फरवरी के लिए ताजा आईआरडीएआई के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि जीवन बीमा सेगमेंट में व्यक्तिगत रूप से नए व्यवसाय में कुछ नरमी आई है। बड़ी पीएसयू, एलआईसी जैसी कंपनियों में उत्साह देखा जा सकता है, क्योंकि इनमें निजी बीमा कंपनियों के मुकाबले अपेक्षाकृत अधिक वृद्घि दर्ज की गई है। लेकिन बाजार की गिरावट का मतलब है कि एलआईसी के आईपीओ को कम मूल्यांकन मिलेगा।
सालाना प्रीमियम इक्विलेंट (एपीई) सालाना आधार पर 2 वर्षीय सीएजीआर के मुकाबले घटकर 11.4 प्रतिशत रह गई। निजी बीमा कंपनियों की वृद्घि 2 वर्ष के 11 प्रतिशत के मुकाबले नरम पड़कर सालाना आधार पर 4 प्रतिशत रह गई। पीएसयू बीमा कंपनी का व्यवसाय पिछले तीन महीने से 7 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। वृद्घि (समूह जीवन बीमा समेत) निजी बीमा कंपनियों के लिए भी कमजोर (सालाना आधार पर महज 3 प्रतिशत तक) था, जबकि पीएसयू दिग्गज ने समूह सेगमेंट में शानदार वृद्घि दर्ज की।
सूचीबद्घ जीवन बीमा कंपनियों में, मैक्स लाइफ की वृद्घि अस्थिर ( 2021-22 की तीसरी तिमाही में मजबूत वृद्घि के बाद फरवरी 2022 में 16 प्रतिशत कम) रही, एसबीआई लाइफ की वृद्घि ऊंचे आधार की वजह से फरवरी 2022 में सपाट बनी रही और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ या आईसीआईसीआई प्रू की वृद्घि की रफ्तार पिछले महीने सालाना आधार पर 7 प्रतिशत कमजोर रही। हालांकि प्रीमियम के लिए आकार मासिक आधार पर 41 प्रतिशत तक बढ़ा था, जो उद्योग के लिए 6 प्रतिशत था। एचडीएफसी लाइफ के लिए यह जनवरी 2022 में गिरावट के बाद सालाना आधार पर 9 प्रतिशत बढ़ा।
शेयर कीमतें सूचीबद्घ बीमा कंपनियों के लिए तेजी से गिरी हैं। एचडीएफसी लाइफ पिछले तीन महीने में 24.5 प्रतिशत नीचे आया है, एसबीआई लाइफ में 11 प्रतिशत, निप्पॉन लाइफ में 18 प्रतिशत, आईसीआईसीआई प्रू लाइफ में 22 प्रतिशत और मैक्स फाइनैंशियल में 11 प्रतिशत की कमजोरी आई है। इससे मूल्यांकन आकर्षक हो गए हैं, क्योंकि इनमें नरमी भले ही आई है, लेकिन अभी भी इनमें वृद्घि बनी हुई है।
एसबीआई लाइफ को कुछ बाजार भागीदारी हासिल हो सकती है, और उसका वितरण नेटवर्क अच्छा है। एचडीएफसी लाइफ में वृद्घि के संदर्भ में नरमी आई है, लेकिन उसने पहले बाजार भागीदारी हासिल की थी। आईसीआईसीआई प्रू लाइफ ने इकाइयों में कमी की भरपाई के लिए प्रीमियम आाकर में तेजी दर्ज की है।
आकलन के लिहाज से किसी बीमा व्यवसाय के साथ अन्य कारक फ्लोट से उपलब्ध प्रतिफल है। एम्बेडेड वैल्यू पर प्रतिफल (आरओईवी) एसबीआई लाइफ के लिए 19 प्रतिशत के आसपास है। एचडीएफसी लाइफ के लिए आरओईवी करीब 18.5 प्रतिशत, जबकि आईसीआईसीआई प्रू के लिए 15 प्रतिशत और मैक्स फिन के लिए 18.6 प्रतिशत है।
कई बड़े ब्रोकरों के विश्लेषकों ने जीवन बीमा कंपनियों को लेकर अपना सकारात्मक नजरिया बरकरार रखा है। बीमा कंपनियों द्वारा नए व्यवसाय की वैल्यू (वीएनबी) के लिए 15-18 प्रतिशत सीएजीआर दर्ज करने और शेयर भाव में गिरावट का अनुमान जताया है जिससे मूल्यांकन आकर्षक हो गया है। दीर्घावधि में, सभी आबादी में पहुंच काफी कम है, जिसका मतलब मजबूत वृद्घि परिदृश्य है। लेकिन शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव से यूलिप संग्रह में गिरावट को बढ़ावा मिल सकता है।
महत्वपूर्ण मुद्दा एलआईसी की सूचीबद्घता को लेकर है। क्या सरकार शेयर बाजार में गिरावट और जीवन बीमा कंपनियों में कमजोरी को देखते हुए इस आईपीओ को टाल देगी, यह कोई नहीं जानता। हालांकि जब एलआईसी सूचीबद्घ हो जाएगी, कुछ निवेशक अपना दांव इस क्षेत्र में अन्य जगहों पर लगाने पर जोर दे सकते हैं और इससे यह भी संभव है कि एलआईसी सूचीबद्घता के बाद विपरीत दांव साबित न हो जाए।