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सौदा गतिविधियों को कोविड का झटका

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Last Updated- December 15, 2022 | 4:03 AM IST

कैलेंडर वर्ष 2020 के सात महीनों के दौरान भारतीय कंपनियों द्वारा किए गए सौदों में मूल्य के लिहाज से पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 36 फीसदी की जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने दूरसंचार एवं डिजिटल कारोबार जियो प्लेटफॉर्म में 21.7 अरब डॉलर की हिस्सेदारी बेचकर कोविड वैश्विक महामारी के बावजूद इस क्षेत्र में अग्रणी रही। लेकिन जियो में हिस्सेदारी बिक्री को छोड़ दिया जाए तो इस लेनदेन का मूल्य करीब 60 फीसदी घट जाएगा।
एक बैंकर ने कहा, ‘पहली छमाही के दौरान सौदा संबंधी गतिविधियों में जबरदस्त गिरावट दिखी और वह पिछले छह साल के निचले स्तर तक लुढ़क गई।’ पिछले साल जनवरी से जुलाई की अवधि में भारत ने 88.88 अरब डॉलर मूल्य के सौदे हासिल किए थे लेकिन इस साल कुल 56.73 अरब डॉलर मूल्य के लेनदेन हुए जिसे मुख्य तौर पर रिलायंस जियो सौदे से बल मिला। इस दौरान सौदों की संख्या लगभग आधी घटकर 865 रह गई।
कानून फर्म खेतान ऐंड कंपनी के अनुसार, कई भारतीय कंपनियां अपने प्रमुख कारोबार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों को बेचने की योजना बना रही हैं। कुछ भारतीय कंपनियों ने जबरदस्त मूल्यांकन पर अपनी विदेशी परिसंपत्तियों की बिक्री की हैं। इसे देखते हुए कंपनियां अच्छे मूल्य वाली परिसंपत्तियों को भुनाकर रकम जुटाने की भी कोशिश कर रही हैं।
खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर रवींद्र झुनझुनवाला ने कहा, ‘भारतीय प्रवर्तकों के बीच जोखिम से बचने, ऋण बोझ घटाने, गैर प्रमुख परिसंपत्तियों को बेचने और रणनीति अथवा वित्तीय साझेदारों को आकर्षित करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। हमने भारतीय कंपनियों को विदेश में रणनीतिक अधिग्रहण करते हुए देखा है।’
ऊर्जा एवं बिजली, दूरसंचार एवं वित्तीय सेवा जैसे क्षेत्रों में कई सौदे हुए हैं लेकिन कुछ सौदे औषधि क्षेत्र में भी देखे गए हैं। उदाहरण के लिए, निजी इक्विटी निवेशक कार्लाइल ने 49 करोड़ डॉलर यानी करीब 3,700 करोड़ रुपये के एक सौदे के तहत पीरामल के औषधि कारोबार में 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है।

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First Published - July 31, 2020 | 12:30 AM IST

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