facebookmetapixel
Advertisement
Yes Bank का ₹16,000 करोड़ जुटाने का प्लान, बोर्ड ने इक्विटी और डेट इश्यू को दी मंजूरीभारत का विदेशी कर्ज बढ़कर 762.8 अरब डॉलर पर पहुंचा, GDP के मुकाबले बढ़ा बोझसरकार ने हटाई डीजल-पेट्रोल खरीद पर लगी रोक, कम​र्शियल खरीदारों को राहत8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर 2, 2.5 और 3 होने पर कितनी बढ़ेगी लेवल 1 से 7 तक के कर्मचारियों की सैलरी और HRA?दिल्ली में बिजली की डिमांड के टूटे सारे रिकॉर्ड, क्या 9,000 मेगावॉट तक जाएगी डिमांडमहिला उद्यमियों का डिजिटल पेमेंट पर भरोसा बढ़ा, लेकिन फ्रॉड और डेटा सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती: स्टडीमानसून की धीमी चाल, दलहन फसलों का रकबा 30% घटाTata Value Fund Review: ₹10,000 की मंथली SIP, 22 साल का धैर्य और ₹1.78 करोड़ का फंड! देखें कहां लगा है पैसा?अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर: मई में देश का औद्योगिक उत्पादन 5.1% बढ़ा, मैन्युफैक्चरिंग में जबरदस्त तेजीDelhi EV Policy 2.0 1 जुलाई से होगी लागू, EV खरीदने पर ₹50,000 तक मिलेगी सब्सिडी; जानें पूरा प्लान

16 महीने बाद सालाना आधार पर FPI पूंजी प्रवाह में आया सुधार

Advertisement
Last Updated- May 25, 2023 | 10:17 PM IST
FPI Selling

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) प्रवाह दिसंबर 2021 के बाद से पहली बार पिछले 12 महीने (टीटीएम) के आधार पर मजबूत हुआ है। पिछले तीन महीनों के दौरान मजबूत निवेश प्रवाह की मदद से घरेलू इक्विटी बाजारों में टीटीएम वैश्विक प्रवाह 7.3 अरब डॉलर पर दर्ज किया गया जो नवंबर 2021 के बाद से सर्वाधिक है। इससे निफ्टी के एक वर्षीय प्रतिफल को 12 प्रतिशत पर पहुंचने में मदद मिली।

जनवरी 2021 और अप्रैल 2023 के बीच, टीटीएम एफपीआई प्रवाह लगातार 16 महीनों तक कमजोर रहा था। इस अवधि के दौरान औसत टीटीएम निफ्टी प्रतिफल 7.6 प्रतिशत रहा, और 16 में से 8 महीनों के दौरान 5 प्रतिशत से भी कम रहा।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जहां मजबूत घरेलू प्रवाह से बाजार को मदद मिली, वहीं सकारात्मक एफपीआई प्रवाह बाजारों के लिए शानदार प्रतिफल देने के लिए जरूरी है।

विश्लेषकों का कहना है कि एफपीआई प्रवाह में ताजा सुधार कई कारणों से आया है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषक विनोद कार्की और नीरज करनानी ने एक रिपोर्ट में कहा है, ‘एफपीआई प्रवाह के लिए परिदृश्य सुधरा है, क्योंकि हाल में वैश्विक इक्विटी बाजारों के मुकाबले अमेरिका और भारत के मजबूत प्रदर्शन की वजह से भी यहां एफपीआई का निवेश बढ़ा है। भारतीय बाजार में तेजी पिछले एक साल के दौरान उभरते बाजार (ईएम) के सूचकांकों के मुकाबले भारत के महंगे मूल्यांकन में कमी और पर केंद्रित रही है।’

Also read: भारत-अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल अंतर 14 वर्ष के निचले स्तर पर: विश्लेषक

वर्ष की शुरुआत के दौरान, भारत ने एफपीआई प्रवाह में कमजोरी दर्ज की थी। लेकिन मार्च और खासकर मई में भारत में एफपीआई प्रवाह अन्य ईएम के मुकाबले तेजी से बढ़ा है। अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट ने कहा, ‘इसे लेकर काफी अनिश्चितता थी कि क्या विकसित दुनिया में बैंकिंग संकट की वजह से अल्पावधि प्रभाव दिखेगा।

Advertisement
First Published - May 25, 2023 | 10:17 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement