गुना से अधिक बढ़कर 197 करोड़ रुपये से 630 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

First Published : January 22, 2026 | 9:29 PM IST