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छोटी एनबीएफसी पर फिर गहरा सकता है वित्तीय संकट

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Last Updated- December 15, 2022 | 4:55 AM IST

रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स का कहना है कि कोविड-19 महामाारी की वजह से पैदा हुई समस्या के बाद एक बार फिर से एनबीएफसी, खासकर छोटी वित्तीय कंपनियों की राह में वित्तीय चुनौतियां गहरा सकती हैं, क्योंकि बैंक जोखिम लेने से परहेज कर रहे हैं।
रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि जोखिम टालने की बढ़ती प्रवृत्ति से नकदी को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं और इस वजह से बैंक ऋण देने में ज्यादा सतर्कता बरत रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े के अनुसार एनबीएफसी के लिए बकाया बैंक उधारी मई 2020 में मामूली घटकर 8.04 लाख करोड़ रुपये रह गई जो अप्रैल 2020 में 8.12 लाख करोड़ रुपये थी।
म्युचुअल फंडों से एनबीएफसी उधारी अप्रैल 2020 के 1.34 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मई 2020 में 1.45 लाख करोड़ रुपये हो गई। केयर ने फंडिंग पैटर्न की समीक्षा में कहा है कि अल्पावधि में, लॉकडाउन के धीरे धीरे हटने से कुछ खास एनबीएफसी की कोष उगाही क्षमता और ऋण वसूली के प्रयास तरलता के नजरिये से महत्वपूर्ण साबित होंगे। इस क्षेत्र के लिए संपूर्ण फंडिंग परिवेश कुछ हद तक सुधरा है, क्योंकि आरबीआई दर कटौती के बाद प्रतिफल में कमी की वजह से बैंकिंग व्यवस्था में नकदी का स्तर बढ़ा है।
सरकार और आरबीआई द्वारा विभिन्न कोष उगाही माध्यमों पर जोर दिए जाने से भी वित्त पोषण की स्थिति में सुधार आया है। कुछ वित्तीय व्यवस्थाओं में टारगेटेड लॉन्ग टर्म रीपो ऑपरेशंस, एक्सटेंडेड पाॢशयल गारंटी स्कीम (बैलेंस शीट उधारी के साथ साथ ऐसेट पूल खरीदारी के लिए) शामिल हैं। इसके अलावा संग्रह में सुधार की उम्मीद से भी एनबीएफसी क्षेत्र के लिए नकदी स्थिति सुधारने में कुछ हद तक मदद मिलेगी।

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First Published - July 12, 2020 | 11:35 PM IST

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